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श्रीकृष्ण गोशाला में गोबर से गणेश प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं।
झालावाड़ में इस वर्ष गणेश चतुर्थी पर एक अनूठी पहल की जा रही है। श्रीकृष्ण गोशाला में गोबर से गणेश प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस पहल से जुड़े प्रेम दाधीच के अनुसार गोबर से निर्मित गणेश प्रतिमाएं न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर में समृद्धि भी लाती हैं। गोशाला में दो कर्मचारियों को इन प्रतिमाओं के निर्माण का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। परंपरागत रूप से गणेश चतुर्थी पर स्थापित की जाने वाली प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां जल प्रदूषण का कारण बनती हैं। 10 दिनों के बाद अनंत चतुर्दशी पर विसर्जन के दौरान ये मूर्तियां पूरी तरह से नहीं घुलतीं। इससे जल स्रोतों में प्रदूषण बढ़ता है, जो जलीय जीवों और मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। अब ये इको-फ्रेंडली मूर्तियां बाजार में भी उपलब्ध होंगी। इस पहल से न केवल धार्मिक परंपराओं का निर्वहन होगा, बल्कि पर्यावरण की रक्षा भी सुनिश्चित होगी।
गोबर से बनी मूर्तियां तीन दिन में होती हैं तैयार शहर की श्रीकृष्ण गोशाला में दो कार्मिकों को जयपुर में एक सप्ताह के प्रशिक्षण के बाद इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमाओं को बड़ी संख्या में तैयार किया जा रहा है। यह प्रतिमाएं गाय के गोबर, काली मिट्टी, मुल्तानी मिट्टी पाउडर जैसे प्राकृतिक रॉ मटेरियल से सांचे के माध्यम से बनाई जा रही हैं। खास बात यह है कि इन प्रतिमाओं की कीमत बाजार में बिकने वाली प्रतिमाओं से बहुत कम है। एक दिन में करीब 50 मूर्तियों का निर्माण कर रहे हैं। जिनको लागत मूल्य पर ही बाजार में बिक्री की जा रही है। एक गणेश प्रतिमा करीब एक सप्ताह में बनकर पूरी तरह से तैयार की जाती है। इसका वजन करीब 250 ग्राम है। गोशाला से जुड़े पदाधिकारी का मानना है कि पर्यावरण के साथ-साथ गोशाला को आर्थिक रूप से भी आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी। धीरे-धीरे लोगों का रुझान गोबर से बनी इको फ्रेंडली मूर्तियों की तरफ बढ़ रहा है।
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