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संस्कृत शिक्षा विभाग ने फर्जीवाड़े के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्त चार वरिष्ठ अध्यापकों को राजकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया है। इन अध्यापकों ने वरिष्ठ अध्या पक (संस्कृत शिक्षा) प्रतियोगी परीक्षा-2022 के तहत नि
नियुक्ति के बाद विभाग द्वारा दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया के अंतर्गत एसएमएस अस्पताल में इन शिक्षकों के दिव्यांगता प्रमाण पत्रों की जांच कराई गई। जांच में यह प्रमाण पत्र फर्जी या मापदंडों के अनुरूप नहीं पाए गए, जिसके बाद विभाग ने सभी को अपात्र घोषित करते हुए सेवा से मुक्त कर दिया।
एक हिन्दी और तीन सामाजिक विज्ञान के शिक्षक शामिल
विष्णु कुमार, पुत्र बीरेंद्र सिंह पदस्थापन: रा. वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत स्कूल, देहरा, भरतपुर विषय: हिंदी
सुंदर सिंह, पुत्र सत्यवीर सिंह पदस्थापन: राजकीय प्रवेशिका संस्कृत स्कूल, नीमला, अलवर विषय: सामा. विज्ञान
लोकेश राठौर, पुत्र चतुर्भुज राठौर पदस्थापन: रा. वरिष्ठ अध्यापक संस्कृत, तेल फैक्ट्री, बारां विषय: सामा. विज्ञान
संजीव कुमार, पुत्र रूपसिंह
पदस्थापन: राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत स्कूल, सेवर, भरतपुर विषय: सामा. विज्ञान
कारण: इन सभी को निशक्तजन श्रेणी में अयोग्य पाए जाने के कारण सरकारी सेवा से तत्काल प्रभाव से हटाया गया है।
गलत तरीके से नियुक्ति पाने वालों को हटाया जाएगा “चयन प्रक्रियाओं में गलत तरीकों का इस्तेमाल कर सरकारी सेवा में नियुक्ति प्राप्त करने वाले को सेवा से मुक्त किया जाएगा। भर्ती में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं करेंगे। सत्यापन के बाद अपात्र पाए गए सभी अभ्यर्थी नौकरी से हटेंगे।”
– मदन दिलावर, शिक्षा मंत्री
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