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राजस्थान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने पाली जिले में वर्ष 2014 के हत्याकांड में एक आरोपी को निचली अदालत द्वारा बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया है। जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस अनुरूप सिंघी की खंडपीठ ने
मामला 16 जून 2014 की रात 8 बजे का है, जब नावाराम अपने घर की पोल में बैठा था। इसी दौरान रमेश कुमार, पेमा राम, मुकेश कुमार और 5-7 अन्य व्यक्ति लाठी और सरिया लेकर मोटरसाइकिल और जीप से आए। आरोप के अनुसार वे जबरन पोल में घुसे और नावाराम से लक्ष्मी के बारे में पूछा, जो पेमाराम की बेटी है। इसके बाद आरोपियों ने हत्या के इरादे से नावाराम के सिर और शरीर के अन्य हिस्सों पर लाठी से वार किए। जिससे उसकी मौत हो गई।
शुरुआत में सिर्फ रमेश के खिलाफ चार्जशीट
इस संबंध में रानी के जवाली निवासी रमेश कुमार, पेमाराम व दीपाराम सहित अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले में पुलिस ने शुरुआत में केवल रमेश कुमार के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया, जबकि मुकेश कुमार और पेमाराम के खिलाफ जांच लंबित रखी गई। बाद में मुकेश कुमार फरार हो गया और उसके खिलाफ सप्लिमेंट्री चार्ज शीट दाखिल की गई।
गवाहों के बयान में विरोधाभास
कोर्ट ने पाया कि मुख्य गवाह दीपाराम ने 22 सितंबर 2016 को अपने दूसरे बयान में स्पष्ट रूप से कहा था कि तीन आरोपियों में से केवल रमेश के पास लाठी थी और बाकी आरोपियों के हाथों में कोई हथियार नहीं था। उसने यह भी कहा था कि रमेश ने नावाराम पर लाठी से वार किया और बाकी आरोपी खड़े रहे। दूसरी गवाह कसनी देवी ने भी स्पष्ट किया कि रमेश कुमार ने नावाराम के सिर पर लाठी मारी। उसने यह नहीं कहा कि मुकेश कुमार ने भी कोई चोट पहुंचाई।
कोर्ट का विशेष ध्यान इस बात पर गया कि कसनी देवी के 9 अप्रैल 2015 के पहले बयान में उसने स्पष्ट रूप से कहा था कि मुकेश और पेमाराम ने नावाराम के साथ कुछ नहीं किया। जब 20 दिसंबर 2016 के दूसरे बयान की तुलना पहले बयान से की गई तो कोर्ट ने पाया कि दूसरे बयान में महत्वपूर्ण सुधार हैं, जो दिखाता है कि वह एक सच्ची गवाह नहीं है।
वहीं, केस की जांच करने वाले पुलिस अधिकारी देवेंद्र सिंह ने जिरह के दौरान बचाव पक्ष के सुझाव को स्वीकार किया कि जांच पूरी करने के बाद मुकेश कुमार इस मामले में शामिल नहीं पाया गया। यह बयान मुकेश कुमार के पक्ष में एक महत्वपूर्ण सबूत था।
कोर्ट: न व्यक्तिगत दुश्मनी, व ठोस सबूत
कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध सबूत यह नहीं दिखाते कि मुकेश कुमार ने मृतक नावाराम पर कोई वार किया था। मुकेश कुमार का नावाराम से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं था, बल्कि वे इस बात से नाराज थे कि पेमाराम की बेटी उसके साथ रह रही थी। कोर्ट ने माना कि निचली अदालत ने 10 जून 2024 के अपने फैसले में मुकेश कुमार को बरी करते समय उपलब्ध सबूतों का उचित मूल्यांकन किया था।
लोअर कोर्ट के फैसले में कोई खामी नहीं
हाईकोर्ट ने इस मामले में निष्कर्ष निकाला कि निचली अदालत द्वारा दर्ज निष्कर्ष किसी भी अवैधता, दोष या विकृति से ग्रस्त नहीं हैं, जिसमें हस्तक्षेप की गुंजाइश हो। परिणामस्वरूप, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली अपील को खारिज कर दिया।
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