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राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में 13 वर्षीय बच्चे की कस्टडी उसकी मां सुमैरा खान (बदला नाम) से छीनकर दादा रहीम खान को दे दी है। जस्टिस मनोज कुमार गर्ग और जस्टिस रवि चिरानिया की खंडपीठ ने 12 सितंबर को अपने फैसले में मां को मुस्लिम पर्सनल लॉ
मामला 30 जून को दादा रहीम खान द्वारा दायर हैबियस कॉर्पस की याचिका से शुरू हुआ था। सोजती गेट क्षेत्र निवासी 64 वर्षीय रहीम खान का कहना था कि 30 मई 2025 को शाम 7 बजे उनकी बहू सुमैरा खान ने बच्चे का अपहरण किया था। बच्चा 2018 से 2025 तक दादा के साथ रह रहा था और जोधपुर की नामी स्कूल से अच्छी शिक्षा प्राप्त कर रहा था।
दूसरी शादी को भाई ने ही अवैध बता की शिकायत
कोर्ट ने अपने फैसले में पाया कि सुमैरा खान ने 2018 में बिना तलाक लिए मुंबई में मोहम्मद उजैर अंसारी से दूसरी शादी की थी। यह शादी 21 मई 2018 को मुंबई में हुई थी, जिसका पंजीयन 5 जून 2018 को हुआ था। दिलचस्प बात यह है कि इस अवैध शादी का विरोध खुद सुमैरा खान के अपने भाई साबिर खान ने भी किया था। साबिर खान ने 22 मई 2018 को मुंबई के मैरिज रजिस्ट्रार को लिखित शिकायत भेजकर कहा था कि उसकी बहन पहले से विवाहित है और उसका 6 साल का बेटा भी है। बिना तलाक लिए उसकी यह दूसरी शादी अवैध बताई गई।
मां ने माना- उसकी दूसरी शादी गैर कानूनी
पूरे मामले में चौंकाने वाली बात यह भी है कि सुमैरा खान ने खुद 25 मई 2018 को जोगेश्वरी वेस्ट, मुंबई के पुलिस अधिकारियों को हस्तलिखित पत्र देकर अपनी गलती मानी थी। इसमें उसने लिखा था कि “मेरी पहली शादी 12 साल पहले सलमान खान से जोधपुर में हुई है… क्योंकि सलमान खान को बिना बताए मैंने उजैर अंसारी से शादी की है, जो कि मुस्लिम लॉ के तहत गैर कानूनी है… अब मुझे इस गलती का पश्चाताप है”।
इसके साथ ही उसने मोहम्मद उजैर अंसारी से भी सभी रिश्ते खत्म करने की भी बात कही थी। हालांकि, इसके बावजूद वह उसके साथ रहती रही और 2020 में उससे एक बच्चा भी हुआ।
कोर्ट ने सुमैरा खान को ठहराया अयोग्य
हाईकोर्ट ने मुस्लिम पर्सनल लॉ की धारा 354(4) का हवाला देते हुए कहा कि सुमैरा खान ने अपने बच्चे की गंभीर उपेक्षा की है। कोर्ट के अनुसार, “मां ने बिना किसी वैध कारण के 2018 में 6 साल के बच्चे को छोड़ दिया और 2025 तक उसकी देखभाल में कोई रुचि नहीं दिखाई।” न्यायालय ने यह भी पाया कि महिला ने दूसरी शादी एक अजनबी से की जो मुस्लिम लॉ के अनुसार उसे कस्टडी के लिए अयोग्य बनाता है।
कोर्ट ने सुमैरा खान द्वारा प्रस्तुत 3 दिसंबर 2022 के ‘खुलानामा’ (तलाक पत्र) की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठाए। न्यायालय ने कहा कि यह दस्तावेज संदिग्ध लगता है क्योंकि इसमें कोई गवाह नहीं है और न ही यह पंजीकृत या नोटराइज्ड है।
दादा को मिली पूरी कस्टडी, मां को सीमित मुलाकात की इजाजत: कोर्ट ने रहीम खान को बच्चे की पूरी कस्टडी देते हुए ये शर्तें रखी हैं:
- दादा बच्चे की शिक्षा और स्वास्थ्य की पूरी जिम्मेदारी उठाएंगे और 18 साल की उम्र तक उसका पालन-पोषण करेंगे।
- बच्चे के नाम पर किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में 15 लाख रुपए का फिक्स डिपॉजिट कराना होगा।
- बच्चे के पिता सलमान खान, जो दोहा कतर में काम करते हैं, बच्चे को 18 साल की उम्र तक भारत से बाहर नहीं ले जा सकेंगे।
- सुमैरा खान को हर दो महीने में दूसरे रविवार (फरवरी, अप्रैल, जून, अगस्त, अक्टूबर और दिसंबर) को सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक मुलाकात की अनुमति होगी।
- मां को बच्चे की शांतिपूर्ण कस्टडी में हस्तक्षेप करने से रोक दिया गया है।
इन-कैमरा मुलाकात से सामने आए तथ्य
कोर्ट ने अपने कक्ष में दादा, मां, बच्चे और पिता से अलग-अलग इन-कैमरा बातचीत की। इस दौरान पता चला कि बच्चा दादा के साथ खुश है और जोधपुर के एक प्रतिष्ठित स्कूल में पढ़ रहा है। उसे बोलने की समस्या थी, जिसके लिए दादा ने विशेषज्ञ डॉक्टर से इलाज भी कराया था। बच्चे ने कोर्ट में बताया कि वह अपने पिता की दूसरी पत्नी के साथ भी खुश है।
कोर्ट ने सुमैरा खान की आर्थिक स्थिति पर भी चिंता जताई। न्यायालय ने पाया कि वह अपने भाइयों पर निर्भर है और दो बच्चों (दोनों शादी से एक-एक) की परवरिश के लिए उसके पास पर्याप्त आर्थिक साधन नहीं हैं।
मां को फटकार- ‘किसी सहानुभूति की हकदार नहीं…’
कोर्ट ने सुमैरा खान के खिलाफ कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि उसने कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की। कोर्ट ने कहा, “जो व्यक्ति अदालत के समक्ष गंदे हाथों से आता है, वह किसी सहानुभूति या नरमी का हकदार नहीं है।” न्यायालय ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कई फैसलों में स्पष्ट किया है कि जो लोग तथ्यों को छुपाते हैं या कोर्ट को गुमराह करते हैं, वे न्याय के हकदार नहीं हैं।
(नोट: न्यूज में लिखे गए नाबालिग बच्चे और उसके परिवार के सदस्यों के नाम बदले हुए हैं।)
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