बेंगलुरु में स्टील मार्केट की चार मंजिला बिल्डिंग में शॉर्ट सर्किट से गोदाम में आग लगी थी। आग तीसरी और चौथी मंजिल तक पहुंच गई, जिससे रसोई में रखे सिलेंडर में ब्लास्ट हो गया था।
हादसे में भीनमाल के सत्तू गांव के रहने वाले बर्तन कारोबारी मदन सिंह राजपुरोहित का पूरा परिवार जिंदा जल गया।
आगजनी में रानीवाड़ा के एक व्यापारी की भी दम घुटने से मौत हो गई। सभी मृतकों का रविवार को बेंगलुरु में अंतिम संस्कार किया जाएगा।

मदन सिंह राजपुरोहित, उनकी पत्नी संगीता, बेटे विहान और नीतेश इतनी बुरी तरह जल गए। मदन सिंह का शव गोदाम में मिला। जबकि चौथी मंजिल पर कमरे में पत्नी और दो बच्चों के शव मिले। मदन सिंह के पिता खेती करते हैं। माता-पिता गांव ही रहते हैं। उन्हें शनिवार शाम तक घटना की जानकारी नहीं थी। शनिवार दोपहर तक सभी शव बिल्डिंग से निकाले जा सके।

तस्वीर में बायें मदन सिंह के पिता हैं। उन्हें अभी तक बेटे-बहू और दो पोतों की मौत की जानकारी नहीं है।
प्रत्यक्षदर्शी बोले- पहले और दूसरे फ्लोर पर गोदाम थे प्रत्यक्षदर्शी रानीवाड़ा निवासी नैन सिंह राजपुरोहित ने बताया कि 4 मंजिला बिल्डिंग में पहले और दूसरे फ्लोर पर गोदाम बने थे। इसमें पहले फ्लोर पर लकड़ी और स्टील का मदन सिंह का गोदाम था। दूसरे फ्लोर पर सुरेश खत्री का प्लास्टिक आइटम का गोदाम था।
आग पहली मंजिल पर बने मदन सिंह के गोदाम में लगी थी। यहां पहले शार्ट सर्किट हुआ, उसके बाद यहां लकड़ी के सामान में आग लग गई। इसके बाद आग दूसरे फ्लोर पर पहुंची और प्लास्टिक के गोदाम ने आग पकड़ ली। इसके बाद आग तीसरे और चौथे फ्लोर पर भी पहुंच गई।
लोगों ने कूद कर जान बचाई तीसरे फ्लोर पर मौजूद लोगों ने कूद कर अपनी जान बचाई। वहीं पहले फ्लोर पर सो रहे मदन सिंह पहले ही जल गए थे। प्रत्यक्षदर्शी नैन सिंह राजपुरोहित ने बताया- जब आग चौथे फ्लोर पर पहुंची तो यह रसोई तक पहुंच गई। ऐसे में, यहां 1 सिलेंडर ब्लास्ट हो गया। इससे मदन सिंह की पत्नी संगीता, दोनों बेटे जिंदा जल गए।
रास्ता सकरा होने से आई परेशानी प्रत्यक्षदर्शी मदनलाल खत्री ने बताया- नगरपेट इलाके की तंग गली में यह इमारत थी। इसमें गोदाम और दुकानें थीं। यहां तक पहुंचने का रास्ता बहुत सकरा है। सामान्य हालत में ही गली से निकलना मुश्किल होता है। ऐसे में आग लगने के बाद फायर ब्रिगेड को आने में कई घंटे की मशक्कत करनी पड़ी। महज चार फीट की गली में दुकानदार सामान रख देते हैं। ऐसे में आने-जाने के लिए 2 फीट की जगह रह जाती है।

बेंगलुरु में नगरपेट इलाके की तंग गलियों में बिल्डिंग तक पहुंचने में फायर ब्रिगेड को मशक्कत करनी पड़ी।
इसी वजह से आग ने विकराल रूप ले लिया। सब कुछ खाक हो गया। फायर-ब्रिगेड की 18 दमकलें आईं, लेकिन तब तक पूरा परिवार खत्म हो चुका था। शनिवार दोपहर तक मकान से धुआं उठता रहा। राहत और बचाव कार्य बेहद कठिन हो गया था।
रानीवाड़ा का व्यापारी गोदाम में सो रहा था, दम घुटा इसी बिल्डिंग रानीवाड़ा (जालोर) के भादरूणा गांव का युवक सुरेश कुमार पुत्र मफतलाल खत्री भी था। सुरेश कुमार दूसरी मंजिल पर अपने गोदाम में सो रहा था। आग लगने के बाद तेजी से धुआं फैला। दम घुटने से सुरेश की भी मौत हो गई। सुरेश कुमार ने 11वीं और 12वीं की पढ़ाई रानीवाड़ा में की थी। उसका परिवार भादरूणा गांव में ही रहता है।

3 दिन पहले ताऊजी का निधन हुआ 3 दिन पहले बेंगलुरु में ही सुरेश के ताऊजी का निधन हो गया था। शनिवार को उनके बेंगलुरु स्थित आवास पर तीये की बैठक रखी गई थी। इस दौरान परिवार को भतीजे सुरेश की अग्निकांड में मौत की सूचना मिली तो पूरा परिवार सदमे में आ गया।
मदनलाल खत्री ने बताया- जब मैंने बैठक के समय के बारे में पूछने के लिए सुरेश के ताऊजी के घर कॉल लगाया तो उन्होंने कहा- बैठक क्या रखें, हमारे घर तो बड़ी घटना घट गई है। यह सुनकर मैं स्तब्ध रह गया।
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