नशामुक्ति सेमिनार को संबोधित करते मनोरोग एवं नशामुक्ति रोग विशेषज्ञ योगेश कुमार।
टोंक में जिला मुख्यालय स्थित राजकीय कन्या महाविद्यालय में शनिवार को नशामुक्ति सेमिनार का आयोजन किया गया। इस दौरान छात्रों और शिक्षकों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
नशे से बिगड़ता शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य
सेमिनार को संबोधित करते हुए मनोरोग एवं नशामुक्ति विशेषज्ञ डॉ. योगेश कुमार ने बताया कि नशे का सेवन मनुष्य के शारीरिक, मानसिक, आर्थिक, सामाजिक और व्यावसायिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डालता है। स्मैक, डोडा पोस्त, अफीम, हेरोइन, ब्राउन शुगर, चिट्टा, भांग, गांजा, चरस, शराब, कोकेन, बीडी, सिगरेट, तंबाकू, गुटखा ,पान मसाला, खैनी,कैफीन, थिनर, ट्रमाडोल कैप्सूल, ऐवील इंजेक्शन, नींद की गोलियां आदि से लोग दूर रहे, जिससे उनकी लत है वे छोड़ दे।

गर्ल्स कॉलेज में नशामुक्ति सेमिनार में मौजूद छात्राएं व अन्य।
अपराध और भ्रष्टाचार में भी नशे की भूमिका
डॉ. योगेश ने कहा कि समाज में नशे के बढ़ते दुरुपयोग से अपराध और भ्रष्टाचार में भी इजाफा हो रहा है। वहीं, तंबाकू और धूम्रपान से कैंसर, अस्थमा और हृदय रोग जैसी घातक बीमारियां जन्म लेती हैं। उन्होंने बताया कि कई लोग अवसाद और तनाव में शराब और सिगरेट का सहारा लेते हैं, लेकिन यह स्थिति और ज्यादा खतरनाक साबित होती है।
नशा छोड़ने के लिए इच्छाशक्ति करे मजबूत
उन्होंने बताया कि किसी भी प्रकार का नशा छोड़ने के लिए सबसे पहले व्यक्ति को अपनी इच्छाशक्ति मजबूत करनी होगी। इसके साथ ही विशेषज्ञ की काउंसलिंग और उचित दवाइयों के जरिए नशे की लत से बाहर निकला जा सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य के लिए सुझाव
डॉ. योगेश ने मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए लोगों को सलाह दी कि वे अंधविश्वास से दूर रहें, नियमित 7–8 घंटे की नींद लें, व्यायाम करें, पौष्टिक आहार लें, परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं और सकारात्मक सोच विकसित करें।
सरकार की पहल, हेल्पलाइन नंबर 14416 किया शुरू
डॉ. योगेश ने बताया –

भारत सरकार ने मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत एक राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 14416 शुरू किया है, जहां लोग मनोरोग और नशामुक्ति से संबंधित परामर्श ले सकते हैं। इसके अलावा सआदत अस्पताल के कमरे नंबर 3 में भी नियमित परामर्श और इलाज उपलब्ध है।

सेमिनार में शामिल रहे
कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. सुलोचना मीणा, डॉ. इरशाद अहमद, डॉ. अलीना खान, डॉ. शुमाईला खानम, डॉ. ज़ुबैर मंसूरी, दिनेश चौधरी, डॉ. पीयूष पारीक और डॉ. राखी सिंह सहित अन्य शिक्षक व छात्र मौजूद रहे।
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