जालोर में 1300 साल पुराना सुंदेलाव तालाब ओवरफ्लो हो गया। इससे 200 मकान पानी में डूब गए। लोगों का कहना है कि 4 दिन से यही हालात हैं। दीवारों से रिसकर सीवर का पानी आ रहा है। बच्चे बीमार पड़ने लगे हैं। बदबू से हाल बेहाल है। लोगों को आम जरूरत के लिए घर से
सुंदेलाव तालाब से ओवरफ्लो होकर पानी शहर की 5 कॉलोनियों के 200 घरों में घुस गया है।
दैनिक भास्कर की टीम ने ग्राउंड पर जाकर लोगों से बात की और हालात जाने…

सुंदेलाव तालाब से ओवरफ्लो होकर पानी कॉलोनियों में घुस गया है। दैनिक भास्कर रिपोर्टर भरत सांखला इसी पानी से होकर लोगों तक पहुंचे और हालात का जायजा लिया।
घरों में घुस रहा सीवरेज का पानी सुंदेलाव तालाब के पास कॉलोनी में रहने वाली भागू देवी ने बताया- सुंदेलाव से होते हुए सीवरेज का पानी कॉलोनी में आ रहा हैं। 4 दिन से यहां पानी भरा है। मैं बीमार पड़ गई। आज ही हॉस्पिटल जाकर आई हूं। हमें कुछ हो गया तो सरकार जिम्मेदार होगी।
सीवर का पानी घरों में घुसने लगा है। खाना बनाकर भी कैसे खाएं। घर में रहना ही मुश्किल हो गया है।

कॉलोनी निवासी भागू देवी के घर के अंदर तक पानी घुस गया है। बदबू से हाल बेहाल है। घर में परिवार कैद होकर रह गया है।
‘घरों के वाटर टैंक में सीवर का पानी भर गया’ यहीं पास में रहने वाली मीना देवी ने बताया- पिछले 7 साल से हर मानसून कमोबेस यही हालात बन रहे हैं। तालाब ओवरफ्लो होता है और कॉलोनी में पानी भर जाता है।
इस समस्या को लेकर कई बार कलेक्टर डॉ. प्रदीप के. गवांडे, नगर परिषद आयुक्त दिलीप माथुर और जालोर विधायक जोगेश्वर गर्ग को ज्ञापन दिए, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।
घरों के वाटर टैंक में सीवर का पानी भर गया है। पीने लायक पानी नहीं बचा है। बाहर से पानी लाना पड़ रहा है। अब अगर एक भी जोरदार बारिश आ गई तो कमरों तक पानी घुस जाएगा। फिर घर खाली करके जाना पड़ेगा। इन हालात में डर लग रहा है।

लोग अपने घरों की दहलीज से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। पानी के कारण आने-जाने में दिक्कतें हो रही हैं।
बेटी की 3 दिन पहले डिलीवरी हुई, इलाज नहीं हो पा रहा कृष्णा नगर कॉलोनी निवासी इंद्रा देवी ने बताया-मकान के चारों तरफ दूर-दूर तक पानी भरा है। मेरी बेटी की डिलीवरी 3 दिन पहले हुई थी। इलाज के लिए नर्स भी घर तक नहीं पहुंच पा रही है। हम बेटी को बाहर नहीं ले जा सकते। अब क्या करें?
घर के हर हिस्से में पानी भरा है। दीवारों से रिसकर सीवरेज का पानी आ रहा है। 2 दिन से बिजली नहीं है। अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। पीने, नहाने और खाना बनाने के लिए भी पानी बाहर से उठाकर लाना पड़ रहा है।

लोगों को घरेलू सामान और जरूरी काम के लिए जान जोखिम में डालकर निकलना पड़ रहा है।
बच्चे बीमार पड़ रहे बच्चे घरों में कैद हो गए हैं। दूध वाले घरों तक नहीं पहुंच रहे। बिजली नहीं होने के कारण रखा हुआ दूध फट गया। बच्चों को पाउडर का दूध पिला रहे हैं। लाइट नहीं आने के कारण मच्छर काट रहे हैं। बच्चे बीमार पड़ रहे हैं।
कलेक्टर बोले- स्थायी समाधान के लिए डीपीआर बनाकर भेजी जिला कलेक्टर डॉ प्रदीप के गवांड़े ने इस मामले को लेकर कहा- जल निकासी को लेकर नगर परिषद काम कर रही है। कई जगह पानी के रास्ते खोलकर निकासी की जा रही हैं। स्थायी समाधान के लिए डीपीआर बनाकर भेजी है। जल्द समाधान किया जाएगा।
वहीं नगर परिषद आयुक्त दिलीप माथुर ने कहा- पानी की निकासी कर दी है। तालाब से पानी की आवक तेज गति से हो रही है। इसलिए पानी खाली नहीं हो पा रहा है। मंगलवार को एक दो स्थानों से और निकासी की जाएगी।
स्थायी समाधान के लिए 2 करोड़ 45 लाख की लागत से करीब सवा दो किलोमीटर लम्बी नहर बनाकर मामा नाड़ी में पानी को छोड़ा जाएगा। इससे इसका स्थायी समाधान होगा।
तस्वीरों में देखिए हालात…

सुंदेलाव तालाब से इस तरह पानी ओवरफ्लो होकर कॉलोनियों तक पहुंच रहा है।

सुंदेलाव तालाब की 5 कॉलोनियां चार दिन से जलमग्न हैं।

कई जगह गलियों में 3 फीट तक पानी भरा है।

लोग बड़ी मुश्किल से यहां जीवन यापन कर रहे हैं। एक दूसरे की मदद कर रहे हैं।

कॉलोनी में रहने वाले राजूभाई माली ने कई बार जिम्मेदारों को फोन लगाए, लेकिन जलभराव की समस्या को लेकर खास रिस्पॉन्स नहीं मिला।
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