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सुबह से ही छतों पर बच्चे, युवा और बुजुर्ग ‘ये काटा-वो मारा’ के शोर के बीच रंग-बिरंगी पतंगें उड़ाते नजर आए।
करौली में रक्षाबंधन के मौके पर शनिवार को पतंगबाजी का उत्साह चरम पर रहा। सुबह से ही छतों पर बच्चे, युवा और बुजुर्ग ‘ये काटा-वो मारा’ के शोर के बीच रंग-बिरंगी पतंगें उड़ाते नजर आए। मौसम में बारिश थमने के बाद यह सिलसिला दिनभर चलता रहा।
रक्षाबंधन और जन्माष्टमी पर पतंग उड़ाने की यहां वर्षों पुरानी परंपरा है। इस बार भी त्योहार से एक दिन पहले ही पतंगबाजों ने बाजार से पतंग और मांझा खरीद लिया था। शहर के बाजारों में पतंग विक्रेताओं की दुकानों पर सुबह से भीड़ लगी रही। पतंगों में नेताओं, फिल्मी कलाकारों और कार्टून पात्रों वाली डिजाइन खूब बिकीं। कीमत 2 रुपए से लेकर 200 रुपए तक रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाली पतंग की मांग सबसे ज्यादा रही।
त्योहार पर कई घरों की छतों को पतंगबाजी के लिए सजाया गया। कहीं त्रिपाल और चादर लगाकर धूप-बारिश से बचाव किया गया। कहीं लाउडस्पीकर पर गानों की धुन में पतंगबाजी का आनंद लिया गया। कई जगह दोस्तों और परिवारों के बीच पतंग काटने की प्रतियोगिताएं भी हुईं। एक पक्ष की पतंग कटते ही दूसरी ओर से ‘वो काटा, वो मारा’ के नारों के साथ जश्न मनाया गया।
पतंग उड़ाने के साथ-साथ पतंग लूटने का रोमांच भी देखने को मिला। जैसे ही किसी की पतंग कटती, गली-मोहल्लों में बच्चे और युवा दौड़ पड़ते। महिलाओं ने भी बच्चों के साथ छतों पर चढ़कर इस रंगीन माहौल का लुत्फ उठाया। पतंग विक्रेताओं के अनुसार इस बार सरकारी सख्ती के चलते चीन निर्मित मांझा बाजार में नहीं बिक रहा है। इससे स्थानीय डोर की मांग बढ़ी है। रक्षाबंधन से करीब एक महीने पहले ही पतंगबाजी शुरू हो चुकी थी। यह जन्माष्टमी तक जारी रहेगी।
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