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दिल्ली-मुंबई, बेंगलुरु-चेन्नई जैसे महानगरों को पछाड़कर जयपुर पहली बार देश का दूसरा सबसे सुरक्षित शहर चुना गया है। जयपुर को यह खिताब दुनियाभर में शहरों पर सर्वे करने वाली प्रचलित वेबसाइट न्यूमबेओ ने ‘सेफ्टी इंडेक्स रिपोर्ट 2025’ में दिया है। इसके पीछे

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वाहन चोरी की वारदातों में भी 30 फीसदी की कमी आई है। पहली बार इस मिले अचीवमेंट के बाद भास्कर ने जयपुर पुलिस कमिश्नर बीजू जॉर्ज जोसफ से बात की। यह जाना कि कैसे- क्राइम कंट्रोल किया, जिससे शहर रैंकिंग में दूसरे नंबर पर पहुंचा।

न्यूमबेओ की रिपोर्ट में जयपुर के ट्रैफिक और महिला अत्याचार के मामलों को लेकर भी जानकारी है।

न्यूमबेओ की रिपोर्ट में जयपुर के ट्रैफिक और महिला अत्याचार के मामलों को लेकर भी जानकारी है।

न्यूमबेओ सेफ्टी इंडेक्स क्या है?

न्यूमबेओ एक स्वतंत्र ग्लोबल डाटा प्लेटफॉर्म है, जो किसी देश या शहर में रहने वाले लोगों से सीधे सेफ्टी, अपराध दर, सामाजिक स्थिरता और पुलिस पर भरोसा जैसे मापदंडों पर जानकारी एकत्र करता है। यह सरकारी आंकड़ों पर आधारित नहीं होता, बल्कि आम नागरिकों की राय और अनुभवों को केंद्र में रखकर तैयार किया जाता है।

इस इंडेक्स में मूल्यांकन किए गए प्रमुख मापदंड:

  • सार्वजनिक सुरक्षा की स्थिति
  • रात में अकेले बाहर निकलने में डर
  • चोरी, डकैती और अन्य अपराधों की आशंका
  • पुलिस की तत्परता और लोगों का भरोसा
  • सामाजिक और राजनीतिक स्थिरता

अहमदाबाद टॉप और जयपुर दूसरे नंबर पर

न्यूमबेओ की सेफ्टी इंडेक्स रिपोर्ट-2025 के अनुसार जयपुर ने पहली बार 65.2 के उच्च सुरक्षा स्कोर के साथ देश के दूसरे सबसे सुरक्षित शहर का खिताब हासिल किया है। इस रिपोर्ट में गुजरात का अहमदाबाद देश का सबसे सुरक्षित शहर बताया है। देश के टॉप-10 शहरों में पुणे, हैदराबाद, मुंबई और कोलकाता जैसे बड़े महानगर भी शामिल हैं। वहीं दुनिया का सबसे सुरक्षित शहर अबूधाबी है।

अब हम आपको शहर में क्राइम कंट्रोल के बारे में जयपुर पुलिस के प्रयासों के बारे में बताते हैं। जिनके आधार पर जयपुर में पिछले साल की तुलना में क्राइम रेट में 14 फीसदी की कमी आई।

1. जयपुर में 14 फीसदी कम हुए अपराध

जयपुर पुलिस कमिश्नर बीजू जॉर्ज जोसफ ने इस पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि ये शहर के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। जयपुर कमिश्नरेट में पिछले दो वर्ष की तुलना में गंभीर व अन्य अपराध कम हुए हैं। कमिश्नर जोसफ ने बताया कि जयपुर में 2023 में कुल 14 हजार 839 केस दर्ज हुए थे।

वहीं 2024 में मामलों की संख्या 14 हजार 869 हो गई। वहीं इस वर्ष जयपुर कमिश्नरेट में जून महीने तक 12 हजार 838 केस ही दर्ज हुए हैं। पिछले वर्ष की तुलना में इस साल 14 फीसदी अपराध कम हुए हैं। हत्या, डकैती,अपहरण, दुष्कर्म जैसे गंभीर मामलों में भी कमी आई है।

