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हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनाव करवाने की तैयारी शुरू कर दी है। राज्य निर्वाचन आयोग करीब 11 हजार पंचायतों और 150 से ज्यादा शहरी निकायों के चुनाव की घोषणा 7 से 10 दिन में कर देगा।

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राज्य निर्वाचन आयुक्त मधुकर गुप्ता ने हाईकोर्ट के आदेशों के मुताबिक जल्द निकाय और पंचायत चुनाव करवाने की घोषणा की है। जिन निकायों और पंचायती राज संस्थाओं का 5 साल का कार्यकाल पूरा हो गया और जिनका दो महीने में पूरा हो जाएगा, वहां भी चुनाव होंगे। उन्होंने कहा- ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ व्यावहारिक नहीं है।

5 साल में होने चाहिए चुनाव मधुकर गुप्ता ने कहा- कानूनी प्रावधान साफ है कि 5 साल के अंदर पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों के चुनाव होने चाहिए। हाईकोर्ट ने जो आदेश दिया है, वह इन्हीं प्रावधानों के अंदर दिया है। विभिन्न हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जो आदेश हैं, उनसे हमने समय-समय पर राज्य सरकार को आगाह किया।

हरियाणा-पंजाब में भी चुनाव में देरी हुई तो पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उसमें दखल दिया और इसी तरह के आदेश दिए। अभी जो आदेश हुए हैं, उसी से मिलते-जुलते आदेश हैं। कर्नाटक में भी देरी हो रही थी, वहां भी कोर्ट ने दखल दिया। यह केवल राजस्थान की समस्या नहीं, अन्य राज्यों में भी है। अन्य राज्यों में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने दखल दिया है और इसी तरह के निर्देश दिए हैं।

मधुकर गुप्ता ने कहा- जिन निकाय और पंचायत के चुनाव को 5 साल हो गया है और जहां 2 महीने के अंदर 5 साल पूरे हो जाएंगे, वहां पर आयोग चुनाव करवाएगा।

मधुकर गुप्ता ने कहा- जिन निकाय और पंचायत के चुनाव को 5 साल हो गया है और जहां 2 महीने के अंदर 5 साल पूरे हो जाएंगे, वहां पर आयोग चुनाव करवाएगा।

‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ व्यावहारिक नहीं ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ को लेकर मधुकर गुप्ता ने कहा- यह व्यावहारिक नहीं है। जब तक संविधान संशोधन नहीं हो जाता, तब तक ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ पूरा नहीं हो सकता। जिन पंचायती राज संस्थाओं और निकायों के पांच साल पूरे नहीं हुए, उनके चुनाव समय से पहले किस प्रावधान के तहत करवा सकते हैं।

आप किसी भी निकाय या पंचायतीराज संस्था के चुनाव समय से पहले नहीं करवा सकते। ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ के लिए EVM और दूसरे संसाधनों की भी जरूरत होगी।

पंचायती राज मंत्री बोले- सामूहिक फैसला लेंगे इधर, राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ को नकारे जाने के बाद इस मामले में पंचायत राज मंत्री मदन दिलावर ने कहा- इस मामले में सामूहिक निर्णय करेंगे। जो निर्णय होगा, उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

जिला परिषदों और पंचायत समितियों के चुनाव की घोषणा बाद में होगी पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य, प्रधान और जिला प्रमुख चुनाव की घोषणा बाद में होगी। 21 जिला परिषदों और 222 पंचायत समितियों के सदस्यों और प्रधान, जिला प्रमुखों का कार्यकाल नवंबर-दिसंबर में खत्म होगा। इसलिए उनकी घोषणा बाद में होने के आसार हैं।

6 जिला परिषदों और 78 पंचायत समितियों का कार्यकाल अगस्त-सितंबर 2026 में खत्म होगा। 4 जिला परिषदों और 30 पंचायत समितियों का कार्यकाल नवंबर-दिसंबर 2026 में खत्म होगा।

सरकार के परिसीमन का क्या होगा? सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के वार्डों का परिसीमन किया है। नई पंचायत बनाने का भी फैसला किया है। राज्य निर्वाचन आयुक्त ने साफ किया है कि सरकार जिन नई पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के गठन और वार्डों के परिसीमन का नोटिफिकेशन जारी कर देगी, उनके चुनाव नए परिसीमन के हिसाब से हो जाएंगे। अगर नोटिफिकेशन नहीं हुआ तो फिर पुराने इलाकों के हिसाब से चुनाव करवाए जाएंगे।

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परिसीमन के बहाने अनिश्चितकाल तक चुनाव-स्थगित नहीं कर सकती सरकार:हाईकोर्ट ने कहा- जल्द पंचायत इलेक्शन करवाए; प्रशासकों को हटाने का आदेश भी रद्द

राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश में पंचायत चुनाव समय पर नहीं कराने को लेकर नाराजगी जताई है। जस्टिस अनूप ढंड की अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा- परिसीमन के नाम पर सरकार पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित नहीं कर सकती है। (पूरी खबर पढ़ें)



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