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जेल… ये नाम सज़ा और सजा पाने वालों के लिए कुख्यात है, लेकिन जिन कैदियों ने नज़रिया बदला तो उनके लिए कारागार अब एक सुधारगृह की भूमिका में है। सेवर जेल में बंद रहे कुछ सजायाफ्ता बंदियों ने न सिर्फ अपने अपराध पर पश्चाताप किया, बल्कि खुद को काबिल बना क
फलस्वरूप रिहाई में विशेष छूट मिली और अब समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर घर-परिवार की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ये लोग अन्य कैदियों के लिए प्रेरणा स्रोत बने हैं। फलस्वरूप सेवर जेल में 34 कैदी आईटीआई, 78 इग्नू से पढ़ रहे हैं। अनुशासित रहने पर 79 कैदियों को ओपन जेल में रखा गया है। जेल में करीब 770 कैदी हैं।
यह कहानी है उन बंदियों की जो आत्मनिर्भर बने… अब शोरूम और कंपनी में कर रहे काम
1. नरेश कुमार: प्लंबर से टूल एंड ट्रेवल्स के मालिक का सफर
हिण्डौन सिटी निवासी नरेश कुमार को वर्ष 2022 में 20 साल की सजा हुई। इस दौरान उन्होंने आईटीआई से प्लंबर का कोर्स किया। कालीन बुनाई में भी दक्षता हासिल की। जेल में अनुशासित रहते हुए 10 दिन की विशेष छूट अर्जित की। रिहाई के बाद उन्होंने “टूल एंड ट्रेवल्स” नाम से कंपनी शुरू की, जो अब अच्छी आमदनी दे रही है।
2. मनीष कुमार: जयपुर की टेक्सटाइल में नौकरी
करौली के टोडाभीम निवासी मनीष कुमार को वर्ष 2022 में 20 वर्ष की सजा हुई। उन्होंने प्लंबर ट्रेड में कोर्स किया। 2024 में सजा स्थगित होने पर बाहर आए और जयपुर की एक टेक्सटाइल कंपनी में नौकरी कर रहे हैं।
3. दिलीप सिंह: आजीवन कारावास से रिनॉल्ट शोरूम तक
भरतपुर के नगला धरसौनी निवासी दिलीप सिंह को हत्या के मामले में आजीवन कारावास हुआ। उन्होंने प्लंबर और इलेक्ट्रिशियन में कोर्स किया। “खुला बंदी शिविर” में स्थानांतरण पाया। अब वे रिनॉल्ट कार शोरूम में कार्यरत हैं।
4. प्रवीण: इग्नू से बीए किया और पेट्रोल पंप पर नौकरी
भरतपुर निवासी प्रवीण को हत्या के गंभीर मामले में उम्रकैद हुई। उन्होंने इग्नू से स्नातक किया और वर्तमान में “आशाएं द फ्यूलिंग स्टेशन” पर कार्य कर रहे हैं। अब वे समाज की मुख्यधारा में आकर परिवार की जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं।
5. विनोद निराला: डिज़ाइनर बनने तक का सफर
भरतपुर के ब्रजनगर निवासी विनोद कुमार को दहेज हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा हुई। जयपुर जेल से कारपेंटर और स्वींग टेक्नोलॉजी का कोर्स करने के बाद भरतपुर जेल में प्लंबर और इलेक्ट्रिशियन ट्रेड में प्रशिक्षण लिया। रिहाई के बाद बैंगलुरु की शूज कंपनी में डिज़ाइनर के रूप में कार्यरत हैं।
“कैदियों में सुधार के लिए प्रशासन लगातार प्रयासरत है। कई कैदी प्रोफेशनल कोर्स कर रहे हैं। कुछ इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय से अध्ययनरत हैं। जेल प्रशासन उन्हें सीखने और पढ़ने के संसाधन मुहैया कराता है। 34 कैदी आईटीआई, 78 इग्नू से पढ़ रहे हैं।”
-परमजीत सिंह, सेवर जेल अधीक्षक
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