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जयपुर का नरैना इलाका, 26 नवंबर 2021 की सुबह होने से पहले, 7 डकैत बुजुर्ग दंपती को बंधक बनाकर 1 करोड़ की डकैती को अंजाम देते हैं। बुजुर्ग महिला विरोध करती है तो उसकी निर्मम तरीके से हत्या कर दी जाती है। 12 दिन के भीतर पुलिस सभी 7 आरोपियों को पकड़ लाती

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सुरता देवी हत्याकांड का पुलिस ने जब खुलासा किया तो खूब वाहवाही हुई। लेकिन उसी पुलिस ने जिसे हत्याकांड का मास्टरमाइंड बताया, उससे न तो कोई बरामदगी कर सकी और न उसके खिलाफ कोई ठोस सबूत जुटा पाई। जांच में ऐसी कमियां छोड़ी कि सातों आरोपी 4 साल बाद कोर्ट से बरी हो गए हैं।

भास्कर ने कोर्ट के आदेश के बाद एक्सपर्ट के जरिए इस केस की पड़ताल की। पुलिस इन्वेस्टिगेशन में 6 कमियां सामने आई, जिनके चलते केस कोर्ट में नहीं टिक पाया और सुरता देवी के परिजनों को न्याय नहीं मिल सका। पढ़िए- संडे बिग स्टोरी में…

सबसे पहले पुलिस की वो डकैती की कहानी, जिसके आधार पर मामले का खुलासा करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया…

वारदात को लेकर पुलिस की थ्योरी

जयपुर के नरैना इलाके में 80 वर्षीय सुरता देवी की हत्या 26 नवंबर 2021 को हुई थी। जयपुर ग्रामीण पुलिस ने 8 दिसंबर 2021 को हत्याकांड का खुलासा किया। कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया।

दावा था कि इन आरोपियों ने घर में सो रहे पांचूराम व सुरता देवी को बंधक बनाकर मारपीट की। इससे पांचूराम बेहोश हो गए। लेकिन सुरता देवी ने विरोध जारी रखा तो उसकी हत्या कर दी।

डकैतों ने घर में रखे एक करोड़ रुपए कैश व जेवर लूट लिए। पुलिस ने पीड़ित पांचूराम के पड़ोसी गोपीराम को वारदात का मास्टरमाइंड बताया।

गोपीराम को पुलिस ने इस वारदात का मास्टरमाइंड बताते हुए गिरफ्तार किया था। पुलिस इस मामले में कोई सबूत नहीं जुटा पाई।

गोपीराम को पुलिस ने इस वारदात का मास्टरमाइंड बताते हुए गिरफ्तार किया था। पुलिस इस मामले में कोई सबूत नहीं जुटा पाई।

घर में केवल बुजुर्ग दंपती रहते थे। बेटे की कैंसर से मौत के बाद उसकी बहू व पोते-पोती उनसे अलग रहते थे। पांचूराम ब्याज पर रुपए देने का काम करता था। पड़ोसी गोपीराम ने पांचूराम से 50 हजार रुपए उधार ले रखे थे।

वह पीड़ित पांचूराम के बैंक के काम कराने में भी मदद करता था। इस कारण उसे पता था कि बुजुर्ग दंपती के घर पर लाखों रुपए कैश व जेवरात रखे हैं।

गोपीराम की नीयत बिगड़ी और उसने पांच महीने तक रेकी कर डकैती की साजिश रची। अन्य बदमाशों से संपर्क कर वारदात को अंजाम दिया।

इस पर गोपीराम खटीक, जोबनेर के बोराज निवासी ओमप्रकाश जाट, सीकर के दातारामगढ़ निवासी मदनलाल जाट, ज्ञानचंद उर्फ बच्चा जाट, मुकेश कुमार शर्मा और नरैना निवासी बाबूलाल जाट को हत्या व लूट के मामले में गिरफ्तार किया।

लूट के सामान की बरामदगी व पूछताछ के लिए 14 दिसंबर 2021 तक पांच दिन का पुलिस रिमांड लिया। वहीं एक अन्य आरोपी सुभाष जाट की तलाश में जुट गई।

