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अलवर के ईसाई मिशनरी हॉस्टल में पढ़ाई के नाम पर चल रहे धर्मांतरण के खेल में पुलिस के सामने चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। SP सुधीर चौधरी ने बताया- मास्टरमाइंड ने एक हॉस्टल को अपना ठिकाना बना रखा था। यहां अच्छी शिक्षा देने के नाम पर बच्चों का धर्मांतर

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ईसाई मिशनरी हॉस्टल में 50 बच्चे रहते थे, जिनमें से 15 राजपूत, 15 सिक्ख और 20 एससी के बच्चे हैं। आरोपी ने सभी बच्चों को बाइबल पढ़ने को दी। ईसा मसीह की कहानी सुनाया करता था। दूसरे धर्मों की कमियां बताते थे। इसका इतना प्रभाव हुआ कि बच्चे खुद कहते हैं कि हम भगवान को नहीं मानते हैं। ईशु ही भगवान है। हम रोजाना सुबह-शाम प्रार्थना भी करते हैं।

अलवर पुलिस ने ईसाई मिशनरी हॉस्टल पर छापा मारकर मास्टरमाइंड और उसके साथी को गिरफ्तार किया है। मुख्य आरोपी धर्म परिवर्तन के मामले में सीकर में भी पकड़ा गया था। वहां से जमानत पर छूटकर अलवर आया था। मामला अलवर शहर से केवल 8 KM दूर एमआईए थाना क्षेत्र का है।

पुलिस ने मास्टरमाइंड अमृत सिंह और उसके साथी सोनू रायसिख को गिरफ्तार किया है।

पुलिस ने मास्टरमाइंड अमृत सिंह और उसके साथी सोनू रायसिख को गिरफ्तार किया है।

सीकर में भी धर्म परिवर्तन मामले में पकड़ा गया था SP सुधीर चौधरी ने कहा- जिले में कुछ जगहों पर गरीब बच्चों को धर्म से संबंधित गलत बात सिखाकर धर्म परिवर्तन करवाने का मामला सामने आया है। सैय्यद कॉलोनी में ईसाई मिशनरी हॉस्टल में छापा मारकर अहमदाबाद के रहने वाले अमृत सिंह और रामगढ़ (अलवर) के रहने वाले सोनू रायसिख को गिरफ्तार किया है।

उन्होंने कहा- अगस्त महीने में ईसाई धर्म गुरु सेल्वाराज उर्फ सेल्बुराज ने कुछ लोगों का धर्म परिवर्तन कराया था। अमृत सिंह भी उसमें शामिल था। सीकर पुलिस ने उसे पकड़ लिया था। जमानत पर बाहर आया तो अलवर आकर रहने लगा था। अब उसकी सीकर से बेल कैंसिल कराएंगे।

एसपी ने कहा- अन्य जगहों पर जो भी लोग धर्मांतरण में शामिल मिलते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। हॉस्टल से एक धर्म से जुड़े धार्मिक ग्रंथ और किताबें जब्त की है।

हॉस्टल में थे दिल्ली, हनुमानगढ़ और अलवर के बच्चे आरोपी अमृत सिंह अलवर के एमआई थाना क्षेत्र की सैय्यद कॉलोनी में ईसाई मिशनरी हॉस्टल का संचालन कर रहा था। ये गरीब बच्चों को हॉस्टल में रखता था। वर्तमान में 50 बच्चे रह रहे थे। बच्चों को साधारण भाषा में दूसरे धर्म की कमियां बताता था और ईसाई धर्म की तारीफ करता था। संभावना है कि धर्म परिवर्तन के लिए बच्चों के माता-पिता की आर्थिक मदद करता हो। हॉस्टल में 15 राजपूत, 15 सिक्ख और 20 एससी के बच्चे रहते हैं।

आरोपी अमृत सिंह ने पूछताछ में कहा- हम धर्मांतरण नहीं कराते थे। बच्चों को संभालते थे। ये दिल्ली, हनुमानगढ़ और अलवर के बच्चे हैं। मेरे बच्चे देहरादून में पढ़ते हैं। वहां 80 हजार रुपए फीस जाती है। मैं हिंदू हूं। केवल ईसाई धर्म का प्रचार किया है। हम ईसा मसीह की कहानी सुनाते हैं। जो बाइबल में लिखा है, वही कहानी सुनाई है। कोई भी पढ़ सकता है।

एसपी ने बताया- आरोपी पहले खुद गरासिया था और धर्म परिवर्तन कर लिया था। इसके बाद दूसरों का धर्म परिवर्तन करवाने लगा है। पुलिस आरोपी के खातों में पैसे कहां से आते थे। सैलरी कितनी और कहां से मिलती थी। बच्चों को कैसे महंगे स्कूल में पढ़ाते थे। हॉस्टल में डिजिटल और प्रिंटेड मटेरियल मिला है। सीनियर अधिकारी पूरी जांच करेंगे। इस केस को ऑफिसर स्कीम में लेंगे।

