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ई-रिक्शा से बनी जाम की स्थिति और इनसेट में किस हालत में दौड़ रही बस।
राजधानी में अधिकारियों की लापरवाही की वजह से पब्लिक ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था पूरी तरह गड़बड़ा गई है। अधिकारी सरकार से वाहवाही बटोरने के लिए पहले योजना बनाते है, फिर घोषणा करते हैं, लेकिन उन्हें लागू करने में पूरी तरह फेल साबित हाे रहे हैं। लाेगाें काे
अधिकारी आधी-अधूरी व्यवस्था लागू करके सीएम के सामने वाहवाही लूट रहे हैं। डेढ़ साल पहले राजधानी में 40 हजार ई-रिक्शाओ का जोनवार बंटवारा काे लेकर शुरुआत की। ई-रिक्शाओं का 7 जोन में बंटवारे पर निर्णय हाे गया, लेकिन अभी तक जोनवार संचालन की व्यवस्था शुरू नहीं हाे पाई।
नारायण सिंह सर्किल से बस स्टैंड काे ट्रांसपोर्ट नगर शिफ्ट कर दिया गया। यहां से बसें चलना भी शुरू हाे गईं। एक जगह बस स्टैंड बंद किया ताे बस ऑपरेटर्स ने 4 जगह बस स्टैंड बना दिए। इसकी वजह से कई जगह ट्रैफिक जाम रहने लगा है। बसें अब जवाहर नगर कच्ची बस्ती रोड से जा रही है।
कच्ची बस्ती में पहले से ही लाेगाें की आवाजाही ज्यादा रहती है। बसें चलने से अब ट्रैफिक का दबाव बढ़ गया है। इस वजह से इस रोड पर आए दिन ट्रैफिक जाम रहता है। हालात यह है कि अधिकारी 5 महीने बाद भी ट्रांसपोर्ट नगर बस स्टैंड पर यात्रियों के लिए सुविधाएं डवलप नहीं कर पाए। यहां पर पानी ताे दूर की बात है, यात्रियों के लिए शौचालय तक उपलब्ध नहीं है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट के साधन तक नहीं मिलते।
किराया तय, पर लोगों को राहत नहीं मिली ऑटो रिक्शा आरटीओ ने 2 महीने पहले ऑटो-रिक्शा और मिनी बसों सहित कार टैक्सी का किराया निर्धारित किया था। किराया निर्धारित हाेने के बाद भी लाेगाें काे राहत नहीं मिली है। ऑटो रिक्शा और मिनी बस संचालक मनमर्जी से लाेगाें से किराया वसूल रहे हैं। अधिकारियों ने घोषणा करके सरकार के सामने वाहवाही लूट ली, लेकिन इससे लाेगाें काे राहत नहीं मिली।
दो साल में दाे बार घोषणा की, लेकिन धरातल पर नहीं उतरी बीजेपी सरकार में आरटीओ ने अजमेर रोड स्थित हीरापुरा बस स्टैंड से बसें चलाने के लिए दाे घोषणा की। दोनों बार अधिकारी फेल साबित हुए। पहली बार ताे बिना सुविधा के बस स्टैंड से बसें शुरू करने की तैयारी की। अाधी-अधूरी तैयारी देखकर सीएम नाराज हुए और कार्यक्रम काे स्थगित कर दिया। एक महीने पहले हीरापुरा बस स्टैंड से बसों का संचालन शुरू करने की घोषणा की।
बस ऑपरेटर्स के विरोध के चलते स्थगित कर दिया। बस ऑपरेटर्स का कहना था कि बस स्टैंड पर सुविधा ही डवलप नहीं की। रात में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा नहीं है। इस वजह से यात्री परेशान हाेंगे। वहीं, किसी यात्री के साथ छेड़छाड़ हुई ताे जिम्मेदार कौन हाेगा? अब बालवाहिनी बसों पर स्टैज कैरिज का परमिट लेने का बस ऑपरेटर्स पर दबाव बनाया जा रहा है। इस वजह से बस ऑपरेटर्स आंदोलन पर है।
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