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आरोप है कि वकीलों ने तहसीलदार से मारपीट की और मोबाइल छीनने की कोशिश की।

दौसा के लालसोट तहसील कार्यालय में मंगलवार दोपहर जमकर हंगामा हुआ। वकील नारेबाजी करते हुए तहसीलदार के चैंबर में घुसे। आरोप है कि वकीलों ने तहसील ऑफिस में घुसकर तहसीलदार के साथ मारपीट की। इधर, वकीलों ने भी तहसीलदार पर अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया है

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इधर, तहसीलदार राजस्व कर्मियों के साथ थाने रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचे। रिपोर्ट दर्ज नहीं होने पर तहसीलदार अन्य कर्मियों के साथ थाने के बाहर धरने पर बैठ गए।

वकील नारेबाजी करते हुए तहसीलदार के ऑफिस में घुसे।

वकील नारेबाजी करते हुए तहसीलदार के ऑफिस में घुसे।

नारेबाजी करते हुए घुसे वकील-तहसीलदार

तहसीलदार अमितेश मीणा ने कहा-मंगलवार दोपहर 3 बजकर 40 मिनट के करीब में अपने ऑफिस में बैठा हुआ था। मेरे साथ कुछ किसान भी थे। इस दौरान बार संघ के अध्यक्ष प्रेम स्वरूप लामडा वकीलों के साथ में मेरे चैंबर में घुसे। ये सभी लोग नारेबाजी करते हुए आ रहे थे। आते ही उन्होंने मेरे साथ छीना झपटी और मारपीट शुरू कर दी।

मैंने वीडियो बनाने की कोशिश की तो एडवोकेट अशोक चौधरी ने मेरा मोबाइल छीन लिया। मेरी टेबल पर जो सामान रखा था उसे नीचे बिखेर दिया। दस्तावेजों को फाड़ दिया। मेरा स्टाफ बचाने के लिए आया तो उनके साथ मारपीट की। मोबाइल छीन लिए, कपड़े फाड़ दिए। पूरा बार संघ यहां था। पीछे के गेट से निकलकर मैंने अपनी जान बचाई। उच्चाधिकारियों को मैंने सूचना दे दी है।

अभद्रता करने पर बाहर भिजवाया-तहसीलदार

विवाद क्या था, इस पर तहसीलदार ने कहा-सुबह दो-तीन कोर्ट के स्टे के आदेश की कॉपी लेकर आए थे। मैंने उनसे कहां था कि या तो प्रार्थना पत्र लिख दो या कोर्ट से डायरेक्ट लिखवा लाओ। जिसके बाद वें अनर्गल बाते करने लगे। मैंने उनको समझाया की ये एक प्रक्रिया है। इसके बाद वे मुझ पर मिलीभगत का आरोप लगाने लगे। मैंने अपने गार्ड को उन सभी को दस्तावेजों के साथ बाहर भेजने के लिए कहा। इस बात पर वे नाराज हो गए और सभी को इकट्ठा कर लिया। बाहर के वकीलों को इसके बारे में पता नहीं था, लेकिन वे उन तीन वकीलों जिनमें गोविंद शर्मा और मोहित शर्मा शामिल है, उनकी बातों में आ गए।

मुकदमा दर्ज नहीं होने पर थाने के सामने धरने पर बैठे तहसीलदार।

मुकदमा दर्ज नहीं होने पर थाने के सामने धरने पर बैठे तहसीलदार।

दो घंटे से थाने पर बैठे लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं हुआ-तहसीलदार

तहसीलदार ने कहा-हम दो घंटे से थाने में बैठे है। कार्यपालक मजिस्ट्रेट के साथ ये स्थिति है कि दो घंटे से बैठे है और मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। पता नहीं कहां से ये थाना चल रहा, कहां से मुकदमा दर्ज करने के आदेश जारी हो रहे हैं। मेरे कोई अधिकारी बात करने के लिए कहते हैं तो मैं उनसे कहू्ंगा कि मेरा जमीर इतना मरा नहीं है। मैं किसी के सामने झुकने वाला नहीं हूं। अगर मुकदमा दर्ज नहीं होता है तो हम यहीं सोएंगे।

बार एसोसिएशन के वकीलों ने तहसील परिसर में जमकर नारेबाजी की।

बार एसोसिएशन के वकीलों ने तहसील परिसर में जमकर नारेबाजी की।

ट्रांसफर और कार्रवाई करने की मांग- बार एसोसिएशन अध्यक्ष

इधर, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेम स्वरूप लामडा ने कहा-हमारे दो वकीलों ने एसडीएम कोर्ट से स्टे जारी करवाया था। आदेश को लेकर अपने क्लाइंट के साथ वे तहसीलदार के ऑफिस में गए थे। तहसीलदार ने कार्रवाई करने से मना कर दिया। तहसीलदार का इरादा दूसरा था। तहसीलदार की तरफ से पैसे मांगे गए। हमारे वकीलों ने पैसा देने से इनकार कर दिया। इसके बाद तहसीलदार ने गार्ड से धक्के दिलाकर वकीलों को बाहर निकलवाया। हम तहसीलदार को सस्पेंड करने की मांग करते हैं। साथ ही तहसीलदार का ट्रांसफर करने और मुकदमा दर्ज कराने की मांग करते है।

मामला बढ़ता देख अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दिनेश अग्रवाल, डिप्टी एसपी दिलीप मीणा, अतिरिक्त जिला कलेक्टर मनमोहन मीना, उपखंड अधिकारी विजेंद्र मीणा थाने पहुंचे।



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