राजस्थान में अब लालच देकर या डरा-धमकाकर धर्म परिवर्तन कराने वाली संस्थाओं पर बुलडोजर एक्शन का कानून बनने जा रहा है। पहली बार बुलडोजर एक्शन को कानूनी जामा पहनाया जा रहा है। धर्मांतरण विरोधी बिल में गलत तरीके से धर्म परिवर्तन कराने वाली संस्थाओं के भवन
‘प्रोहिबिशन ऑफ अनलॉफुल कन्वर्जन ऑफ रिलीजन बिल 2025’ को नए सिरे से विधानसभा में रखा जा चुका है। यह बिल मंगलवार को विधानसभा में बहस के बाद पारित होगा। धर्म परिवर्तन कराने वाली संस्थाओं के भवनों पर बुलडोजर एक्शन तभी होगा, जब उनमें नियमों का उल्लंघन हुआ हो या अतिक्रमण करके बनाई गई हों। स्थानीय निकाय और प्रशासन जांच के बाद ही बुलडोजर चलाएंगे।
धर्मांतरण विरोधी बिल के प्रावधानों के मुताबिक, अगर किसी जगह पर सामूहिक धर्म परिवर्तन होता है तो वहां उस संपत्ति को तोड़ा जा सकेगा। जिस भवन में सामूहिक धर्म परिवर्तन हुआ है, उसे प्रशासन जब्त करेगा

धर्म परिवर्तन के मकसद से शादी करने को धर्मांतरण माना जाएगा धर्म परिवर्तन के मकसद से शादी करने को धर्मांतरण की परिभाषा में लिया है। अगर कोई बहला-फुसला कर, झूठे वादे करके या गलत जानकारी देकर किसी से शादी करता है और शादी से पहले या शादी के बाद धर्म बदलवाता है, तो इसे धर्मांतरण माना जाएगा। ऐसे मामलों में सजा होगी। इसे लव जिहाद से जोड़कर देखा जा रहा है। इसमें 20 साल की सजा होगी।
धर्म परिवर्तन के लिए की गई शादी शून्य घोषित होगी अगर कोई धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से शादी करता है तो उस शादी को कोर्ट से शून्य घोषित किया जा सकेगा। केवल धर्म परिवर्तन के एकमात्र उद्देश्य से किसी भी महिला या पुरुष ने शादी की है। शादी से पहले या बाद में कन्वर्जन करवाया है तो ऐसी शादी को रद्द करवाया जाएगा।
जबरन धर्म परिवर्तन गैर-जमानती अपराध धर्म परिवर्तन से जुड़े सभी अपराध गैर जमानती माने जाएंगे। इन अपराधों में आसानी से जमानत नहीं होगी। बुलडोजर एक्शन से पहले नोटिस दिया जाएगा। अतिक्रमण पर 72 घंटे में बुलडोजर चलेगा।

घर वापसी को धर्म परिवर्तन नहीं माना जाएगा धर्मांतरण विरोधी बिल में जबरन धर्म परिवर्तन पर उम्रकैद तक की सजा सहित कड़े प्रावधान किए गए हैं। घर वापसी को धर्म परिवर्तन नहीं माना गया है। मूल पैतृक धर्म में वापसी को धर्म परिवर्तन की परिभाषा में शामिल नहीं किया गया है।
अवैध धर्मांतरण पर कम से कम 7 साल और अधिकतम 14 साल की सजा और 5 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है। नाबालिग, दिव्यांग, महिला, एससी, एसटी के व्यक्ति का जबरन धर्मांतरण करने पर कम से कम 10 साल और अधिकतम 20 साल की सजा और 10 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है।
सामूहिक धर्म परिवर्तन पर 20 साल की सजा, 25 लाख रुपए जुर्माना गलत तरीके से सामूहिक धर्म परिवर्तन करने पर कम से कम 20 साल और अधिकतम उम्रकैद की सजा तथा 25 लाख रुपए जुर्माना लगेगा। धर्म परिवर्तन के लिए विदेशी संस्थान और अवैध संस्थान से फंड लेने पर 10 से 20 साल की सजा और 20 लाख रुपए जुर्माना होगा।
बार-बार गलत तरीके से धर्म परिवर्तन करवाने वालों को उम्रकैद अगर कोई एक बार से ज्यादा अपराध करता है और लगातार धर्म परिवर्तन करवाता है तो उसे आजीवन कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। अगर कोई अपनी मर्जी से धर्म बदलना चाहता है तो भी प्रशासन से मंजूरी जरूरी होगी। धर्म परिवर्तन से कम से कम 90 दिन पहले कलेक्टर या एडीएम के यहां घोषणा (डिक्लेरेशन) देनी होगी कि वह अपनी सहमति से धर्म परिवर्तन करना चाहता है।
धर्म परिवर्तन कराने वाले धर्माचार्य को दो माह पहले नोटिस मजिस्ट्रेट के यहां देना होगा। धर्म परिवर्तन की सूचना कलेक्टर, एडीएम के दफ्तर के नोटिस बोर्ड पर चस्पा की जाएगी। 2 महीने में आपत्तियां मांगी जाएंगी। फिर कोई आपत्ति होगी तो उसकी सुनवाई और निपटारे के बाद ही धर्म परिवर्तन हो सकेगा।
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