अनुसूचित जाति की महिला की हत्या करने पर इस मामले की जांच दूदू सीओ अशोक चौहान को सौंपी गई।

हत्याकांड के 12 दिन बाद पुलिस ने गोपीराम (सबसे दाएं) सहित 6 मुख्य आरोपियों को पुलिस ने धर दबोचा।

हत्याकांड के 12 दिन बाद पुलिस ने गोपीराम (सबसे दाएं) सहित 6 मुख्य आरोपियों को पुलिस ने धर दबोचा।

वो 6 कमियां, जिनके कारण सुरता देवी के परिजनों को न्याय नहीं मिला

1. कट्टे व थैले की गुत्थी नहीं सुलझा पाई पुलिस

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी ओमप्रकाश के घर से 6.40 लाख रुपए, मृतका सुरता देवी की बैंक पासबुक और वोटर आईडी कार्ड बरामद किए। पुलिस ने इन्हें एक सफेद फूलदार रंग के कपड़े की थैली से निकालकर देना बताया।

मदनलाल के घर से 8.60 लाख रुपए व जेवरात नीले रंग के बैग से बरामद हुए। इसी तरह मुकेश के घर से 5.62 लाख रुपए व जेवरात भूरे रंग के बैग से मिले। इन दोनों बैग पर हाजी अब्दुल कुद्दूस दलाल, नूर मेडिकल मुंबई लिखा था।

एक और आरोपी ज्ञानचंद के पास से पुलिस ने 5 लाख रुपए व जेवरात जब्त किए। ये रुपए आरोपी ने काले रंग की थैली में से निकाल कर दिए।

जबकि पीड़ित ने नरैना थाने में दर्ज अपनी रिपोर्ट में कैश व जेवर कट्‌टे व थैले दोनों में रखा होना बताया था। जांच के दौरान परिवादी ने जेवर व नगदी सहित इन्हें ले जाने की जानकारी दी थी।

पुलिस ने कहां बरती लापरवाही? : पुलिस ने आरोपियों के घर से पैसे-जेवर बरामद तो किए लेकिन पीड़ित के घर से जो कैश से भरा कट्टा गायब हुआ, न तो पुलिस ने उसकी बरामदगी की न ही अपनी जांच रिपोर्ट में कट्‌टे व थैले के रंग, उनके साइज और प्रकार के बारे में बता सकी।

पुलिस का दावा था कि ये लूटे हुए रुपए व जेवरात हैं। लेकिन जांच अधिकारी ने पीड़ित पांचूराम से इनकी पहचान भी नहीं कराई।

तत्कालीन दूदू सीओ और जांच अधिकारी अशोक चौहान ने कोर्ट को बताया कि परिवादी के बयान पहले हो चुके थे। ऐसे में उन्होंने भी इस संबंध में पांचूराम के बयान व पूछताछ के लिए नोटिस नहीं दिया।

2. बरामदगी की कहानी कोर्ट में खारिज

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों से जांच के दौरान लूट के रुपए व जेवर अलग-अलग स्थानों से बरामद किए। ज्ञानचंद उर्फ बच्या की सूचना पर लूटे गए सामान को रामदेवरा में उसके दोस्त के पास से बरामद किया। वहीं, आरोपी ओमप्रकाश के घर से लूटे हुए रुपए बरामद हुए।

मुकेश कुमार शर्मा, मदनलाल जाट व ओमप्रकाश जाट की सूचना पर पुलिस ने लूटे हुए रुपए जम्मू-कश्मीर में किसी जानकार के घर से बरामद करना बताया। लेकिन कोर्ट पुलिस के इन तर्कों से सहमत नहीं हुआ।

पुलिस ने कहां बरती लापरवाही? : दरअसल, कोर्ट के समक्ष पुलिस ये साबित नहीं कर सकी कि जम्मू-कश्मीर से बरामद रुपए व जेवर मृतका के घर से ही लूटे गए हैं। क्योंकि पुलिस ने जांच के दौरान पीड़ित से इनकी पहचान नहीं कराई थी।