2. गश्त व पेट्रोलिंग से 30 फीसदी घटी वाहन चोरी की वारदातें

कमिश्नर ने बताया कि रात्रि गश्त व नियमित पेट्रोलिंग की जा रही है। देर रात तक शहर में चलने वाले कैफे व बार पर भी सख्त कार्रवाई की गई। इसी का नतीजा है कि क्राइम रेट में कमी आई है। शहर में पुलिस नाकाबंदी का असर दिखाई दे रहा है। जिसके कारण वाहन चोरी की घटनाओं में भी 30 फीसदी की कमी आई है।

3. सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में शहर

शहर की सुरक्षा को मजबूत बनाने में पुलिस और जनता की बड़ी भूमिका रही है। अब जयपुर शहर के लगभग हर मार्ग पर सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि पुलिस के प्रोत्साहित करने पर अधिकांश कैमरे आम जनता ने लगवाए हैं। वहीं कुछ स्थानीय लोगों ने सुरक्षा के लिहाज से स्वेच्छा से सीसीटीवी कैमरे लगाना शुरू किया है। पुलिस को क्राइम की निगरानी और कार्रवाई में इन कैमरों की मदद मिलती है।

जयपुर की 1000 के करीब हाई डेफिनेशन कैमरा केवल सड़कों के चौराहों पर लगाए गए हैं।

जयपुर की 1000 के करीब हाई डेफिनेशन कैमरा केवल सड़कों के चौराहों पर लगाए गए हैं।

4. हाइटेक इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर

जयपुर पुलिस के पास हाइटेक इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर है। यहां तैनात पुलिसकर्मी शहर की सुरक्षा संभालते हैं। अभय कमांड सेंटर से पूरे शहर की लाइव मॉनिटरिंग की जाती है। यही वजह है कि शहर में कई बड़े कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किए गए।

बीट कॉन्स्टेबल के साथ ही अभय कमांड सेंटर से निगरानी रखी जा रही है। इससे पीसीआर रिस्पॉन्स और नाइट गश्त को बनाया बेहतर बनाया गया है। जयपुर कमिश्नरेट में चल रहे अभय कमांड कंट्रोल सेंटर को अलग-अलग यूनिट में बांटा गया है।

पुलिस के पास आने वाली हर सूचना या शिकायत पर तुरंत एक्शन लिया जाता है। अभय कमांड सेंटर के कैमरों के अलावा शहर में जेडीए और नगर निगम के लगाए कैमरों की फीड भी कंट्रोल रूम को मिलती है। जिससे रियल टाइम मॉनिटरिंग हो रही है।

शहर में लगे ज्यादातर सीसीटीवी अभय कमांड सेंटर से कनेक्ट हैं।

शहर में लगे ज्यादातर सीसीटीवी अभय कमांड सेंटर से कनेक्ट हैं।

5. जनता और पुलिस के बीच बेहतर संवाद

जयपुर पुलिस कमिश्नर बीजू जॉर्ज जोसफ पिछले दो साल से कमिश्नरेट के पुलिस थानों पर जनसुनवाई कर रहे हैं। कमिश्नर महीने में एक बार किसी एक पुलिस थाने पर सुनवाई करते हैं। उनका मानना है कि इससे पुलिस और जनता के बीच बेहतर संवाद से सुरक्षा में सुधार हुआ है। पुलिस थाना स्तर पर जिन समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता। उन समस्याओं को अधिकारियों ने स्थानीय स्तर पर सुलझाया। आमजन में पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ा है।

ट्रैफिक प्रबंधन में पिछड़ा जयपुर, कम नंबर मिले

जयपुर पुलिस कमिश्नर का कहना है- शहर के ट्रैफिक प्रबंधन को बेहतर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। शहर के प्रमुख मार्गों पर सीसीटीवी कैमरों की मदद से चालान किए जाते हैं। इससे सड़क हादसों में भी कमी आई है और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। इसके बावजूद अभी भी शहर की ट्रैफिक व्यवस्था के प्रबंधन में काफी काम करने की जरूरत है।

शहर की ट्रैफिक व्यवस्था अच्छी नहीं होने के कारण जयपुर अन्य शहरों की तुलना में पिछड़ गया। लचर ट्रैफिक व्यवस्था के कारण जयपुर को इस कैटेगरी में कम नंबर मिले। ट्रैफिक इंडेक्स में जयपुर को 42.1 का ही स्कोर मिला। ये देश के कोलकाता, दिल्ली, चेन्नई, पुणे, नोएडा और हैदराबाद शहरों से बेहद कम रहा।

