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संघ मानता है कि मानव जीवन पंचतत्वों (पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश) पर आधारित है, और इनका संतुलन बिगडऩे से ही आज की पर्यावरणीय चुनौतियां खड़ी हुई हैं। परिवार में हिन्दू जीवन-शैली, संस्कार और कर्तव्यों का पोषण कर वसुधैव कुटुम्बकम की भावना को जीवित रखना।
यह उद्बोधन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत विजयादशमी उत्सव को लेकर रविवार को शहर की 11 बस्तियों में शस्त्र पूजन कार्यक्रम में दिया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों, गणमान्य नागरिकों एवं कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। विभाग संघचालक मा. सुरेशचंद्र माथुर ने बताया कि शेखावत नगर, अम्बेडकर नगर, सोसायटी नगर, आनंद नगर, महालक्ष्मी नगर, इंदिरा कॉलोनी, केशव नगर, सरस्वती नगर, घरवाला जाव, सोमनाथ, मोची कॉलोनी बस्ती में विजयादशमी उत्सव का आयोजन हुआ। जहां कार्यक्रम का शुभारंभ भगवा ध्वज प्रणाम एवं शस्त्र पूजन के साथ हुआ। स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में उपस्थित हुए। इसके बाद पथ संचलन का निकाला गया, जिसमें सैकड़ों स्वयंसेवकों ने अनुशासनबद्ध पंक्तियों में बस्ती के प्रमुख मार्गों से संचलन करते हुए राष्ट्रभक्ति और एकता का परिचय दिया। नगरवासियों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा और रंगोलियां बनाकर संचलन का स्वागत किया।
राष्ट्रभक्ति दैनिक आचरण में झलकनी चाहिए : वक्ताओं ने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ क्यों शुरू हुआ ? इतनी सारी बाधाएं वगैरह आईं। स्वयंसेवकों ने सारी कठिन परिस्थितियों में से रास्ता निकालकर इसको चलते क्यों रखा और 100 साल चलने के बाद भी नए क्षितिजों की बात क्यों कर रहा है। पंच परिवर्तन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी संकल्प और हर गांव-हर घर तक गुणवत्तापूर्ण जीवन का लक्ष्य है। इसमें सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी आचरण, नागरिक कर्तव्य.. इन पांचों पहलुओं के संतुलित विकास से ही राष्ट्र की प्रगति और समाज का पुनर्निर्माण संभव है। बस्तियों में विजयादशमी उत्सव के दौरान संतों के आशीर्वचन अध्यक्ष एवं मुख्य वक्ता के उद्बोधन हुए।
संतों ने अपने आशीर्वचन में बताया कि हिंदू समाज को सक्रिय, जागरूक और शक्ति संपन्न बनाने के लिए, अपने देश के मनीषियों ने समाज जीवन के विशेष प्रसंगों पर अनेकानेक उत्सवों का सृजन किया। हिन्दू समाज के इन उत्सव में से कुछ सामाजिक समरसता के लिए हैं और कुछ शुद्ध स्वाभिमान को जागृत करने के लिए है। विजयादशमी शक्ति उपासना का उत्सव है। विजयादशमी असुरी शक्ति के ऊपर सात्विक और दैवीय शक्ति की विजय का प्रतीक है। इसी दिन भगवान राम ने रावण का वध किया और इस पृथ्वी को राक्षसों से विहीन किया। अधर्म पर धर्म की जय हुई, असत्य पर सत्य की विजय हुई। मां दुर्गा ने नौ रात्रि और दसवें दिन महिषासुर का वध किया।
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