ईसाई मिशनरी हॉस्टल, जहां पढ़ाई के नाम पर बच्चों का धर्मांतरण करवाया जा रहा था।

ईसाई मिशनरी हॉस्टल, जहां पढ़ाई के नाम पर बच्चों का धर्मांतरण करवाया जा रहा था।

आगे पढ़िए क्या बोले बच्चे और अभिभावक अलवर शहर में चिकानी से आगे महरमपुर गांव से आए राजेंद्र सिंह ने कहा- उनका बेटा हॉस्टल में रहता है। 2022 में मुबारिकपुर के अवतार सिंह हमारे संपर्क में आए थे। वो हमारे घर भी आए थे। उनके साथ बख्तल के पास बड़ी चर्च में गए थे। वहां हर चीज अच्छी लगी। अब तो बाइबल खुद पढ़ते हैं। मैं तो सिख हूं, लेकिन बाइबल के हिसाब से कोई जाति नहीं होती है। बाइबल में ऐसा कुछ नहीं है। मैं हिंदू हूं, लेकिन बाइबल को मानता हूं। मैंने घर में 4 साल से पूजा पाठ बंद कर दिया। पहले हमें रेडियो पर सुनाया जाता था।

बच्चा बोला- मेरे दादा-दादी भी ईसाई धर्म मानते हॉस्टल में रह रहे एक अन्य बच्चे ने कहा- मेरे दादा-दादी ही ईसाई धर्म को मान रहे हैं। हम भगवान को नहीं मानते हैं। ईशु ही भगवान है। हम रोजाना सुबह-शाम प्रार्थना भी करते हैं।

दूसरे बच्चे ने कहा – पिता ड्राइवर, मां मजदूरी कर रही रामगढ़ के पास रहने वाले बच्चे ने कहा- मेरे पिता ट्रक चलाते हैं। मां मजदूरी करती हैं। मुझे हॉस्टल में पांच साल हो गए हैं। मेरे भाई को 2 महीने हो गए हैं। रोजाना प्रार्थना करते हैं।

ईसाई मिशनरी हॉस्टल में पुलिस ने छानबीन की। इसके बाद यहां पर कॉपियां बिखरी नजर आई।

ईसाई मिशनरी हॉस्टल में पुलिस ने छानबीन की। इसके बाद यहां पर कॉपियां बिखरी नजर आई।

महिला बोली- साल के 3 हजार रुपए दे रहे हॉस्टल में बच्चे को लेने आई एक महिला ने कहा- हम हर साल पढ़ाई के 3 हजार रुपए देते हैं। हमारी मर्जी से भेजा है। हम पति-पत्नी नौकरी करते हैं और दोनों बच्चे यहां रहते हैं। हर रविवार को यहां मिलने आते हैं। हम चाहते हैं कि हमारा बच्चा पढ़-लिखकर नौकरी लगे, इसलिए यहां भेज रहे हैं।

हॉस्टल के पड़ोस में रह रहा व्यक्ति बोला- इनकी प्रार्थना समझ नहीं आती हॉस्टल के पास के मकान में रह रहे पप्पू ने कहा- यह छात्रावास करीब 5 साल से चल रहा है। यहां बच्चे पास के स्कूल में भी जाते हैं। सुबह शाम प्रार्थना करते हैं। उनकी प्रार्थना ज्यादा समझ नहीं आती है। रविवार को इनके माता-पिता आते हैं। फिर कीर्तन करते हैं। हमने हमारे बच्चों को पढ़ाने को कहा तो बोले- हम दूर के बच्चे ही पढ़ाते हैं। यहां टीचर भी रुकते हैं। दिन में बच्चे बाहर कम दिखते हैं।

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हॉस्टल में सिखा रहे थे-भगवान को मानोगे तो नर्क जाओगे:मूर्ति को पानी में डालकर कहते ये डूबती है, क्रॉस नहीं; पुलिस को देख दीवार कूदने लगे बच्चे

अलवर में धर्म परिवर्तन के आरोप में पुलिस ने एक हॉस्टल में छापेमारी की है। पुलिस को देखकर बच्चे हॉस्टल की दीवार कूदकर भागने लगे। पुलिसवाले दीवार पर चढ़े बच्चों को काफी देर तक समझाते रहे कि वो यहां उनके लिए आए हैं, डरो मत, नीचे आ जाओ। यहां रह रहे बच्चों ने बताया कि उन्हें सिखाया जाता था कि- भगवान को मानोगे तो नर्क में जाओगे। पूरी खबर पढ़ें



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