गुजरात में रेप केस के मामले में सजा काट रहे आसाराम को गुजरात हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। बुधवार को आसाराम की ओर से अंतरिम जमानत अवधि बढ़ाने की याचिका पर सुनवाई हुई। इसमें कोर्ट ने अंतरिम जमानत बढ़ाने से इनकार कर दिया। हालांकि, आसाराम की ओर से गुज
उल्लेखनीय है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने भी जोधपुर केस में सजायाफ्ता आसाराम की अंतरिम जमानत बढ़ाने से इनकार कर दिया था। आसाराम को जोधपुर सेंट्रल जेल में सरेंडर करने के निर्देश दिए थे। इससे पहले आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से 29 अगस्त तक की अंतरिम जमानत मिली हुई थी। कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद आसाराम ने 30 अगस्त की सुबह 11 बजे जेल में सरेंडर कर दिया था।

मेडिकल रिपोर्ट में ‘सेहत गंभीर नहीं’
राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देश पर सिविल हॉस्पिटल (अहमदाबाद) प्रशासन ने मेडिकल बोर्ड गठित कर आसाराम के स्वास्थ्य की जांच की थी। इसकी रिपोर्ट राजस्थान हाईकोर्ट को ईमेल से भेजी गई थी। इसके बाद सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा- सिविल हॉस्पिटल की मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार- आसाराम की सेहत इतनी गंभीर नहीं है कि उसकी अंतरिम जमानत को बढ़ाया जाए। हालांकि कोर्ट ने जेल में आसाराम को व्हील चेयर की सुविधा और एक सहायक उपलब्धता की छूट दी है। इसके साथ ही जरूरत पड़ने पर जोधपुर एम्स में जांच करवाई जा सकती है।
गुजरात हाईकोर्ट में आज क्या हुआ
गुजरात हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम की अंतरिम जमानत को मेरिट के आधार पर नहीं बढ़ाया है। अगर राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, तो उसके फैसले का इंतजार करें। गुजरात हाईकोर्ट एक ही मेडिकल रिपोर्ट पर अलग रूख कैसे अपना सकता है? इसके बाद हाईकोर्ट ने आसाराम की जमानत नहीं बढ़ाई।
हालांकि, अंतरिम जमानत बढ़ाने की अर्जी पर सुनवाई के दौरान आसाराम के वकील ने कहा कि वे जोधपुर में कोर्ट के आदेश के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सिविल हॉस्पिटल के मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर गौर किया जाना चाहिए। आसाराम की तबीयत बिगड़ रही है। लेकिन आरटीआई में मिली जानकारी के मुताबिक जरूरी रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई है। आसाराम आज भी बीमार हैं।
वहीं, पीड़िता के वकील ने दलील दी है कि गुजरात हाईकोर्ट को राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश की समीक्षा नहीं करनी चाहिए। राजस्थान हाईकोर्ट ने नहीं माना कि आसाराम की तबीयत लगातार बिगड़ रही है।
गुजरात हाईकोर्ट ने चार बार बढ़ाई जमानत
इससे पहले 27 जून को गुजरात हाईकोर्ट ने जमानत 07 जुलाई तक बढ़ा दी थी। उसके बाद 03 जुलाई को 01 महीने के लिए और तीसरी बार 7 अगस्त 2025 को जमानत बढ़ाई गई थी। हाईकोर्ट ने चौथी बार 19 अगस्त को जमानत 3 सितंबर तक बढ़ा दी थी।

18 अगस्त को अहमदाबाद सिविल अस्पताल में मेडिकल जांच
जोधपुर हाईकोर्ट के आदेश के बाद आसाराम को 18 अगस्त 2025 की सुबह जांच के लिए अहमदाबाद सिविल अस्पताल लाया गया था। निजी अंगरक्षकों के काफिले के साथ आए आसाराम के ओपीडी और ट्रॉमा सेंटर में जांच के दौरान मरीजों और उनके परिजनों को करीब तीन से चार घंटे तक परेशान होना पड़ा।
इससे पहले आसाराम की गाड़ी को गलत साइड से ट्रॉमा सेंटर के गेट पर ले जाने के कारण आठ एंबुलेंस में सवार मरीजों को बीस मिनट तक इंतजार करना पड़ा। आसाराम के निजी अंगरक्षकों ने दो घंटे तक ट्रॉमा सेंटर के दरवाजे अन्य मरीजों के लिए बंद कर दिए। जबकि ओपीडी भी ढाई घंटे तक बंद रही। इतना ही नहीं साधकों ने मीडियाकर्मियों के साथ हाथापाई भी कर दी थी।

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