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केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत राजस्थान में करीब 50 हजार लोगों को ऋण स्वीकृत हुए हैं। योजना में सबसे ज्यादा पंजीकरण वाले राज्यों में राजस्थान चौथे स्थान पर है। जबकि कर्नाटक पहले स्थान पर हैं।
महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश व आंध्र प्रदेश जैसे राज्य टॉप पांच में शामिल है। इनमें राजस्थान के सबसे ज्यादा बढ़ई, सुथार का काम करने वालों ने पंजीकरण करवाया है। जबकि कर्नाटक में राजमिस्त्री, महाराष्ट्र में दर्जी, मध्यप्रदेश में माला बनाने वाले और आंधप्रदेश में सबसे ज्यादा मोची श्रेणी में पंजीकरण करवाने वाला राज्य है।
योजना में अलग–अलग प्रकार के 18 ट्रेड शामिल किए गए हैं। दो किस्तों में तीन लाख की ऋण सुविधा दी जाती है।राजस्थान में सुथार का काम करने वालों के बाद राजमिस्त्री, फुटवीयर डिजाइनिंग व जूते बनाने के कारीगरों को लाभ मिला है। जबकि कुछ अन्य छोटे पारंपरिक व्यवसायों को अभी कम संख्या में ऋण स्वीकृत हुए हैं। स्वीकृत ऋणों की संख्या के आधार पर सुथार, बढ़ई का काम करने वाले 12,836 लोगों को ऋण स्वीकृत हुआ है। दूसरे स्थान पर राजमिस्त्री है। ऐसे 9,185 लोगों को ऋण स्वीकृत किया गया है।
भवन निर्माण गतिविधियों की बढ़ती मांग के कारण इस वर्ग की भागीदारी उल्लेखनीय है। तीसरे स्थान पर जूते निर्माण से जुड़े 6,716 कारीगरों को ऋण स्वीकृत हुआ है। वहीं, अन्य प्रमुख लाभार्थियों में मूर्तिकार 4,542 और नाई 3,621 शामिल हैं। इनके अलावा कुम्हार 2,569, माला बनाने वाले 2,441, सुनार 2,392 और 2,259 दर्जी का काम करने वालों को ऋण मिला है। सबसे कम ऋण 15 की संख्या के साथ नाव बनाने वाले कारीगरों को मिले हैं। वहीं, अस्त्र शस्त्र बनाने वाले 86 कारीगरों व 114 ताला बनाने वाले कारीगरों को ऋण स्वीकृत हुए हैं। इसी तरह 497 धोबी और 566 चटाई व झाड़ू बनाने वालों को अपने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए ऋण सुविधा दी गई है।
स्वीकृत ऋण की तुलना में ज्यादा पंजीकरण
योजना के तहत 18 ट्रेड में पंजीकरण की सुविधा है। सबसे ज्यादा पंजीकरण सुथार, बढ़ई श्रेणी में हुआ है। आंकड़ों के अनुसार यह संख्या 45 हजार से ज्यादा है। मगर ऋण दस हजार लोगों को भी नहीं मिल पाया है। इसके बाद 38 हजार से ज्यादा पंजीकरण राज मिस्त्री श्रेणी में है। तीसरे स्थान पर जूते निर्माण से जुड़े 25 हजार से ज्यादा कारीगरों ने लोन लेने के लिए आवेदन किए हैं।
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