☜ Click Here to Star Rating



.

वीतरागी, सर्वज्ञ और हितोपदेशी भगवान की ओर से प्रतिपादित जिन धर्म केवलज्ञान रूपी लक्ष्मी युक्त हैं, जो धर्म धारण, पालन करने से मिलती है। धर्म का संग्रह और धन के संग्रह में अंतर होता है। धर्म संग्रह से पुण्य की वृद्धि होती है। क्योंकि धर्म मोक्ष का पथ प्रदर्शक है। धार्मिक मंडल विधान की प्रभावना से पुण्य मिलता हैं। आत्मा की प्रभावना संयम दीक्षा से होती है।

साधु समाधि के परम लक्ष्य को लेकर संयम धारण करते हैं। समता पूर्वक साधना को समाधि कहते हैं, इससे मरण भी सुमरन हो जाता हैं। यह मंगल प्रवचन सोलह कारण भावना पर्व पर राजकीय अतिथि दर्जा प्राप्त आचार्य वर्धमान सागर महाराज ने धर्मसभा में कहे। राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य ने आगे बताया कि आप लोग जन्मदिन मनाते हैं,वास्तव में साधु की दीक्षा लेते ही उसका नया जन्म प्रारंभ होता है। जितने वर्ष का जन्मदिन आप मनाते हो वास्तव में उतनी आयु आपकी कम होती जाती है। आयु हर पल हर क्षण कम होती है। जिंदगी भर आपका कार्य कैसा रहा है? इसकी परीक्षा मृत्यु अथवा संल्लेखना समाधि के समय होती है। प्रथमाचार्य शांतिसागर महाराज गृहस्थ और साधु जीवन में शांति के सागर रहे। उन्होंने जीवन भर समता धारण कर अनेक उपवास कर उपसर्ग को समता से सहन किया। साधु के 10 प्रकार की विवेचना में आचार्य ने बताया कि साधु की सेवा वेयावृति करते समय उनके गुण ग्रहण अर्थात उनके समान वैराग्य धारण करने के भाव परिणाम रखना चाहिए। साधु की सेवा स्वाध्याय के समय आहार, विहार ,निहार, के समय श्रद्धा, प्रसन्नता, भक्ति, वात्सल्य एवं बिना ग्लानि के करना चाहिए, क्योंकि साधु परमेष्ठि धर्मतीर्थ होते हैं।

आचार्य के प्रवचन के पूर्व मुनि दर्शित सागर के उपदेश हुए। समाज के प्रवक्ता पवन कंटान और विकास जागीरदार ने बताया कि मुनि हितेंद्र सागर और चिंतन सागर महाराज के केशलोचन हुए। आगामी 22 और 23 जुलाई को विद्वत संगोष्ठी का आयोजन किया गया है। इसके लिए राज्य के मुख्यमंत्री, टोंक विधायक सहित अनेक राजनीतिक सामाजिक पदाधिकारियों के शुभकामना संदेश भी प्राप्त हो रहे हैं। बुधवार को आचार्य वर्धमान सागर महाराज की आहार चर्या का सौभाग्य बाबूलाल, पदमचंद, पवन कुमार, अनिल कुमार कंटान परिवार को प्राप्त हुआ। समाज के कमल सर्राफ व विकास अत्तर में बताया कि मंगलवार की आरती के पश्चात संथारा, संखलेना एवं जैन दर्शन पर आधारित फिल्म वीर गोमटश्वर बड़े पर्दे पर दिखाया गया। चातुर्मास व्यवस्था समिति के कार्यकारी अध्यक्ष धर्मचंद दाखिया, राजेश सर्राफ ने बताया की दसलक्षण महापर्व 28 अगस्त से 6 सितंबर होंगे।



Discover more from Kuchaman City Directory

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Comments

Leave a Reply

error: Content is protected !!

Sign In

Register

Reset Password

Please enter your username or email address, you will receive a link to create a new password via email.

Discover more from Kuchaman City Directory

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading