व्हीलचेयर डांस ट्रूप वी आर वन (WAO) ने मैजिक ऑन व्हील्स कार्यक्रम में अपने अद्वितीय और भावनात्मक परफॉर्मेंस से दर्शकों का दिल जीत लिया।
राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (आर.आई.सी.), जयपुर की शाम एक विलक्षण सांस्कृतिक संध्या का साक्षी बनी, जब भारत की पहली व्हीलचेयर डांस ट्रूप वी आर वन (WAO) ने मैजिक ऑन व्हील्स कार्यक्रम में अपने अद्वितीय और भावनात्मक परफॉर्मेंस से दर्शकों का दिल जीत लिया।
कार्यक्रम का नेतृत्व ट्रूप के संस्थापक और निर्देशक हुसनैन ने किया, जो स्वयं एक दिव्यांग हैं। लेकिन उनकी ऊर्जा, दृष्टिकोण और नेतृत्व ने यह स्पष्ट कर दिया कि व्हीलचेयर कोई बाधा नहीं, बल्कि क्षमता का प्रतीक है। उन्होंने और उनकी टीम ने यह संदेश भी दिया कि हमें दया नहीं, अवसर चाहिए।

कलाकारों की टीम ने यह संदेश भी दिया कि हमें दया नहीं, अवसर चाहिए।
ट्रूप ने विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए दर्शकों को भावनात्मक और मानसिक रूप से झकझोर दिया। गणेश वंदना (व्हीलचेयर पर) देकर कार्यक्रम की शानदार शुरुआत की। इसके बाद दुर्गा प्रस्तुति, सूफी युगल नृत्य, क्लासिकल फ्यूजन और शिव तांडव, भगवद गीता पर प्रस्तुति, व्हीलचेयर पर मार्शल आर्ट्स फ्यूजन खास रहे। ‘जय हो’ पर जोशीली प्रस्तुति दी और ‘वंदे मातरम्’ के साथ कार्यक्रम का समापन किया।

‘जय हो’ पर जोशीली प्रस्तुति दी और ‘वंदे मातरम्’ के साथ कार्यक्रम का समापन किया।
हर प्रस्तुति के बाद हॉल तालियों से गूंज उठा। दर्शक कई बार अपनी सीटों से खड़े होकर इन प्रस्तुतियों का सम्मान करते नजर आए। इस ग्रुप में दिव्यांग कलाकारों के साथ-साथ सक्षम कलाकार भी शामिल हैं। कुछ महिला कलाकार श्रवण एवं वाणी बाधित थीं, तो कई कलाकार व्हीलचेयर या बैसाखियों के सहारे मंच पर आते हैं। फिर भी उनकी प्रस्तुति इतनी सशक्त और भावनात्मक होती है कि मंच उनकी शक्ति का विस्तार बन जाता है।
हुसनैन को भारत के राष्ट्रपति और सिंगापुर सरकार की ओर से भी भी सराहा जा चुका है। उन्होंने अपने ट्रूप को सिर्फ एक परफॉर्मिंग ग्रुप नहीं, बल्कि एक आंदोलन में बदला है, जो कहता है कि व्हीलचेयर अक्षमता का नहीं, बल्कि सामर्थ्य का प्रतीक हो सकता है।
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