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राजस्थान के सबसे बड़े अस्पताल जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) के ट्रॉमा सेंटर में आग लगने से 8 मरीजों की मौत हो गई। जहां मरीजों को जिंदगी बचाने के लिए लाया जाता, वहीं लाशों के ढेर लग गए। इस हादसे की वजह ट्रॉमा सेंटर के स्टोर रूम में शॉर्ट सर्किट होना बता

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लेकिन इतने बड़े हादसे का असली जिम्मेदार कौन है? भास्कर ने इसकी पड़ताल की। ट्रॉमा सेंटर के इंचार्ज से लेकर चिकित्सा मंत्री तक ऐसे 9 लोग हैं, जिनकी हादसे से पहले और हादसे के बाद तक अनदेखी की भारी कीमत मरीजों ने अपनी जान देकर चुकाई। पढ़िए ये रिपोर्ट…

8 मरीजों की मौत के असली जिम्मेदार ये 9 लोग ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में रविवार रात 11.20 बजे आग लगी। हादसे में 3 महिलाओं सहित 8 मरीजों की मौत हो गई। इसके असली जिम्मेदार प्रदेश के चिकित्सा मंत्री से लेकर वो आला अफसर हैं, अगर वो अपनी जिम्मेदारी सही से निभाते तो शायद इतना बड़ा हादसा नहीं होता।

SMS अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में आग से 8 मरीजों की मौत हो गई।

SMS अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में आग से 8 मरीजों की मौत हो गई।

शासन सचिवालय से एसएमएस अस्पताल की दूरी 2 किलोमीटर से भी कम है, फिर भी मंत्री से लेकर प्रमुख सचिवों ने खानापूर्ति के लिए गिने चुने ही निरीक्षण किए। हर निरीक्षण में बताए खुद के सुझावों के रिव्यू तक के लिए फुर्सत नहीं निकाल पाए।

एक गंभीर बात यह भी है कि 2020 के बाद से SMS अस्पताल में कार्यवाहक अधीक्षक लगाए गए हैं। अधीक्षक पद के लिए दो बार इंटरव्यू हो चुके हैं, लेकिन सरकार अब तक कोई परमानेंट अधीक्षक नहीं नियुक्त कर पाई।

अब पढ़िए- इस हादसे के जिम्मेदार 9 लोग, उनकी क्या जिम्मेदारी थी और क्या नहीं किया

जिम्मेदार नंबर – 1

क्या जिम्मेदारी? : हादसे के सूचना मिलते ही अस्पताल पहुंचना और राहत कार्यों को और दुरुस्त करवाने की जिम्मेदारी थी। हादसे से पहले ही रूटीन निरीक्षणों के जरिए अस्पताल के इन्फ्रास्ट्रक्चर को लगातार दुरुस्त करवाते रहना, अस्पतालों में थका देने वाली व्यवस्थाओं को सरल बनाना।

क्या किया? : हादसे के कई घंटों बाद अस्पताल पहुंचे। मौके पर जल्दी पहुंचकर पीड़ितों की सुध लेते, तो रेस्क्यू में लगी मशीनरी और अच्छे से काम करती।

विभाग और विभागीय व्यवस्थाओं पर पकड़ कमजोर होने के आरोप। वीआईपी मरीज भर्ती हो जाए तो केवल उसे देखने अस्पताल जाते। मंत्री बनने के बाद एक-दो बार ही अस्पतालों का निरीक्षण करने गए। इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधार करने में रुचि नहीं दिखाई।

अपनी जिम्मेदारी पर क्या बोले वो सुनिए? सूचना मिलते ही जयपुर की ओर निकल गया था। जांच के आदेश दे दिए हैं और कमेटी गठित की है। घटना का काफी दुख है।

जिम्मेदार नंबर – 2

क्या जिम्मेदारी? : अस्पतालों का लगातार निरीक्षण करना। अस्पतालों के इन्फ्रास्ट्रक्चर में लगातार सुधार करवाना। विभाग को गुटबाजी के आरोप से मुक्त करवाना, जिससे व्यवस्थाएं और सुधार कार्य अच्छे से और जल्दी हों।

क्या किया? : अस्पतालों का केवल एक-आध बार निरीक्षण। भीड़भाड़ और मरीजों की संख्या के अनुसार व्यवस्था सुगम बनवाने में विफल। मशीनरी को पूरी तरह मरीजों व जनता के प्रति जवाबदेह नहीं बना सके।

जिम्मेदारी से जुड़े सवाल पूछे तो – मीटिंग में होने की बात कही।

जिम्मेदार नंबर – 3

क्या जिम्मेदारी? अस्पतालों का लगातार निरीक्षण करना। अस्पतालों को हर संभावित खतरे से सुरक्षित रखना, इसके लिए अस्पतालों के इंफ्रास्ट्रचर में लगातार सुधार करवाना। विभाग को गुटबाजी के आरोप से मुक्त करवाना, जिससे व्यवस्थाएं और सुधार कार्य अच्छे से और जल्दी हों।

क्या किया? अस्पतालों का केवल दो-चार बार निरीक्षण। भीड़भाड़ और मरीजों की संख्या के अनुसार व्यवस्था सुगम बनवाने में विफल। मशीनरी को पूरी तरह मरीजों व जनता के प्रति जवाबदेह नहीं बना सके।

फोन नो रिप्लाई : पक्ष जानने के लिए संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फोन रिसीव नहीं किया।

