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आरोपी को पकड़ने गई पुलिस टीम पर हमला करने के मामले में सीकर की एडीजे कोर्ट संख्या 1 ने फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस मामले में 6 आरोपियों को तीन-तीन साल के कारावास की सजा सुनाई है। जबकि 12 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। यह फैसला जज मह
मामले में पुलिस की तरफ से पैरवी राजेंद्र हुड्डा,सलीम अहमद गौरी,गोविंद प्रकाश सहित अन्य वकीलों ने की। फैसले की जानकारी देते हुए एपीपी रामावतार शर्मा ने बताया कि मामला साल 2016 में सीकर के सदर थाने का है। सदर थाना पुलिस टीम जानलेवा हमला और आर्म्स एक्ट के मामले में फरार चल रहे मुजरिम सुखदेवाराम की तलाश में थी। इस बीच पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी श्यामपुरा में अपने मामा हमीर कुलड़िया के घर आया हुआ है।
सुखदेवाराम को पकड़ने के लिए पुलिस जब हमीर के घर पर गई तो वहां लोगों ने पुलिस टीम को घेर लिया। भीड़ देखकर पुलिस ने जब गाड़ी में बैठना चाहा तो उन लोगों ने गाड़ी की चाबी निकाल ली। इसके बाद पवन,सुरेश, हमीर,सुखदेवाराम,रामकुमार,गुला सहित करीब एक दर्जन लोगों ने पुलिस के साथ मारपीट करना शुरू कर दिया। एक पुलिसकर्मी को पेड़ से बांध दिया। वहीं कुछ पुलिसकर्मियों के साथ बेल्ट से मारपीट की। इन लोगों ने पुलिस के वाहनों को क्षतिग्रस्त किया। मौके पर पहुंची दूसरी पुलिस टीम ने सिचुएशन कंट्रोल की। मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी की गई।
मामले में 18 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया गया। अभियोजन पक्ष की तरफ से 28 गवाह और 78 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए गए। इसके बाद अब कोर्ट ने मामले में 12 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
जबकि 6 आरोपी हमीर सिंह पुत्र मुकनाराम, पवन कुमार पुत्र हमीर सिंह, सुरेश कुमार पुत्र हमीर सिंह, भागीरथ पुत्र मुकनाराम, रामकुमार उर्फ बच्च्या पुत्र मोहनलाल, सुखदेवाराम पुत्र भींवाराम को 3 साल के कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इस मामले में धारा 307 नहीं मानी। धारा 332, 353 के तहत आरोपियों को सजा सुनाई गई है।
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