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जोधपुर महानगर के अपर सेशन न्यायाधीश ललित पुरोहित ने राजीव गांधी नगर गोलासनी इलाके में हुई बुजुर्ग बंशीलाल माली की हत्या के मामले में आरोपी पोते सोहनलाल (27) को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि “अभियुक्त द्वारा अपने सगे दा
मामला गत 26 जुलाई 2020 का है, जब सुबह 8-8:30 बजे 75 वर्षीय बंशीलाल अपने 10 साल के पोते चेतन प्रकाश पुत्र मनोहरलाल के साथ चिड़ियों को चुगा डालने के लिए भाकर (पहाड़ी) गए थे। चुग्गा डालकर वापस लौटते समय भोमियाजी मंदिर के पास सोहनलाल पुत्र जयसिंह मिला और उसने अपने ही दादा पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया।
मामले में परिवादी मनोहरलाल (मृतक के पुत्र) ने राजीव गांधी नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार सोहनलाल ने कुल्हाड़ी से बंशीलाल के हाथों, पैरों और सिर पर गंभीर वार किए। साथ ही चेतन प्रकाश को भी धक्का देकर गिरा दिया, जिससे उसके शरीर पर भी चोटें आईं।
मासूम पोते की चश्मदीद गवाही रही निर्णायक
मामले में कोर्ट के समक्ष एकमात्र चश्मदीद गवाह चेतन प्रकाश था, जो घटना के समय अपने दादा के साथ मौजूद था। उसने कोर्ट में बताया कि सोहनलाल ने उल्टी कुल्हाड़ी से दादाजी के सिर पर वार किया और उनके पेट व पीठ पर लातें मारीं। उसे भी धक्का देकर गिरा दिया था।
चेतन की गवाही की पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट से भी हुई। डॉ. संतोष कुमार द्वारा किए गए चेतन की मेडिकल जांच में उसके बाएं हाथ की भुजा पर, बाएं घुटने पर और दाएं घुटने पर खरोंचें मिली थीं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुला हत्या का सच
डॉ. अशोक सिंह द्वारा तैयार पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मृतक के शरीर पर कुल 8 स्थानों पर गंभीर चोटें थीं। सिर के दाहिने भाग पर 6 सेमी लंबा घाव था, जिस पर टांके लगे हुए थे। छाती और पेट के आगे के हिस्से पर अनेक नीले निशान थे। दाएं पैर पर भी 3 सेमी का घाव था।
पोस्टमार्टम के दौरान पाया गया कि मृतक की दोनों तरफ की कई पसलियों में फ्रैक्चर था और पेट के भीतरी हिस्से में लगभग 2.5 लीटर खून भरा हुआ था। लीवर और स्प्लीन भी कई जगह से फटे हुए थे। डॉक्टर ने बताया कि ये सभी चोटें मौत का कारण बनीं थी।
इसी तरह, पुलिस अनुसंधान अधिकारी इंस्पेक्टर जयकिशन की गवाही के अनुसार आरोपी सोहनलाल की इत्तला पर उसके घर से हत्या में इस्तेमाल कुल्हाड़ी बरामद की गई थी। हालांकि, एफएसएल रिपोर्ट में कुल्हाड़ी पर इंसानी खून नहीं पाया गया था, लेकिन अन्य सबूतों पर इंसानी खून मिला था।
बचाव पक्ष के तर्क खारिज
सोहनलाल के वकील कमलेश कच्छवाह और संतोष कुमार ने दलील दी कि चेतन प्रकाश लाभार्थी गवाह है और उसकी गवाही पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि अगर अभियुक्त का इरादा हत्या का होता तो वह सीधी कुल्हाड़ी से वार करता, उल्टी कुल्हाड़ी से नहीं।
कोर्ट ने इन सभी तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि बाल साक्षी की गवाही भी अन्य गवाहों की तरह महत्वपूर्ण होती है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले मध्यप्रदेश राज्य बनाम बलवीरसिंह का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि बाल साक्षी की गवाही को अन्य गवाहों के समान ही माना जाता है।
न्यायालय का फैसला: आजीवन कारावास
न्यायाधीश ललित पुरोहित ने सोहनलाल को रास्ता रोकने, जानबूझकर चोट पहुंचाना और हत्या की धाराओं में तहत दोषी करार दिया। सजा में उसे हत्या के आरोप के तहत आजीवन कारावास और 25,000 रुपये जुर्माना, जानबूझकर चोट पहुंचाने के आरोप के तहत 1 वर्ष का साधारण कारावास और 1,000 रुपये जुर्माना और रास्ता रोककर बाधा डालने के आरोप के तहत 1 माह का साधारण कारावास और 500 रुपये जुर्माना दिया गया। ये सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
इसके साथ ही कोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जोधपुर महानगर को परिवादी पक्ष को प्रतिकर राशि दिलाने की सिफारिश की है।
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