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जयपुर के SMS में हुए अग्निकांड में भरतपुर के 3 लोगों की मौत हुई है। इसमें कुष्मा देवी (हजीतर), रुक्मणि (गोपालगढ़) और श्रीनाथ (बयाना) के रहने वाले हैं।

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दैनिक भास्कर हादसे में जान गंवाने वाली रुक्मणि देवी के घर पहुंचा।

रुक्मणि के देवर बलवीर बताते हैं- भतीजे शेरू ने पहले ही SMS स्टाफ को बता दिया था कि कुछ बदबू आ रही है। जरा चेक कर लो कहीं आग तो नहीं लगी। इसके बाद भी स्टाफ ने कोई ध्यान नहीं दिया।

भतीजा मां को बचाने के लिए ट्रॉमा सेंटर में जबरन घुसा और बेड समेत अपनी मां को बाहर लेकर दौड़ा। इस दौरान उसकी भी तबीयत बिगड़ गई। दोनों ही भतीजे शेरू और जोगेंद्र उनकी मां का दिन रात ख्याल रखते थे। उन्हें बस यही दुख है कि वे दोनों मां को नहीं बचा सके।

रुक्मणि 15 दिन से जयपुर के SMS अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती थी। बाथरूम में पैर फिसलने से गिर गई थी और इसके बाद से ही उनका इलाज चल रहा था।

देवर बलवीर का आरोप है- जैसे ही ट्रॉमा सेंटर धुआं भरा अस्पताल का स्टाफ भाग निकला। गार्ड ने अंदर जाने से रोकने की कोशिश की तो शेरू बोला- ऐसे कैसे भाग जाऊं मेरी मां है लेकर जाऊंगा। शेरू ने गेट जबरन खुलवाया और अंदर घुसा। इसके बाद अपनी मां के चेहरे पर लगा ऑक्सीजन का मास्क हटाया और बाहर लेकर भागा। लेकिन, उसे बचा नहीं सका।

पहले पढ़िए क्या था मामला

जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में रविवार देर रात आग लग गई। हादसे में 8 मरीजों की मौत हो गई। इनमें 3 महिलाएं शामिल हैं।

रात 11 बजकर 20 मिनट पर यह आग ट्रॉमा सेंटर के न्यूरो आईसीयू वार्ड के स्टोर में लगी। यहां पेपर, आईसीयू का सामान और ब्लड सैंपलर ट्यूब रखे थे।

ट्रॉमा सेंटर के नोडल ऑफिसर और सीनियर डॉक्टर ने बताया कि शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका है। हादसे के समय आईसीयू में 11 मरीज थे। उसके बगल वाले आईसीयू में 13 मरीज थे।

वहीं, इस अग्निकांड की जांच के लिए शासन स्तर पर 6 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है।

पढ़िए परिवार ने बताई ट्रॉमा सेंटर में हुए हादसे की कहानी परिजनों की जुबानी

15 दिन पहले घर में गिरी थी

रुक्मणि के पति बच्चू सिंह बताते हैं- पत्नी 15 दिन पहले घर में फिसलने से गिर गई थी। उसे कमर और सिर में चोट आई थी। पहले तो उन्हें भरतपुर के RBM में ले गए। जहां से उन्हें जयपुर के SMS में रेफर कर दिया। यहां वे ट्रॉमा सेंटर में एडमिट थी।

बच्चू सिंह ने बताया- जब आग लगी तब मेरा बेटा शेरू नर्सिंग स्टाफ से बोला था कि ट्रॉमा सेंटर में धुआं उठ रहा है शायद कहीं आग लग रही है। उसके बाद भी किसी ने गौर नहीं किया। इसके कुछ देर बाद ट्रॉमा सेंटर में आग लग गई। लोग ट्रॉमा सेंटर से भागने लगे।

आरोप- नर्सिंगकर्मियों ने रोका

बच्चू सिंह ने बताया- मेरा बड़ा बेटा शेरू अपने छोटे भाई जोगेंदर को बुलाने के लिए गया। वह SMS अस्पताल में नीचे सो रहा था। जब दोनों भाई ट्रॉमा सेंटर के बाहर आए तो, नर्सिंगकर्मियों ने उसे अंदर आने से रोक दिया।

बच्चू सिंह ने आरोप लगाया कि आग लगते ही सारा स्टाफ वहां से फरार हो गया था। सभी मरीज ट्रॉमा सेंटर के अंदर ही पड़े रह गए। गार्ड्स ने ट्रॉमा सेंटर का गेट बंद कर दिया था। इसके बाद शेरू जबरन गेट खोलकर ट्रॉमा सेंटर के अंदर गया।

रुक्मणी के ऑक्सीजन लगी हुई थी। शेरू ने ऑक्सीजन हटाई और बेड के साथ उन्हें बाहर लेकर आया था। जहरीली गैस के कारण शेरू भी बीमार पड़ गया। हालांकि वह अपनी मां को नहीं बचा सका।

रुक्मणि के देवर बलवीर ने बताया की मेरे बड़े भाई बच्चू सिंह के पैर खराब हैं। रुक्मणी ही घर संभाल रही थी। मेरे भतीजे शेरू ने अस्पताल प्रशासन से कहा था की कहीं से धुआं आ रहा है। उसके बाद नर्सिंग कर्मियों ने नहीं सुना। कुछ देर में आग बढ़ गई।

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