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राजधानी की मुख्य सड़कों पर घोषित नो-वेंडिंग ज़ोन शाम होते ही अवैध वेंडिंग ज़ोन बन जाते हैं। ग्रेटर और हेरिटेज निगम की सतर्कता शाखा की टीमें दिन में भारी लवाजमे के साथ दिखावटी कार्रवाई करती हैं। कार्रवाई की सूचना पहले ही लीक हो जाने से आधी-अधूरी कार्र
.
नतीजा यह है कि शाम को फिर से सड़कों पर ठेले-थड़ी का अवैध बाजार सज जाता है। इन अस्थाई अतिक्रमणों के चलते 100 फीट चौड़ी सड़कों पर ट्रैफिक के लिए सिर्फ 30-40 फीट का रास्ता बचता है। दो लेन तक ठेलों का कब्जा रहने से वाहन रेंग-रेंगकर चलते हैं। यहां तक कि 200 फीट चौड़ी सड़कों की सर्विस लेन भी अवैध वेंडिंग ज़ोन बनी हुई है।
इन सड़कों पर सबसे ज्यादा कब्जा
- टोंक रोड : एसएमएस अस्पताल के सामने: शाम को दोनों तरफ 20-30 फीट तक ठेलों का जमावड़ा रहता है। मेडिकल कॉलेज से लेकर जेके लोन अस्पताल तक पूरी सर्विस लेन जाम रहती है।
- गांधीनगर मोड़ : विधानसभा रोड: 80-60 फीट चौड़ी कनेक्टिंग सड़कों पर दोनों तरफ ठेलों की भरमार, जबकि क्षेत्र नो-वेंडिंग ज़ोन घोषित है।
- गोपालपुरा पुलिया से दुर्गापुरा: 200 मीटर (जयपुरिया अस्पताल मोड़ तक) पर करीब 50 ठेले सड़क की एक लेन घेर लेते हैं। पीक आवर्स में हर 10 मिनट पर जाम लगता है।
- जगतपुरा पुलिया से महल रोड : 200 फीट चौड़ी सड़क की सर्विस लेन 5 से 7 किमी तक ठेलों से पूरी तरह ब्लॉक रहती है।
- मानसरोवर थड़ी मार्केट व न्यू सांगानेर रोड: एसएफएस चौराहे से मेट्रो स्टेशन तक करीब 7 किमी सड़क के दोनों तरफ हर शाम बाजार सज जाता है।
- सांगानेर-चौड़िया पेट्रोल पंप से स. माधोपुर पुलिया तक: सुबह से रात तक सब्जी-फल ठेलों के चलते दिन में कई बार जाम लगता है।
- परकोटा क्षेत्र (चौड़ा रास्ता, रामगंज, घाटगेट, चारदरवाजा, बड़ी चौपड़, जौहरी बाजार): दिन-रात अतिक्रमण रहता है। शाम को ठेले और जम जाते हैं।
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