शहर में ट्रैफिक के हालात परेशानी में डाल देते हैं। नंबियो की सर्वे रिपोर्ट में इसमें थोड़े कंम अंक मिले हैं।

शहर में ट्रैफिक के हालात परेशानी में डाल देते हैं। नंबियो की सर्वे रिपोर्ट में इसमें थोड़े कंम अंक मिले हैं।

महिला अत्याचार के मामलों में बढ़ोतरी

अनुसूचित जाति और जनजाति की महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में 5 से 24 प्रतिशत की कमी आई है। लेकिन ओवर ऑल महिला अत्याचार के मामलों में मामूली बढ़ोतरी हुई है। इस वर्ष दुष्कर्म के बाद हत्या के 2 केस दर्ज हुए। जबकि पिछले दो साल में एक भी केस दर्ज नहीं हुआ था। अपहरण व महिला अत्याचार के केस बढ़े हैं। नाबालिग से दुष्कर्म के मामलों में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। इस कारण भी जयपुर को सेफ्टी इंडेक्स में अपेक्षा की तुलना में नंबर कम मिले।

पुलिस कमिश्नर जोसफ का कहना है कि उन्होंने नाइट राउंड्स (रात्रि पुलिस गश्त) और पीसीआर रिस्पॉन्स को बेहतर बनाया है। महिलाओं को तुरंत पुलिस सहायता मुहैया कराई जा रही है। महिला पुलिसकर्मियों की संख्या भी बढ़ाई गई है।

प्रो एक्टिव कार्रवाई पर अधिक ध्यान

कमिश्नर के निर्देश पर जयपुर पुलिस ने प्रो एक्टिव पुलिसिंग पर अधिक ध्यान दिया। सदर एसीपी धर्मवीर सिंह ने बताया कि प्रो एक्टिव पुलिसिंग के कारण अपराधों के ग्राफ में भी कमी आती है। आबकारी एक्ट व एनडीपीएस और आर्म्स एक्ट के तहत पिछले साल की तुलना में अधिक कार्रवाई की गई। यही कारण है कि उनके सर्किल में भी अपराध पिछले साल की तुलना में कम हुए हैं।

शहर के प्रमुख स्थलों पर जयपुर पुलिस प्रो-एक्टिव होकर काम कर रही है।

शहर के प्रमुख स्थलों पर जयपुर पुलिस प्रो-एक्टिव होकर काम कर रही है।

पहली बार सुरक्षित शहरों की सूची में मिली जगह

जयपुर को पहली बार देश का दूसरा सुरक्षित शहर चुना गया है। विश्व में जयपुर को 96 रैंक मिली है। पिछले साल 2024 की सेफ्टी इंडेक्स रिपोर्ट में जयपुर शामिल नहीं था। जयपुर को 178 शहरों की रेटिंग में कोई स्थान नहीं मिला। जबकि 2024 की मिड रिपोर्ट में भी अहमदाबाद 67.9 स्कोर के साथ पहले स्थान पर रहा था। आपको बता दें कि नंबियो वेबसाइट लोगों से मिले डाटा और फीडबैक के आधार पर हर वर्ष ये रिपोर्ट जारी करती है। वेबसाइट विभिन्न देशों के शहरों का तुलनात्मक विश्लेषण कर उनको रेटिंग देती है।

एशियाई रैंकिंग में पिछड़े भारत के शहर

भारत के सबसे सुरक्षित चुने गए शहर एशियाई देशों के शहरों की रैंकिंग में पिछड़ गए। अहमदाबाद और जयपुर अन्य एशियाई देशों के शहरों से काफी पीछे है। देश का सबसे सुरक्षित शहर चुना गया अहमदाबाद इस सूची में 29वें स्थान पर है। जयपुर, हैदराबाद, मुंबई और कोलकाता जैसे शहर इस लिस्ट में काफी पीछे हैं। विश्व में जयपुर को सेफ्टी इंडेक्स में 96 रैंक मिली है।



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