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टीएडी विभाग की ओर से संचालित 65 छात्रावासों में रहने वाले जनजाति बच्चों को उधारी की थाली परोसी जा रही है।
जिले में टीएडी व सहकारिता विभाग की लापरवाही के चलते टीएडी विभाग की ओर से संचालित 65 छात्रावासों में रहने वाले जनजाति बच्चों को उधारी की थाली परोसी जा रही है।
सहकारिता विभाग के उपभोक्ता भंडार की ओर से टेंडर नहीं किये जाने से जहां छात्रावासों के अधीक्षक अपनी जेब या उधारी पर छात्रावासों के बच्चों को भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं।
वहीं, छात्रावासों के अधीक्षकों को मई माह से उनके बिलों का भुगतान भी टीएडी विभाग ने अभी तक नहीं किया है। ऐसे में छात्रावासों के अधीक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
डूंगरपुर जिले में जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग की ओर से एसटी वर्ग के विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए 65 जनजाति छात्रावासों का संचालन किया जा रहा है। इन छात्रावासों में खाद्यान्न सामग्री आपूर्ति की जिम्मेदारी सहकारिता विभाग के उपभोक्ता भण्डार को दी गई है, लेकिन उपभोक्ता भण्डार की ओर से खाद्यान्न सामग्री के टेंडर नहीं किए हैं।
उपभोक्ता भंडार के टेंडर नहीं होने से छात्रावासों के अधीक्षकों की ओर से अपने स्तर पर या तो अपनी जेब से या उधारी पर छात्रावासों में खाद्यान्न सामग्री लाकर बच्चों को खाना खिलाया जा रहा है, जिसमें छात्रावास अधीक्षक विद्यार्थियों के लिए राशन सामग्री, दूध, सब्जी आदि की व्यवस्था करवाता है और मैस संबंधी खर्च का बिल विभाग को भिजवाता है और उसके बाद भुगतान किया जाता है।
डूंगरपुर जिले के 65 छात्रावासों में टीएडी विभाग की ओर से मई माह से किसी भी बिल का भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। ऐसे में छात्रावासों के अधीक्षकों पर उधारी के चलते लाखों का कर्जा हो गया है।
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