☜ Click Here to Star Rating


मंगोलिया, चीन और कजाकिस्तान से हर साल शीतकालीन प्रवास पर जैसलमेर जिले में आने वाले मेहमान पक्षी कुरजां ने दस्तक दे दी है। दरअसल, कुरजां को क्षेत्र के देगराय ओरण में आकाश में सुबह स्वच्छंद विचरण करते हुए देखा गया। पहले जत्थे ने देगराय पहुंचकर अपने प्र

.

आसमान में पक्षियों के कलरव से गुलजार हुआ देगराय ओरण इलाका।

आसमान में पक्षियों के कलरव से गुलजार हुआ देगराय ओरण इलाका।

मेहमान पक्षी के आगमन से पक्षी प्रेमी खुश

वन्यजीव प्रेमी सुमेर सिंह भाटी ने बताया कि कुरजां का ये समूह दिनभर देगराय ओरण पर मंडराता रहा था लोग कुरजां की एक झलक पाने का काफी उत्सुक नजर आए. कुरजां के लाठी क्षेत्र में पहुंचने के बावजूद पक्षी कुछ दिन तक नीचे नहीं उतरेंगे तथा दिन व रात में आकाश में उड़ते हुए ही सुरक्षा के लिहाज से पूरी जांच पड़ताल करेंगे. उसके बाद ही पक्षी नीचे उतरेंगे तथा पक्षियों की दिनचर्या शुरू होगी. तापमान में गिरावट के साथ ही क्षेत्र में पक्षियों की संख्या में वृद्धि होगी, फिर क्षेत्र में रात्रि विश्राम के बाद पक्षी प्रतिदिन क्षेत्र के पास स्थित खुले मैदान में पहुंचकर चुग्गा लेना शुरू करेंगे।

खुले मैदान में डालते हैं डेरा

सुमेर सिंह भाटी ने बताया कि प्रवासी पक्षी कुरजां का वजन करीब दो से ढाई किलो होता है। यह पानी के आसपास खुले मैदान और समतल जमीन पर ही अपना अस्थाई डेरा डालकर रहते हैं। इन पक्षियों का मुख्य भोजन वैसे तो मोतिया घास होती है और पानी के पास पास पैदा होने वाले कीड़े मकोड़े खाकर अपना पेट भरते हैं। क्षेत्र में अच्छी बारिश होने पर खेतों में होने वाले मतीरे की फसल भी इनका पसंदीदा भोजना माना जाता है। यहां वे लाठी सहित, देगराय ओरण, खेतोलाई, भादरिया चाचा, धोलिया, डेलासर, लोहटा गांव के पास स्थित तालाब व खड़ीनो पर देखे जा सकते हैं।

देगराय ओरण पर उड़ान भरते नजर आई कुरजां पक्षी।

देगराय ओरण पर उड़ान भरते नजर आई कुरजां पक्षी।

सर्दियों में भारत आती है कुरजां

कुरजां एक खूबसूरत पक्षी है जो सर्दियों में साइबेरिया से ब्लैक समुद्र से लेकर मंगोलिया तक फैले प्रदेश से हिमालय की ऊंचाइयों को पार करता हुआ हमारे देश में आता है। सर्दियां हमारे मैदानों और तालाबों के करीब गुजारने के बाद वापस अपने मूल देश में लौट जाता है। अपने लंबे सफर के दौरान यह पांच से आठ किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ता है। राजस्थान में हर साल लगभग पचास स्थानों पर कुरजां पक्षी आते हैं, लेकिन इनकी सबसे बड़ी संख्या लाठी व देगराय क्षेत्र में ही दिखाई देती है। कुरजां यहां के परिवेश में इतना घुलमिल गया है कि इस पर कई लोकगीत बन चुके है।

6 महीने का होगा प्रवास

कुरजां पक्षी हर साल सितम्बर महीने के पहले सप्ताह में देगराय व लाठी आदि इलाकों में पहुंच जाती है और मार्च में वतन वापसी की उड़ान भरती है। इस दौरान छह महीने के शीतकालीन प्रवास में ये पक्षी यहां हजारों की तादाद में एकत्रित होकर क्षेत्र को पर्यटक स्थल का रूप दे देते हैं। इस दौरान तालाबों पर इनका कलरव साफ दूर से सुना जा सकता है। प्रवासी पक्षी कुरजां के आगमन के साथ ही इनके इलाकों में पक्षी प्रेमियों की भी चहल-पहल बढ़ जाती है।



Discover more from Kuchaman City Directory

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Comments

Leave a Reply

error: Content is protected !!

Sign In

Register

Reset Password

Please enter your username or email address, you will receive a link to create a new password via email.

Discover more from Kuchaman City Directory

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading