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पंजाब और हरियाणा में तबाही मचा चुकी घग्गर नदी को लेकर राजस्थान में भी अलर्ट है। घग्गर को डेड रिवर यानी मरी हुई नदी भी कहते हैं। क्योंकि ये सिर्फ मानसून में उफान पर होती है।

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25 साल में दूसरी बार घग्गर के कारण हनुमानगढ़ में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। नदी में सामान्य से दोगुना पानी की आवक है। खेतों में कपास की 30 फीसदी फसल बर्बाद हो चुकी है। भास्कर टीम घग्गर नदी में पानी की आवक और संभावित खतरों को जानने मौके पर पहुंची। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

साल 1995 में हुए थे बाढ़ जैसे हालात

घग्गर नदी हनुमानगढ़ की टिब्बी तहसील से एंट्री करती है। करीब 30 साल में दूसरी बार नदी में इतने पानी की आवक हुई है। इससे पहले साल 1995 में घग्गर में इतना ज्यादा पानी आ गया था कि हनुमानगढ़ में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई थी।

एसडीएम सत्यनारायण सुथार ने बताया कि इसके बाद साल 2022 तक घग्गर नदी में 7 से 8 हजार क्यूसेक पानी की ही आवक होती रही। साल 2023 में यह बढ़कर 28000 क्यूसेक तक पहुंच गया था।

उस समय पानी की निकासी कर बाढ़ के हालात टाले थे। इस सीजन में अब तक 16000 क्यूसेक पानी की आवक है। जो सामान्य से दोगुना है।

वर्तमान में घग्गर नदी का बहाव कम है, लेकिन हरियाणा-पंजाब से कभी भी अधिक मात्रा में आवक हो सकती है।

वर्तमान में घग्गर नदी का बहाव कम है, लेकिन हरियाणा-पंजाब से कभी भी अधिक मात्रा में आवक हो सकती है।

हनुमानगढ़ जंक्शन को ज्यादा खतरा

घग्गर नदी शिवालिक की पहाड़ियों से निकलकर पंजाब-हरियाणा होते हुए सिरसा के रास्ते टिब्बी से हनुमानगढ़ में प्रवेश करती है। पंजाब और हरियाणा ने राजस्थान में अलर्ट दिया गया है कि घग्गर में अगले कुछ दिनों में पानी की आवक बढ़ सकती हे।

ऐसे में प्रशासन एलर्ट मोड पर है। पानी की आवक बढ़ने से बाढ़ के हालात बने तो टिब्बी के अलावा हनुमानगढ़ जंक्शन भी बाढ़ की चपेट में आ सकता हे।

स्थानीय निवासी मुख्तयार सिंह ने बताया कि 1995 में भी हनुमानगढ़ जंक्शन में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था। क्योंकि टिब्बी की तुलना में हनुमानगढ़ जंक्शन ढलान पर बसा है। यहां घग्गर नदी का स्वरूप संकरा हो जाता है।

लोग कर रहे दिन-रात नदी की निगरानी

भास्कर टीम टिब्बी में काजलावाली ढाणी क्षेत्र में के पास से गुजर रही घग्गर नदी पर पहुंची। यहां हमारी मुलाकात काजलों की ढाणी निवासी मुख्तयार सिंह से हुई।

उन्होंने बताया दो दिन पहले पानी की आवक ज्यादा थी, अब कम है। हालांकि प्रशासन ने अलर्ट भी जारी किया हुआ है। नदी किनारे बसे 15 से ज्यादा गांव अपने-अपने स्तर पर निगरानी रख रहे हैं।

प्रशासन को अपडेट कर रहे हैं। मिट्‌टी का कटाव रोकने के लिए नदी किनारे कट्‌टे भरकर रखे हैं। प्रशासन ने आश्रय स्थल भी बना रखे हैं ताकि आपातकालीन स्थिति में लोगों को तुरंत शिफ्ट किया जा सके।

किसान मोटर लगाकर खेतों में भरा पानी निकाल रहे हैं। इलाके के किसानों में नदी का बढ़ता जलस्तर देखकर दहशत है।

किसान मोटर लगाकर खेतों में भरा पानी निकाल रहे हैं। इलाके के किसानों में नदी का बढ़ता जलस्तर देखकर दहशत है।

तीन राज्यों में तबाही के बाद पाकिस्तान जाती है घग्गर नदी

घग्गर को डेड रिवर यानी मृत नदी भी कहते हैं। हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में तबाही मचाने के बाद पाकिस्तान जाती है।

यह नदी मानसून में ही उफान पर आती है। औसत से ज्यादा बारिश से राजस्थान में भी घग्गर के कारण बाढ़ का खतरा बना हुआ है। टिब्बी में नदी के दोनों किनारे पर बसे 15 गांवों समेत हनुमानगढ़ जिले के कमरानी, सलेमगढ़ मसानी, 4 केएसके, भैरुसरी, रावतसर तहसील, खेदासरी समेत दर्जनों गांव प्रभावित हो सकते हैं।

हनुमानगढ़ के पास 24 आरडी में इस नदी के दो रूट हैं। इसमें एक प्राकृतिक रास्ता है जो पीलीबंगा–अनूपगढ़ होते हुए ज्यादा पानी की आवक की स्थिति में पकिस्तान तक चली जाती है।

इसे नाली बेल्ट कहते हैं। वहीं दूसरा कृत्रिम बहाव क्षेत्र भी बनाया गया है जो 24 आरडी जीडीसी यानी घग्गर डाइवर्जन चैनल के रूप में रावतसर होते हुए रेगिस्तानी इलाके में डिप्रेशन एरिया में समाहित हो जाती है।

खेतों में पानी, 30% कपास खराब, छलका किसानों का दर्द

जिले में 1 जून से अब तक 8188 एमएम बारिश हो चुकी है। बारिश से मसीतांवाली हैड, सिलवाला खुर्द, पीर का मढिया, पन्नीवाली, तंदूरीवाली कैंची, फतेहपुर, टिब्बी, साईफन समेत कई गांवों में फसलें बर्बाद हो गईं। कपास और मूंग की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है।

सिलेवाला खुर्द निवासी किसान महेन्द्र ने बताया कि खेतों से बारिश का पानी नहीं निकलने से तीन बीघा में कपास की फसल खराब हो गई है। खेत में धान भी उगाया है। इस वक्त जितना पानी चाहिए था, उससे ज्यादा भरा होने के कारण उसमें भी नुकसान की आशंका बनी हुई है।

विनोद ने बताया उनके 13 बीघा खेत में पानी भरा है। पशुओं के लिए उगाया चारा भी नष्ट हो गया। गांव पीर का मड़िया निवासी राजेन्द्र ने बताया कि 8 बीघा में कपास उगाया था। उम्मीद थी एक बीघा में 7-8 क्विंटल फसल मिल जाएगी, अब 2 क्विंटल भी मुश्किल है।

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