जिम्मेदार नंबर – 4

क्या जिम्मेदारी? एसएमएस मेडिकल कॉलेज और इसके अधीन आने वाले अस्पतालों का प्रशासनिक प्रबंधन, सुधार के लिए धन का कुशल उपयोग और जवाबदेही। मरीजों की सुविधाओं के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास और रखरखाव की निगरानी करना।

क्या किया? अस्पतालों के इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार और रखरखाव की गति काफी धीमी, अस्पताल के संसाधनों का मरीजों की संख्या और दबाव को देखते हुए उचित इस्तेमाल नहीं।

फोन नो रिप्लाई : पक्ष जानने के लिए संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फोन रिसीव नहीं किया।

जिम्मेदार नंबर – 5

क्या जिम्मेदारी? : अस्पताल की व्यवस्था सुधार और अव्यवस्थाओं को दूर करने का जिम्मा इनका ही है। कहीं, पुरानी वायरिंग है, टूट-फूट है या जर्जर कमरों को दुरुस्त करवाने की जरूरत है या फिर अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था, सभी की सीधी जिम्मेदारी।

क्या किया? : पुराने ढांचे में कोई सुधार नहीं करवाया। अस्पताल के कई कमरे जर्जर हो चुके। कई कमरों में वायरिंग खराब। बरसात में पानी भरता है। कई बार छतों का प्लास्टर टूटकर गिरता है।

अपनी जिम्मेदारी पर क्या बोले वो सुनिए? अस्पताल में सभी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का लगातार प्रयास करते हैं। आईसीयू-1 में जब शॉर्ट सर्किट से आग लगी, तो मरीजों को शिफ्ट किया गया। आग अन्य वार्डों तक नहीं चली जाए, इसके लिए आग पर भी तत्काल काबू पाया गया।

जिम्मेदार नंबर – 6

क्या जिम्मेदारी? ट्रॉमा सेंटर में शॉर्ट सर्किट से जहां हादसा हुआ, उसमें गड़बड़ी की मॉनिटरिंग और फिर उसे दुरुस्त कराने की जिम्मेदारी इन्ही की बनती थी।

क्या किया? पुराने ढांचे में कोई सुधार नहीं करवाया। कई जर्जर कमरों से प्लास्टर टूटकर गिरने की घटनाएं सामने आईं। ट्रॉमा सेंटर जैसी संवेदनशील यूनिट को हादसे से बचाने में विफल रहे।

अपनी जिम्मेदारी पर क्या बोले वो सुनिए? : PWD की टीमें चौबीस घंटे रहती हैं, जो नजर रखती हैं। मेरा काम सिर्फ कोआर्डिनेशन का रहता है।

जिम्मेदार नंबर – 7

क्या जिम्मेदारी? : न्यूरो सर्जरी डिपार्टमेंट के हेड होने के नाते इससे जुड़े सभी आईसीयू की जिम्मेदारी इनकी। जिस आईसीयू में शॉर्ट सर्किट हुआ, उसकी व्यवस्था व प्रबंधन की जिम्मेदारी इनकी बनती है।

क्या किया? इस आईसीयू की वायरिंग सहित बिजली से जुड़े उपकरणों के रखरखाव को लेकर आगाह नहीं किया। अनदेखी के कारण इतना बड़ा हादसा हुआ।

जिम्मेदारी पर क्या बोले? : हम कई व्यवस्थाओं को लेकर लगातार लेटर भी लिखते हैं और मौखिक भी बताते हैं।

जिम्मेदार नंबर – 8

क्या जिम्मेदारी? ट्रॉमा सेंटर से सीधा जुड़ाव होने के कारण मरीजों से जुड़ी व्यवस्था हो या इन्फ्रास्ट्रक्चर में कोई खामी, सुधार करवाने की सबसे पहली कड़ी यही है। शॉर्ट सर्किट या अन्य किसी भी तरह की आशंका के लिए आगाह करना। अपने कार्यक्षेत्र में व्यवस्था और अनुशासन बनाए रखना।

क्या किया? : ट्रॉमा सेंटर में जहां मेंटेनेंस की जरूरत थी, उसे लेकर बार-बार आगाह किया, अधीक्षक को चिट्ठियां भी लिखीं और कहा भी। लेकिन इसके ऊपर जिम्मेदारों को शिकायत नहीं की। हादसे की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे और मरीजों को बाहर निकालने में मदद की।

अपनी जिम्मेदारी पर क्या बोले? : ट्रॉमा में मेंटेनेंस और इलेक्ट्रिक इश्यू के लिए कई बार लिखा है। हम एक स्टेप आगे रहते हैं। जब भी जरूरत हो, तो मुख्य प्रशासन को लिखकर देते हैं। पूरी फाइल है, मेरे पास लेटर्स की।

जिम्मेदार नंबर – 9

क्या जिम्मेदारी? एसएमएस अस्पताल में इलेक्ट्रिसिटी से जुड़ा काम इनके पास है। पुरानी वायरिंग को बदलने से लेकर सभी उपकरणों का रखरखाव करना।

क्या किया? पुरानी वायरिंग हटाने में सुस्ती दिखाई, शॉर्ट सर्किट की घटनाओं के बावजूद काम में कोई सुधार नहीं किया। उपकरणों के रखरखाव में भी कोताही।

अपनी जिम्मेदारी पर क्या बोले? : हमें जब भी लिखित में सुधार का प्रस्ताव आता है, तो उसे तत्काल कर देते हैं। सुधार में कोई परेशानी नहीं आती, लेकिन ये शॉर्ट सर्किट कैसे हुआ, ये जांच का विषय है।

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