रिजर्व बैंक की जागरूकता स्कीम के तहत कैनरा बैंक शिविर में आयोजित इस नाटक का मंचन एनजीओ शक्ति पुंज की ओर से किया गया।
‘पैसा है रंग-रूप, पैसा ही माल है… अकबर इलाहाबादी का यह शेर जब जयपुर की गलियों में गूंजा तो उसके साथ ही एक अहम सवाल भी उठ खड़ा हुआ। यह पैसा सुरक्षित कैसे रखा जाए? इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए जयपुर के रंगकर्मियों ने नुक्कड़ नाटक का सहारा लिया
रिजर्व बैंक की जागरूकता स्कीम के तहत कैनरा बैंक शिविर में आयोजित नाटक का मंचन एनजीओ शक्ति पुंज की ओर से किया गया। निर्देशक सुप्रिया शर्मा के निर्देशन में हुए इस प्रस्तुति में मेरा पैसा शीर्षक से रंगमंच के 6 कलाकारों ने हिस्सा लिया।

निर्देशक सुप्रिया शर्मा के निर्देशन में हुए इस प्रस्तुति में मेरा पैसा शीर्षक से रंगमंच के 6 कलाकारों ने हिस्सा लिया।
ढोलक की थाप और संवादों की अदायगी के जरिए दर्शकों को पैसों को सुरक्षित रखने, उनसे बचत और निवेश करने, तथा ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव के गुर सिखाए गए। नाटक में बताया गया कि बैंकिंग सेक्टर में किस तरह के खाते होते हैं, उनका इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है। साथ ही ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, एटीएम के सुरक्षित उपयोग और स्कैमर्स से सावधान रहने जैसे संदेश रोचक अंदाज में दिए गए।
यह नाटक दुर्गापुरा और पावटा गांव की गलियों में हुआ, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने इसे देखा और सीख ली कि पैसों को सिर्फ कमाना ही नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखना और सही जगह लगाना भी उतना ही जरूरी है।
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