राजस्थान की पंचायतीराज संस्थाओं और शहरी निकायों में ओबीसी के वार्डों को इस बार नए सिरे से तय किया जाएगा। किस निकाय में कितने वार्ड ओबीसी के लिए आरक्षित होंगे, इस पर ओबीसी आयोग सरकार को रिपोर्ट देगा। इस रिपोर्ट को तैयार करने में तीन महीने लगेंगे। ओबीस
ओबीसी के वार्ड तय किए बिना चुनाव नहीं हो सकते। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार ओबीसी के वार्डों को नए सिरे से तय करना अनिवार्य है। निकाय और पंचायतीराज संस्थाओं में ओबीसी का राजनीतिक प्रतिनिधित्व तय करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना में राज्य ओबीसी आयोग बनाया है।
आयोग के सचिव ने चिट्ठी में तर्क दिया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक आयोग को राज्य के भीतर स्थानीय निकायों में सभी स्तरों पर ओबीसी के पिछड़ेपन की प्रकृति और उसके निहितार्थों की गहन जांच और अध्ययन करके रिपोर्ट देनी है। हर पंचायतीराज संस्था, शहरी निकाय में कितने वार्ड ओबीसी के लिए आरक्षित होंगे, इस पर तय समय सीमा में रिपोर्ट देनी है।
चिट्ठी के मुताबिक आयोग ने काम शुरू कर दिया है। ओबीसी के परिवारों का सर्वे करवाया जा रहा है। संस्थाओं, राजनीतिक दलों और रिसर्च स्कॉलर्स से चर्चा कर ओबीसी के आंकड़े इकट्ठे किए जा रहे हैं। निकायों और पंचायतीराज संस्थाओं में हर यूनिट के लिए ओबीसी आरक्षण पर रिपोर्ट में तीन महीने का समय लगेगा।

ओबीसी आयोग ने राज्य निर्वाचन आयोग को चिट्ठी लिखकर रिपोर्ट में तीन महीने का समय लगने की सूचना दी है।
ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के बाद ही चुनाव हो सकते हैं, 22 नवंबर तक रिपोर्ट देगा ओबीसी आयोग
ओबीसी आयोग की इस चिठ्ठी के मायने निकाले जा रहे हैं। ओबीसी आयोग ने तीन महीने में ओबीसी वार्ड तय करने पर रिपोर्ट देने का वक्त लिया है, इसका मतलब है कि अगले तीन महीने तक चुनाव नहीं हो सकते। ऐसे में राज्य निर्वाचन आयोग ने भले ही गाइडलाइन जारी कर दी है लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना तमें ओबीसी के वार्डो की संख्या तय करके जब तक रिपोर्ट नहीं मिल जाती तब तक चुनाव नहीं करवाए जा सकते। ओबीसी आयोग 22 नवंबर के आसपास रिपोर्ट देगा। ऐसे में चुनाव दिसंबर के आसपास ही हो सकते हैं।
ओबीसी आयोग का गठन मई में किया था और उसे तीन महीने में रिपोर्ट देनी थी। सरकार ने इसके बाद एक दिन पहले ही ओबीसी आयोग का कार्यकाल तीन महीने और बढ़ाया है।
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