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राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC), जयपुर में मंगलवार को बिहार म्यूजियम की लोक कला प्रदर्शनी वैदेही सीता का आगाज हुआ।

राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC), जयपुर में मंगलवार को बिहार म्यूजियम की लोक कला प्रदर्शनी वैदेही सीता का आगाज हुआ। एग्जीबिशन का उद्घाटन राजस्थान ललित कला अकादमी के पूर्व चेयरमैन अश्विन दलवी ने किया। इस मौके पर आरआईसी के निदेशक निहाल चंद गोयल भी मौजूद

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यह अनोखी प्रदर्शनी सीता के जीवन को सिर्फ देवी स्वरूप में नहीं बल्कि एक स्त्री, पुत्री, सखी और पत्नी के रूप में प्रस्तुत करती है। इसमें बिहार की पारंपरिक लोक कलाओं मधुबनी, टिकुली, मंजूषा, सुजनी और एप्लीक (कढ़ाई) के माध्यम से सीता के जीवन के प्रमुख प्रसंग जैसे जन्म, विवाह, हरण, वनवास और अशोक वाटिका की घटनाएंं दर्शाई गई हैं।

एग्जीबिशन का उद्घाटन राजस्थान ललित कला अकादमी के पूर्व चेयरमैन अश्विन दलवी ने किया।

एग्जीबिशन का उद्घाटन राजस्थान ललित कला अकादमी के पूर्व चेयरमैन अश्विन दलवी ने किया।

प्रदर्शनी में कुल 35 प्रख्यात लोक कलाकारों की कृतियां प्रदर्शित हैं, जिनमें 4 पद्मश्री सम्मानित कलाकारों सहित कई राष्ट्रीय और राज्य पुरस्कार विजेता कलाकार शामिल हैं। कलाकृतियों में ‘जटायु युद्ध’, ‘अशोक वाटिका में हनुमान-सीता भेंट’, ‘राम-सीता दरबार’, ‘अयोध्या दीपोत्सव’, ‘सीता अपहरण’ और ‘लांछन’ जैसे प्रसंगों को बेहद बारीकी और पारंपरिक शैली में उकेरा गया है। विशेष रूप से मिथिला पेंटिंग, मंजूषा कला और टिकुली कला के कार्य दर्शकों को सीता के जीवन की भावनात्मक और आध्यात्मिक यात्रा से जोड़ते हैं। यह प्रदर्शनी आम जनता के लिए 2 से 30 सितम्बर 2025 तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक प्रदर्शनी हॉल–3, राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर, जयपुर में खुली रहेगी।

इस मौके पर आरआईसी के निदेशक निहाल चंद गोयल भी मौजूद रहे।

इस मौके पर आरआईसी के निदेशक निहाल चंद गोयल भी मौजूद रहे।

जटायु युद्ध

यह कलाकृति एप्लिक/कशीदाकारी में राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता कमला देवी द्वारा निर्मित है। दृश्य में रावण, देवी सीता का अपहरण कर वायुमार्ग से जा रहा है, तभी जटायु नामक गिद्ध पक्षी सीता के बचाव हेतु रावण से युद्ध करता हुआ प्रदर्शित किया गया है

चित्रकला में मग्न सीता

यह कलाकृति मिथिला पेंटिंग में राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता विभा लाल द्वारा निर्मित है। मिथिला पेंटिंग की बारीकियों से परिपूर्ण वित्र में सुंदर आभूषणों तथा वस्त्रों से सुसज्जित देवी सीता वृक्ष के नीचे बैठकर चित्रकारी कर रही है। सीता की अन्य तीन सहेलियों चित्र को देखकर आनंद विभोर हो रही है।

यह कलाकृति एप्लिक/कशीदाकारी में राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता कमला देवी द्वारा निर्मित है।

यह कलाकृति एप्लिक/कशीदाकारी में राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता कमला देवी द्वारा निर्मित है।

