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पुष्कर मेले में ऊंटों की खरीद-फरोख्त के लिए आने वाले ऊंट पालकों के लिए यह खुश खबर है। ऊंटों को अन्य प्रदेशों में भेजने पर लगा प्रतिबंध राज्य सरकार ने 11 साल के इंतजार के बाद आखिर हटा दिया है। सरकार के इस फैसले का 20 दिन बाद 22 अक्टूबर से शुरू हो रहे

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हाल ही राज्य सरकार ने ऊंट निर्यात से प्रतिबंध हटाने की अधिसूचना भी जारी की है। हालांकि सरकार ने नियमों में संशोधन करते हुए ऊंटों के बाहरी प्रदेशों में परिवहन के लिए कुछ नई शर्तें जोड़ी है। लेकिन इन शर्तों का पुष्कर मेले में ऊंटों की खरीद-फरोख्त पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।

मेले में बाहरी प्रदेशों से आने वाले व्यापारी ऊंट पालकों से बिना किसी रोक-टोक के ऊंट खरीद सकेंगे लेकिन उन्हें परिवहन से पहले पशु मेला अधिकारी से परमिट लेना होगा। पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. सुनील घिया ने कहा कि सर्कुलर अभी मिला नहीं है। राज्य सरकार की गाइड लाइन के अनुसार पालना कराई जाएगी।

मेले में साल दर साल घटती गई ऊंटों की संख्या 11 साल पहले भाजपा की वसुंधरा सरकार ने ऊंटों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया था। इसका असर यह हुआ कि पुष्कर मेले में बाहरी प्रदेशों से ऊंटों के व्यापारी आने बंद हो गए। इस कारण ऊंटों की बिक्री घटने लगी और साल दर साल ऊंटों की आवक भी घटती गई। आलम यह रहा कि 11 साल पहले मेले में जहां 10 हजार से अधिक ऊंट आते थे, उनकी संख्या सिमट तक 3 हजार तक पहुंच गई।

बढ़ता रहा घोड़ों का कारोबार मेले में जहां ऊंटों की आवक घटी, वहीं अश्व (घोड़े-घोड़ी)की आमद बढ़ने लगी। बड़ी संख्या में न केवल राजस्थान बल्कि हरियाणा, पंजाब, गुजरात सहित कई राज्यों से अश्व व्यापारी भी मेले में अच्छी नस्ल व कीमती अश्वों की खरीद-फरोख्त करने आने लगे। पिछले साल मेले में 3202 ऊंट आए, जबकि 5016 घोड़े-घोड़ी आए।

पुष्कर मेले से ठीक पहले निर्णय अहम राजस्थान सरकार ने 2015 में पारित राजस्थान ऊंट (वध निषेध एवं अस्थायी प्रवास या निर्यात विनियमन) अधिनियम के तहत ऊंटों के वध, व्यापार और राज्य से बाहर भेजने (या अस्थायी प्रवास) पर प्रतिबंध लगाया था। इसका उद्देश्य ऊंटों की घटती संख्या को बचाना था, लेकिन इससे ऊंट पालकों की आजीविका प्रभावित हुई और ऊंटों की संख्या में और कमी आई। हाल ही 1 अक्टूबर 2025 को राज्य सरकार ने इस प्रतिबंध को हटा दिया। अब ऊंटों का अंतरराज्यीय परिवहन और निर्यात (वध के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए) संभव हो गया है। यह फैसला पुष्कर मेले से पहले लिया गया, जो ऊंट व्यापार के लिए अहम माना जा रहा है।



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