प्रदेश में इस बार मानसून मेहरबान रहा। प्रदेश के कई बांधों में जुलाई में ही चादर चलने लग गई थी। लेकिन, चित्तौड़गढ़ से 35 किलोमीटर दूर बस्सी डैम जहां किसानों के लिए बड़ा बांध बना हुआ है। इसकी खास बात ये भी है कि ये जंगलों के बीच बना है, जो बस्सी वाइल्ड
पिछले 10 साल यानी साल 2016 से लेकर अब सात बार ये ओवरफ्लो हो चुका है। मानसून के समय इस बांध पर तीन से चार बार चादर चलने लगती है।
39 साल पहले साल 1986 में इस बांध को केवल किसानों के लिए बनाया गया था। आज इसके आस-पास के 17 गांव के 8 हजार से ज्यादा किसान परिवारों को इसका फायदा मिलता है।
देखिए बांध की खूबसूरती…

तस्वीर ड्रोन से ली गई है, इसमें प्राकृतिक नजारे देखने लायक हैं।

ऊंचाई से बांध और हरियाली का अद्भुत संगम नजर आता है।

तस्वीर, बांध की पाल की है, जहां और पानी दूसरी तरफ हरियाली नजर आ रही है।

चट्टानों के बीच से बहता हुआ पानी बेहद लुभावना लग रहा है।
इस बार औसत से 78 प्रतिशत ज्यादा बारिश, तीन बार नहीं चली चादर
जल संसाधन के एक्सईएन राजकुमार शर्मा ने बताया कि जिले में एक जून से 588.08 MM बारिश हुई। जो औसत का 78.41 प्रतिशत है। जिले का औसत 750 MM माना जाता है। वहीं पिछले 10 साल में तीन बार बांध ओवरफ्लो नहीं हुआ है। जबकि सात बार इस बांध पर चादर चल चुकी है।
साल 2016 में 8 अगस्त, 2017 में 30 जुलाई, 2018 में 25 सितंबर, 2021 में 14 सितंबर, 2022 में 30 जुलाई, 2024 में 5 सितम्बर, 2025 में 2 जुलाई में ओवरफ्लो हुआ था। वहीं साल 2019, 2020 और 2023 में इस बांध पर चादर नहीं चली थी। वहीं इस बार इस बांध पर 1 जून से लेकर 14 अगस्त तक 848 एमएम बारिश हो चुकी है।

बारिश के बाद पूरे इलाके में हरियाली छाई है।
3 हजार हेक्टेयर में होती है ,42 किलोमीटर लंबी नहर से पहुंचाता है पानी
बस्सी डैम की कुल भराव क्षमता 23.20 मिलियन क्यूबिक मीटर है। इसका डूब क्षेत्र 459 हेक्टेयर में फैला हुआ है। वहीं सिंचित क्षेत्र 3250 हेक्टेयर है, जिससे लगभग 17 गांवों की खेती को पानी मिलता है। इस डैम से कुल लाभान्वित क्षेत्र 5901 हेक्टेयर में फैला हुआ है। डैम का जल संग्रहण क्षेत्र 453.20 वर्ग किलोमीटर है, जहां से पानी एकत्र होकर डैम में आता है। इसके साथ ही, खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए करीब 42 किलोमीटर लंबी नहरें बनाई गई हैं।

ड्रोन से ली गई तस्वीर में प्रकृति का अद्भुत नजारा बेहद खूबसूरत नजर आ रहा है।
चारों तरफ अरावली पहाड़ियों की रेंज, मानसून डेस्टिनेशन में शामिल
डैम के पास मुख्य द्वार मिट्टी से बना हुआ है, जिस पर 20 फीट चौड़ी और लगभग 300 मीटर लंबी दीवार बनी है। इस दीवार पर सड़क भी है, जिससे लोग डेम के चारों ओर घूम सकते है। बरसात के मौसम में यहां के लोगों के लिए सबसे बेहतर मानसून डेस्टिनेशन है।
इस बांध के चारों तरफ अरावली पहाडियों की रेंज है। अरावली की पहाड़ियों के बीच करीब 1500 हेक्टेयर में वन क्षेत्र फैला हुआ है, जो बारिश के बाद इसकी खुबसूरती बढ़ा देता है।
इन गांवों को होता है फायदा- बस्सी, पालका, मेघपुरा, सुवावा, जयसिंहपुरा, दहीखेड़ा, दुवावा, छापिया खेड़ी, सोनगर बिहारीपुरा, लक्ष्मीपुरा, प्रतापपुरा, नेगड़िया, घोसुण्डी, सोनगरों की खेड़ी, बल्दरखा और आंवलहेड़ा जैसे गांव शामिल हैं। इन गांवों के किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलना एक बड़ी राहत है, जिससे उनकी खेती में सुधार हुआ है और फसल उत्पादन बढ़ा है।
ड्रोन क्रेडिट: आशुतोष दाधीच
Discover more from Kuchaman City Directory
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
Comments