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सिरप पीने से बच्चों की मौत के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा ये इसे गंभीरता से कहां ले रहे है, यहीं तो मैं कह रहा हूं। पहले भी इस तरह की घटना हुई थी। आई ड्रॉप में गड़बड़ हो गई थी तो उसके बाद उस पर बैन लग गया था।
आज भी पूरा प्रोसेस एडॉप्ट करना चाहिए, पहले परमिश्न लो, दवाई की जांच करवाओ। आज मान लो सिरप वाली बात आई है तो इस पर तुरंत एक्शन होना चाहिए।
पिछली सरकार में सैंपल फेल होने के बाद भी बैन नहीं करने के सवाल पर गहलोत ने कहा कि तो भई अब लगा देते, अब कार्रवाई कर लो। अब जेल भेज दो गड़बड़ की है तो, किसी सरकार में क्या हुआ उस वक्त में क्या फैसला हुआ, क्या नहीं हुआ, क्यों नहीं हुआ ये तो मैं अभी नहीं कह सकता।
लेकिन गलती किसी की हो, किसी सरकार के अंदर हुई हो, उसके ऊपर मैं समझता हूं कार्रवाई होनी चाहिए।
राज्य के बाहर की लेबोरेटरी से जांच करवा सकते है स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के शनिवार को सिरप को लेकर दिए गए जवाब पर गहलोत ने कहा कि मुझे नहीं मालूम कि स्वास्थ्य मंत्री ने क्या कहा है, पर मेरा मानना है कि स्वास्थ्य मंत्री जी भी इस बात को जानते हैं। वो अनुभवी है, पहले भी मंत्री रह चुके हैं।
वो अगर कुछ कह रहे है तो जांच करके कह रहे होंगे या जांच करवा रहे होंगे।
मेरा मानना है कि यह संवेदनशील विषय हैं। अगर आपको विश्वास नहीं है तो आप राज्य के बाहर की लैबोरेटरी से जांच की मांग कर सकते हो। स्वास्थ्य मंत्री को चाहिए कि वो किसी ओर जगह से जांच करवा ले।
शिक्षा और स्वास्थ्य पूरी तरह से फ्री होना चाहिए गहलोत ने कहा कि केन्द्र की आयुष्मान भारत योजना का इतना प्रचार किया कि यह योजना बड़ी दिखती है। लेकिन यह एक सीमित वर्ग के लिए हैं। हमारी योजना पूरे राजस्थान के लिए थी। यह दिन-रात का फर्क हैं।
पूरी जनता के लिए करना और एक वर्ग के लिए करना बहुत बड़ा फर्क होता हैं।
उन्होने कहा कि कम से कम शिक्षा और स्वास्थ्य पूरी तरह फ्री होना चाहिए। जो अफोर्ड करने वाले होंगे, पैसे वाले तो फायदा उठाएंगे नहीं। वैसे ही प्राइवेट सेक्टर की सेवाएं ले लेंगे। बाकी लोगों को फ्री हो जाए, ये सोशल सिक्योरिटी है। आप विश्वगुरु बनने की बात कर रहे हैं तो शुरुआत यहीं से करो।
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