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बारां में शुरू होने के इंजतार में फूड सेफ्टी लैब।
बारां जिले में मिलावटखोरी पर कार्रवाई के लिए आवश्यक फूड सेफ्टी लैब डेढ़ साल से तैयार होने के बावजूद शुरू नहीं हो पाई है। 90 लाख रुपए की लागत से निर्मित भवन और उपकरण मौजूद हैं, लेकिन फूड सेफ्टी ऑफिसर के दोनों स्वीकृत पद रिक्त होने से लैब का संचालन नही
वर्तमान में बारां जिले से एकत्रित खाद्य पदार्थों के सैंपल जांच के लिए कोटा भेजे जा रहे हैं। इससे रिपोर्ट मिलने में देरी हो रही है और जिले में मिलावटखोरों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
स्वास्थ्य विभाग के अधीन संचालित खाद्य सुरक्षा विभाग में एक पद लंबे समय से खाली है। दूसरे पद पर कार्यरत अधिकारी को एक साल पहले एपीओ कर दिया गया था। अब कोटा के एक एफएसओ को बारां का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। स्वास्थ्य भवन परिसर में करीब 5 हजार वर्ग फीट में फूड सेफ्टी लैब का भवन तैयार है। इसके लिए लाखों रुपए की मशीनरी और उपकरण भी उपलब्ध हैं, लेकिन सरकार द्वारा स्वीकृत स्टाफ नियुक्त न होने से लैब का संचालन शुरू नहीं हो सका है।
साल 2023-24 में अधिकारी के पदस्थ रहने के दौरान अधिक सैंपलिंग होने से मिलावटखोरों में खलबली मची थी। अब कार्रवाई न होने से मिलावटखोर फिर से सक्रिय हो गए हैं। आगामी त्यौहारी सीजन में अधिकारी और अन्य स्टाफ की नियुक्ति न होने पर मिलावट रोकने का अभियान महज खानापूर्ति साबित होगा।
आयुक्तालय से होगी स्टाफ की नियुक्ति फूड सेफ्टी लैब के लिए 8 से दस अधिकारी और कर्मचारियों के स्टाफ की जरूरत है। इसमें एक फूड एनालिस्ट, एक कम्प्यूटर ऑपरेटर, दो फूड इंस्पेक्टर, 6 तकनीशियन, बायोकेमिस्ट्री, दो सहायक कर्मचारियों की आवश्यकता होगी। इन्हें जयपुर फूड आयुक्तालय से नियुक्त किया जाएगा। साथ ही लैब के लिए पोर्टेबल ऑटोक्लेव, बोर्ड इन्क्यूबेटर, क्लीन एयर बॉयोलॉजिकल केबिनेट, वाटर टैंक, सिंक, आई वॉश पम्प, रेफ्रिजरेटर, डिजिटल बैलेंस, हाई डिस्क ड्राइव, डिजिटल रिफ्रेक्टोमीटर, जीपीएस ट्रैकर, टीवी, कम्प्यूटर और प्रिंटर सहित 24 उपकरण स्थापित किए जाएंगे।
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