3. बरामद माल की बिना तस्दीक कराए चार्जशीट पेश की, तब तक पीड़ित की मौत

आरोपियों से बरामद जेवरात की पहचान नहीं कराने पर कोर्ट ने जांच अधिकारी पर सख्त टिप्पणी करते हुए इसे गंभीर लापरवाही माना।

कोर्ट ने जब केस डायरी मंगवाकर जांच की तो पता चला कि संबंधित एसडीएम को पहचान के लिए जनवरी 2022 में ही आदेश दिया गया था।

लेकिन इसके 9 महीने बीतने के बाद पीड़ित पांचूराम की मृत्यु होने तक पुलिस ने बरामद जेवरात की पहचान कराने को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की।

18 अप्रैल 2023 को पांचूराम का निधन हो गया। पुलिस ने पहचान की कार्रवाई पूरी किए बिना ही चार्जशीट कोर्ट में पेश कर दी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आरोपियों से बरामद रुपए व जेवर की पहचान बेहद जरूरी थी।

क्योंकि इसके बिना ये साबित ही नहीं होता कि ये जेवरात पांचूराम के घर से लूटे गए हैं।

कोर्ट ने अपने आदेश में जांच अधिकारी की गंभीर लापरवाही के बारे में टिप्पणी की।

कोर्ट ने अपने आदेश में जांच अधिकारी की गंभीर लापरवाही के बारे में टिप्पणी की।

4. आरोपियों की नहीं हुई पहचान परेड

पुलिस को आरोपियों की पहचान परेड पीड़ित पांचूराम से करानी चाहिए थी। क्योंकि पीड़ित ने अपनी रिपोर्ट में घर में घुसे व्यक्तियों पर उसे बांधने की बात कही थी।

रिटायर्ड अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक योगेन्द्र कुमार जोशी का कहना है कि पुलिस ने जल्दबाजी में मामले का खुलासा कर वाह-वाही लूटी। लेकिन आईओ ने अपना काम सही रूप से नहीं किया।

यही कारण है कि पुलिस आरोपियों के खिलाफ कोई ऐसा सबूत पेश नहीं कर पाई जो आरोपियों को लूट के माल या घटना से जोड़ता हो। पुलिस ने आरोपियों की बाइक और कार तो जब्त की।

लेकिन इससे आरोपियों का वारदात में शामिल होना साबित नहीं होता। इसी आधार पर जयपुर सेशन कोर्ट जज विद्यानंद शुक्ला ने 7 अगस्त 2025 को सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोष मुक्त करने के आदेश जारी किए।

हत्यारों के खिलाफ सुराग तलाशने के लिए एफएसएल व डॉग स्क्वॉयड टीम भी मौके पर पहुंची लेकिन पुलिस कोई अहम सुराग नहीं जुटा सकी।

हत्यारों के खिलाफ सुराग तलाशने के लिए एफएसएल व डॉग स्क्वॉयड टीम भी मौके पर पहुंची लेकिन पुलिस कोई अहम सुराग नहीं जुटा सकी।

5. हत्याकांड के फॉरेंसिंक सबूत तक नहीं जुटाए

पुलिस के अनुसार आरोपी कार व बाइक से घटनास्थल पर पहुंचे थे। लेकिन पुलिस आरोपी किसी वाहन के पहिए, उनके चप्पल या जूते के निशान लेकर कोर्ट में कोई सबूत पेश नहीं कर पाई।

जांच अधिकारी (तत्कालीन दूदू सीओ) अशोक चौहान ने कोर्ट में दिए अपने बयान में एफएसएल की रिपोर्ट में भी इस तरह के किसी सबूत के होने से इनकार किया।

आरोपी मदनलाल के हाथों की हथेलियों, अंगुलियों के निशान व पैरों के तलवों के निशान पांचूराम व उसकी पत्नी सुरता देवी के शरीर कपड़ों व घटनास्थल पर मौजूद होने के संबंध में कोई भी साक्ष्य एफएसएल व फिंगर प्रिंट ब्यूरो की रिपोर्ट में नहीं मिले।

