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महाबार के प्रसिद्ध धोरे अब विलुप्त हो रहे हैं, यहां सैकड़ों रोहिड़े के पेड़ काट कर कॉलोनियां बसाई जा रही है। (इनसेट में ) रोहिड़े के ठूंठ।
जहां थार महोत्सव को थार की रेत और संस्कृति को दिखाने के लिए आयोजित किया जाता है, अब उसी क्षेत्र के रेत के धोरे और सैकड़ों पेड़ भूमाफियाओं के लालच का शिकार हो रहे हैं। हर बार थार महोत्सव में महाबार के धोरों पर कार्यक्रम होता है। अब ये धोरे विलुप्त हो
प्रशासन की आंखों के सामने संस्कृति को नष्ट किया जा रहा है। यूआईटी ने आज दिन तक किसी कॉलोनी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। जबकि नोटिस के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर इतिश्री कर दी जाती है। जबकि कॉलोनी काटने के लिए यूआईटी से अनुमति लिया जाना जरूरी है। कृिष भूमि को ही भूमाफिया स्टाम्प पर खरीद कर बेच रहे हैं।
सैटेलाइट मैप से समझिए एक साल पहले यहां सैकड़ों रोहिड़े के पेड़ थे
सैटेलाइट मैप से समझिए, एक साल पहले सैकड़ों पेड़ थे, अब काट दिए महाबार के धोरे में जहां कॉलोनी काटी जा रही हैं, वहां रोहिड़े की सैकड़ों पेड़ हैं। शहर के नजदीक यह सबसे ज्यादा रोहिड़े के पेड़ वाला इलाका है, लेकिन अब राज्य पुष्प रोहिड़े के पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हो रही है। कृषि भूमि को बेचने के साथ ही इन पर सैकड़ों रोहिड़े के पेड़ काट दिए गए।प्रशासन की ओर से ऐसे लोगों के खिलाफ आज दिन तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
अवैध कॉलोनाइजर न सिर्फ प्राकृतिक टीलों (धोरों) को समतल कर रहे हैं, बल्कि पर्यावरण को बचाने वाले सैकड़ों रोहिड़े और खेजड़ी और अन्य पेड़ भी बेरहमी से काट रहे हैं। बिना किसी सरकारी अनुमति के खेती की जमीन पर प्लॉटिंग कर रहे हैं, जिससे थार की संस्कृति रेतीले धोरे खतरे में है। सैटेलाइट मैप में एक साल पूर्व की तस्वीर में हजारों पेड़ नजर आ रहे है, जबकि अब कॉलोनाइजर ने इन पेड़ों को काट दिया है।
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