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पंजाब में आई बाढ़ से बेहाल हजारों लोगों के लिए पहाड़ी उपखंड का भोजपुर गांव इंसानियत की मिसाल बना है। यहां महज 700 आबादी वाला यह छोटा-सा गांव अब 10 हजार बाढ़ पीड़ितों का सहारा बन रहा है। गांव के 53 लोग चार भट्टियों पर दिन-रात जुटकर खाने के पैकेट तैयार
दिन रात पैकेट तैयार करने में जुटे ग्रामीण
गांव की महिलाएं खाना पैक करने में जुटी हैं। बच्चे बोतलें और नमकीन के पैकेट सजाने में मदद कर रहे हैं। हर कोई अपनी क्षमता के अनुसार योगदान दे रहा है। अब तक करीब दस हजार लोगों के खाने की व्यवस्था की जा चुकी है।
हर घर से सहयोग, किसी ने आटा ताे किसी ने पैसा दिया
गांव में करीब 200 परिवार रहते हैं, जो ज्यादातर खेती-किसानी पर निर्भर हैं। इन परिवारों ने मिलकर बाढ़ पीड़ितों की मदद का संकल्प लिया। भोजपुर निवासी बलविंदर सिंह ने बताया—”हमारे किसी न किसी जानने वाले पंजाब में रहते हैं। उनके हालात जानकर चैन से बैठना मुश्किल था। इसलिए सबने तय किया कि जैसे भी हो, लोगों तक खाना पहुंचाना है। बाढ़ से पंजाब के करीब एक हजार गांव प्रभावित हैं।
दो गाड़ियों से ले जाएंगे सामग्री, गांवों में बांटने को 15 लोग भी साथ जाएंगे
ग्रामीणों ने उठाया पूरा खर्च… राहत सामग्री में पूरी-सब्जी, पानी की बोतलें, नमकीन, बिस्किट और ब्रेड शामिल हैं। करीब 10 से 12 लाख रुपए का खर्च ग्रामीणों ने आपस में मिलकर उठाया है। यहां तक कि ट्रांसपोर्ट का खर्च भी गांव वाले ही कर रहे हैं।
फाजिल्का जिले में पहुंचेगी सामग्री यह राहत सामग्री पंजाब के फाजिल्का जिले भेजी जाएगी। यह इलाका पाकिस्तान की सीमा से सटा हुआ है और डीग के पहाड़ी से करीब 650 किलोमीटर दूर है। इतने लंबे सफर के बाद यह मदद वहां तक पहुंचेगी, जहां बाढ़ का पानी लोगों को पूरी तरह से बेहाल कर चुका है। प्रशासन तय करेगा कि किन गांवों में इसे वितरित किया जाए। साथ ही, भोजपुर से 15 लोगों का जत्था भी पंजाब जाएगा ताकि पैकेट सही हाथों तक पहुंच सकें।
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