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15 साल से फरार चल रहा 5 लाख रुपए का इनामी कुख्यात अपराधी प्रवीण उर्फ लाला को आखिरकार पुलिस ने दबोच लिया। राजस्थान पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) ने उसे गाजियाबाद से गिरफ्तार किया है।

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सीबीआई ने प्रवीण पर 5 लाख रुपए का ईनाम घोषित किया था। प्रवीण उर्फ लाला, निवासी नला बाजार कामां, 2010 में जिला एवं सत्र न्यायाधीश रामेश्वर दयाल रोहिल्ला के घर में घुसकर हमला करने और उनके पिता खेमचंद रोहिल्ला व भाई गिर्राज प्रसाद की नृशंस हत्या का मुख्य आरोपी है।

हत्याकांड के बाद शुरुआत में राजस्थान पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। इसके बाद मार्च 2011 में हाईकोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंप दी। सीबीआई ने केस में प्रवीण उर्फ लाला, परसराम, डालचंद और पदम सिंह को अभियुक्त माना। वर्ष 2012 में डालचंद और पदम सिंह गिरफ्तार हो गए। लेकिन प्रवीण और उसका भाई परसराम फरार रहे। सीबीआई ने दोनों की गिरफ्तारी पर 5-5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।

गिरफ्तारी में समय लगा तो 25 हजार से बढ़ाकर इनाम किया 5 लाख

गाजियाबाद में पकड़ा कुख्यात प्रवीण

‘लक्ष्मण’ बनकर 8 साल से रह रहा था.. एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स के इंस्पेक्टर सुभाष सिंह तोमर ने बताया कि 15 साल से फरार कुख्यात आरोपी प्रवीण उर्फ लाला को गिरफ्तार कर बड़ा खुलासा किया। प्रवीण ने अपनी पहचान छिपाने के लिए खुद को ‘लक्ष्मण’ बता दिया था और लोगों को कहानी सुनाता कि गुजरात ट्रेन हादसे में मां की मौत हो गई। आरोपी ने 8 साल पहले गाजियाबाद निवासी नीतू उर्फ बाला से शादी कर तीन बच्चों के पिता बन गया। पत्नी नीतू के नाम से मकान व दुकान खरीद ली गई। गाजियाबाद में ही आरोपी लैपटॉप रिपेयरिंग की दुकान चला रहा था। गाजियाबाद में उसके भाई के साथ रहता था।

1 महीने तक की पड़ताल फिर किया गिरफ्तार

एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स के इंस्पेक्टर सुभाष सिंह तोमर ने कहा कि कुख्यात प्रवीण उर्फ लाला का दो साल से तलाश कर रहे थे। 1 महीने पहले फोटो दिखाने के बाद पता चला कि यह व्यक्ति प्रवीण नहीं है, लक्ष्मण है, जो गाजियाबाद में लैपटॉप रिपेयरिंग का कार्य करता है। टीम के सदस्यों को एक महीने पहले तलाश करने के लिए रवाना किया। टीम ने घर-घर पहुंचकर आरोपी के संदर्भ में गोपनीय तरीके से पूछताछ की एवं दस्तावेजों की जांच करते हुए तकनीकी साक्ष्य एकत्रित किए गए।

आखिरकार शुक्रवार करते स्थानीय पुलिस को साथ लेकर गाजियाबाद में टीम ने आरोपी को घर पर पहुंचकर पकड़ लिया। प्रवीण ने खुद को ‘लक्ष्मण’ बताया, मकान और दुकान भी उसी नाम से चलाए, शादी कर बच्चों के साथ छुपा रहा। चार घंटे की कड़ी पूछताछ में प्रवीण ने अपनी असली पहचान स्वीकार की। उसका भाई अभी भी फरार है।

हत्या के बाद से था फरार

दरअसल, 29 जुलाई 2010 को भरतपुर जिले के कामां में तत्कालीन जिला एवं सत्र न्यायाधीश रामेश्वर दयाल रोहिल्ला के परिवार पर हमला किया गया था। पुरानी रंजिश के चलते परसराम, डालचंद, प्रवीण उर्फ लाला और बबलू ने फायरिंग कर जज के पिता खेमचंद रोहिल्ला और भाई गिर्राज प्रसाद की हत्या कर दी थी। इस हमले में उनके भाई एडवोकेट राजेंद्र प्रसाद रोहिल्ला, प्रमिला और अंजू भी गोली लगने से घायल हुए थे। इस हत्याकांड का मुख्य आरोपी प्रवीण उर्फ लाला था, जो हत्या के बाद से फरार था।

हाईकोर्ट ने 2011 में सीबीआई को सौंपी थी जांच

राजस्थान पुलिस की ओर से 25 हजार रुपए का इनाम घोषित किए जाने के बावजूद आरोपी प्रवीण उर्फ लाला पकड़ में नहीं आया। मार्च-2011 में हाईकोर्ट ने इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी थी। सीबीआई ने इस हत्याकांड में परसराम, प्रवीण उर्फ लाला, डालचंद और पदम सिंह को दोषी माना। इस हत्याकांड के 2 साल बाद आरोपी पदम सिंह और डालचंद पकड़े जा चुके हैं।



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