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राजस्थान यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर दायर याचिका पर यूनिवर्सिटी ने हाईकोर्ट में अपना जवाब पेश किया है। यूनिवर्सिटी ने कहा है कि चुनाव नहीं कराने से याचिकाकर्ता के अधिकारों का हनन नहीं होता, इसलिए याचिका खारिज की जाए। हाईक
यूनिवर्सिटी ने कोर्ट को बताया कि 2023-24 सत्र में भी राज्य सरकार ने चुनाव नहीं कराने का निर्णय लिया था, जिसे हितेश यादव व विकास ने कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन कोर्ट ने उनके पक्ष में कोई आदेश नहीं दिया और मामले लंबित हैं। यह जानकारी याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में नहीं दी है।
यूनिवर्सिटी ने यह भी कहा कि छात्रसंघ चुनाव लड़ना या मतदान करना कोई मौलिक अधिकार नहीं है, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने सांसद और विधायक चुनावों के संदर्भ में स्पष्ट किया है। यूजीसी नियमों के अनुसार, 180 दिन का शैक्षणिक सत्र जरूरी है और चुनाव होने से कैलेंडर बाधित होगा। राज्य सरकार पहले ही वीसी की राय के आधार पर इस सत्र में चुनाव न कराने का फैसला ले चुकी है।
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