अनूपगढ़ में 16 वर्षीय नाबालिग से रेप के मामले में आरोपी को 20 साल की सजा सुनाई गई है। साथ ही 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। डीएनए जांच से आरोप सिद्ध हुए, जिसके बाद श्रीगंगानगर पोक्सो कोर्ट-2 ने आरोपी को सजा सुनाई है।
मामला अक्टूबर 2024 में सामने आया था, जब पीड़िता के पिता ने अनूपगढ़ पुलिस थाने में अपनी 16 वर्षीय बेटी को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने का मामला दर्ज करवाया था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की और सिरसा के गांव शहीदावाली निवासी संदीप सिंह (24) पुत्र राजकुमार कंबोज को गिरफ्तार किया। जांच में पता चला कि आरोपी नाबालिग के साथ अपने ही गांव के ईंट भट्टों पर रह रहा था।
डीएसपी प्रशांत कौशिक ने बताया- सूचनाओं पर पुलिस को पता लगा कि संदीप नाबालिग लड़की को सिरसा जिले के गांव शहीदावाली में लेकर गया है। सूचना की पुष्टि होते ही पुलिस टीम ने जनवरी 2025 में नाबालिग लड़की को गांव शहीदावाली के ईंट भट्ठे से दस्तयाब कर लिया, लेकिन आरोपी संदीप वहां से फरार हो चुका था। डीएसपी ने बताया कि जिस समय नाबालिगा को दस्तयाब किया गया तो उस समय वो 3 महीने से गर्भवती थी। उन्होंने बताया कि नाबालिग का कोर्ट के आदेशों और परिजनों की सहमति से गर्भपात करवाया गया।

आरोपी संदीप ने हरियाणा-पंजाब हाईकोर्ट में पोक्सो का झूठा केस दर्ज कराने की याचिका दायर की थी। जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया और पुलिस के समक्ष पेश होने के निर्देश दिए थे।
आरोपी ने हाईकोर्ट में याचिका की दायर डीएसपी ने बताया कि आरोपी संदीप ने नाबालिग को दस्तयाब करने के बाद जनवरी में ही हरियाणा-पंजाब के चंडीगढ़ हाई कोर्ट में अपने वकील के जरिए याचिका दायर की। आरोपी ने याचिका में कहा कि उस पर जो पोक्सो का मामला दर्ज किया गया है, वो झूठा है। डीएसपी ने बताया कि हाई कोर्ट ने उसकी याचिका को खारिज करते हुए आरोपी के वकील को आरोपी को पुलिस के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए, लेकिन आरोपी पुलिस के समक्ष पेश नहीं हुआ और वो फरार हो गया।
पुलिस ने 15 हजार रुपए का रखा इनाम डीएसपी प्रशांत कौशिक ने बताया कि कोर्ट के निर्देशों पर भी आरोपी पुलिस के समक्ष पेश नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि पुलिस टीम ने आरोपी के ठिकानों पर लगातार दबिश दी और उसकी तलाश की। आरोपी के नहीं मिलने पर पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर 15000 रुपए का नगद इनाम भी घोषित कर दिया था।

5 दिनों तक कॉन्स्टेबल ने ड्राइवर बनकर की रैकी डीएसपी प्रशांत कौशिक ने बताया कि पुलिस को अभी तक यह पता नहीं लग पाया था कि आरोपी शहीदावाली में किस ईंट भट्ठे पर काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि आरोपी की तलाश के लिए 21 फरवरी 2025 को कॉन्स्टेबल सतनाम सिंह को शहीदावाली भेजा गया। उन्होंने बताया कि सतनाम सिंह ने वहां ट्रैक्टर और जेसीबी का ड्राइवर बनकर आरोपी संदीप की तलाश शुरू की। 5 दिनों तक सतनाम सिंह ईंट भट्टों पर ट्रैक्टर और जेसीबी का ड्राइवर बनकर जब संदीप की तलाश कर रहा था। पांचवे दिन आरोपी संदीप सिंह का पता चल गया और सतनाम सिंह की सूचना पर पुलिस टीम ने संदीप को मार्च में दस्तयाब कर लिया।
डीएनए जांच से आरोप हुए साबित डीएसपी ने बताया कि जब नाबालिग का गर्भपात करवाया गया तो उस समय उसकी डीएनए जांच के लिए सैम्पल ले लिए गए थे। उन्होंने बताया कि आरोपी संदीप को गिरफ्तार करने के बाद उसके भी सैंपल लेकर दोनों के डीएनए जांच करवाई गई। डीएनए जांच की रिपोर्ट में ये साबित हो गया कि इस घटना का आरोपी संदीप ही है।
कोर्ट ने सुनाई 20 साल की सजा डीएसपी ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद मार्च 2025 में कोर्ट में आरोपी के खिलाफ चालान पेश किया गया। डीएनए की रिपोर्ट, डीएसपी और अन्य गवाहों के बयानों के आधार पर श्रीगंगानगर के पोक्सो कोर्ट-2 ने आरोपी को 20 साल की सजा और 50 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई। डीएसपी प्रशांत कौशिक ने बताया कि कोर्ट के आदेशों पर आरोपी संदीप को जेल भेज दिया गया है।
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