मास्टरमाइंड गोपीराम व अन्य आरोपियों के मोबाइल फोन कॉल, डिटेल और लोकेशन सीडीआर के दस्तावेज भी कोर्ट में पेश नहीं हुए।

जबकि पुलिस का दावा था कि आरोपी गोपीराम पांच महीने से वारदात की योजना बनाकर रेकी कर रहा था। इस संबंध में वह अन्य बदमाशों के संपर्क में था। एक्सपर्ट के मुताबिक यह इन्वेस्टिगेशन में गंभीर चूक है।

आरोपी बाबूलाल और गोपीराम। इस केस में पुलिस ने आरोपियों की कॉल रिकॉर्डिंग का कोई डेटा कोर्ट में पेश नहीं किया।

आरोपी बाबूलाल और गोपीराम। इस केस में पुलिस ने आरोपियों की कॉल रिकॉर्डिंग का कोई डेटा कोर्ट में पेश नहीं किया।

6. मास्टरमाइंड से नहीं कर पाई कोई बरामदगी

जयपुर ग्रामीण के तत्कालीन एसपी मनीष अग्रवाल ने इस वारदात का मास्टरमाइंड गोपीराम खटीक को बताया। दावा था कि आरोपी ने पीड़ित पांचूराम से 50 हजार रुपए उधार ले रखे थे।

लेकिन पुलिस ने जांच के दौरान मनी लैंडिंग के संबंध में लाइसेंस, लेजर बुक या कोई रसीद जब्त कर कोर्ट में पेश नहीं की। मास्टरमाइंड से पुलिस लूट के जेवर व रुपए बरामद नहीं कर सकी।

इसी आधार पर कोर्ट से गोपीराम को जमानत भी मिली। वहीं अन्य आरोपियों से बरामदगी होने के कारण उन्हें जमानत नहीं दी गई। षड़यंत्र रचने के स्थान की तस्दीक करने की जानकारी को महत्वहीन माना। कोर्ट का कहना था कि इसकी जानकारी तो पहले से ही आईओ को होना स्पष्ट है।

एक्सपर्ट बोले- आईओ के खिलाफ हो विभागीय कार्रवाई

रिटायर्ड अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक योगेन्द्र कुमार जोशी ने कहा कि आईपीसी की धारा 166 में लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज होता है और कार्रवाई होती है। इस अधिकारियों को आईओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करनी चाहिए।

राजस्थान हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट एके जैन का कहना है कि गंभीर मामलों में पुलिस को फॉरेंसिक एविडेंस जुटाने चाहिए। जिससे आरोपी को सजा मिल सके।

हत्या व 1 करोड़ की डकैती का था मामला

जयपुर जिले के नरैना थाना इलाके में खटीकों का मोहल्ला आजाद चौक 26 नवंबर 2021 की अलसुबह करीब 3:35 एएम पर बुजुर्ग महिला की हत्या कर डकैती की वारदात हुई थी।

बदमाश घर में रखे एक करोड़ रुपए, 12 किलो चांदी और 25 तोला सोने के जेवर भी लूट कर ले गए। पहुंची मौके पर पहुंची तो मृतका के मुंह से खून निकल रहा था। पुलिस को अंदेशा था कि उसकी गला घोंटकर हत्या की गई है।

मृतका के पति पांचूराम ने इस संबंध में केस दर्ज कराया। जिसमें उसने बताया कि तीन लोग घर में दाखिल हुए थे। दो व्यक्तियों ने उसके हाथ-पैर बांधे थे। एक व्यक्ति चौक में खड़ा था।

पुलिस ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया। वहीं एक अन्य आरोपी को नामजद किया। आरोपी ओमप्रकाश, ज्ञानचंद, मदनलाल और गोपीराम के खिलाफ इस मामले से पहले भी आपराधिक केस दर्ज थे।

मामले की जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए गठित टीम में तत्कालीन नरैना पुलिस थाने के इंचार्ज हनुमान सहाय, फागी पुलिस थाने के इंचार्ज रमेश सिंह तंवर, रेनवाल पुलिस थाने के हितेश शर्मा और फुलेरा इंचार्ज रघुवीर सिंह भी शामिल थे।



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