सीता को सांत्वना देती त्रिजटा

यह कलाकृति मंजूषा कला में राज्य पुरस्कार से सम्मानित अनुकति कुमारी द्वारा निर्मित है। दृश्य में राक्षसी त्रिजटा जो कोमल हृदय की राक्षसी थी, सीता को रावण की अशोक वाटिका में सांत्वना देती हुई चित्रित की गई है।

इस कला कृति में राम सीता विवाह को दर्शाया गया है।

इस कला कृति में राम सीता विवाह को दर्शाया गया है।

अशोक वाटिका में सीता और हनुमान की भेंट

यह कलाकृ‌ति मंजूषा कला में राज्य पुरस्कार विजेता उलूपी कुमारी की निर्मित है। दृश्य में हनुमानजी की ओर से रावण की अशोक वाटिका में प्रवेश, देवी सीता से भेंट कर श्रीराम का संदेश देना, इसके बाद देवी सीता से आज्ञा लेकर वाटिका से प्रस्थान किए जाने के प्रसंगों को चित्रित किया गया है।

अशोक वाटिका में सीता

यह कलाकृति मिथिला पेंटिंग में पद्मश्री से सम्मानित शांति देवी द्वारा निर्मित है। दृश्य में अशोक वाटिका में अशोक वृक्ष के नीचे बैठी देवी सीता तथा हनुमान की भेंट का प्रसंग दिखाया गया है। हनुमान, देवी सीता को श्रीराम द्वारा दी गई अंगूठी प्रदर्शित कर रहे हैं।

यह कलाकृति मिथिला पेंटिंग में पद्मश्री से सम्मानित शांति देवी द्वारा निर्मित है।

यह कलाकृति मिथिला पेंटिंग में पद्मश्री से सम्मानित शांति देवी द्वारा निर्मित है।

रावण

शशिकला देवी द्वारा बनाई गई यह मिथिला पेंटिंग रेखाओं का इस्तेमाल करते हुए रावण को दस सिरों के साथ दर्शाती है। हाथों और सिरों का कुछ भाग जमीन पर दिखाया गया है।

अयोध्या में दीपोत्सव

यह कलाकृति टिकुली कला में पद्मश्री से सम्मानित अशोक कुमार विश्वास द्वारा निर्मित है। दृश्य में श्रीराम, सीता तथा लक्ष्मण सहित अयोध्या आगमन को चित्रित किया गया है। कथानुसार अयोध्यावासियों द्वारा असंख्य दीप जलाकर राम, सीता, लक्ष्मण का स्वागत किया गया था।

राम-दरबार

यह कलाकृति मिथिला पेंटिंग में पद्मश्री से सम्मानित शांति देवी द्वारा निर्मित है। दृश्य में श्रीराम दरबार को प्रदर्शित किया गया है। जिसमें श्रीराम तथा सीता केन्द्र में आसन पर बैठे हुए हैं तथा अन्य देवी-देवता हनुमान, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, ब्रह्मा, शिव, ऋषि वसिष्ठ आसन के चारो ओर चित्रित किए गए है।

लांछन

यह कलाकृति मिथिला पेंटिंग में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित आशा झा द्वारा निर्मित है। एक दृश्य में राजा राम के दरबार में सीता के सतीत्व पर लांछन लगाती हुई अयोध्या के प्रजाजनों को दिखाया गया, दूसरे दृश्य में महल त्याग कर वनगमन करती देवी सीता को प्रदर्शित किया गया है।

राम सीता

यह मिथिला पेंटिंग अंजु मिश्रा द्वारा बनाई गई है। इसमें एक दिव्य दृश्य दर्शाया गया है, जिसमें राम-सीता सिंहासन पर मध्य में विराजमान हैं। हनुमान और अन्य तीन आकृतियाँ नमस्कार मुद्रा में भक्ति भाव से खड़ी है।

सीता अपहरण

यह कलाकृति मिथिला पेंटिंग में पद्मश्री से सम्मानित दुलारी देवी द्वारा निर्मित है। चित्र में ऋषिकेश में रावण को देवी सीता का अपहरण करते हुए दिखाया गया है।



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