राजस्थान सरकार की देवस्थान विभाग की वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना के तहत रामेश्वरम जा रही ट्रेन लगभग चार घंटे की देरी से चित्तौड़गढ़ पहुंची। इस ट्रेन से उदयपुर संभाग के 230 बुजुर्ग यात्री मदुरई और रामेश्वरम की यात्रा पर जा रहे हैं। ट्रेन में सबसे

स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार करते बुजुर्ग यात्री।
बताया जा रहा है कि अजमेर से रवाना होने के बाद कुछ दूरी पर ही ट्रेन के इंजन में पावर फेल हो गया, जिससे दूसरा इंजन मंगवाना पड़ा। हालांकि, उससे पहले पहले वाले इंजन को ठीक करने की काफी कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। नया इंजन आने में भी काफी समय लग गया, जिससे ट्रेन चार घंटे की देरी से चित्तौड़गढ़ पहुंची। इस देरी के कारण बुजुर्ग यात्रियों को स्टेशन पर बैठकर ही खाना खाना पड़ा। वहीं, उदयपुर, प्रतापगढ़ और राजसमंद से आए कई यात्री थकावट के कारण प्लेटफॉर्म पर ही सो गए। हालांकि यह यात्रा पूरी तरह निशुल्क है और इसमें बुजुर्गों को हर जरूरी सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
देवस्थान विभाग के कर्मचारी भी साथ रहेंगे
यह विशेष ट्रेन आज 11 अगस्त को रवाना हुई। ट्रेन पूरी तरह वातानुकूलित (AC) है, जिससे बुजुर्गों को गर्मी और सफर की थकान से राहत मिलेगी। इस ट्रेन में दो बार चाय, तीन बार खाना और पीने का पानी मुफ्त दिया जाएगा। यात्रा के दौरान देवस्थान विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी बुजुर्गों की सेवा और देखरेख के लिए साथ रहेंगे।
ट्रेन अजमेर से शुरू होकर चित्तौड़गढ़ और रतलाम होते हुए रामेश्वरम पहुंचेगी। कुल मिलाकर पूरे राजस्थान से करीब लगभग 800 बुजुर्ग यात्री इस योजना के तहत रामेश्वरम और मदुरई जा रहे हैं।
रामेश्वरम और मदुरई के करवाएंगे जाएंगे दर्शन
इस यात्रा में सभी बुजुर्गों को तमिलनाडु राज्य के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल रामेश्वरम और मदुरई के दर्शन करवाए जाएंगे। रामेश्वरम हिन्दू धर्म के चार धामों में से एक है, जहां भगवान शिव का प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग स्थित है। वहीं, मदुरई में देवी मीनाक्षी का भव्य मंदिर है, जो दक्षिण भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। यह यात्रा 7 दिनों की है। 18 अगस्त को यह ट्रेन वापस आएगी और सभी यात्रियों को उनके स्टेशन पर छोड़ दिया जाएगा।

226 बुजुर्ग यात्री चित्तौड़गढ़ से हुए रवाना।
टिकट और पहचान पत्र की व्यवस्था
चित्तौड़गढ़ स्टेशन पर सभी यात्रियों को दोपहर 2 बजे बुलाया गया, जहां उन्हें यात्रा के लिए टिकट और पहचान पत्र (ID कार्ड) दिए गए। इसके बाद सभी यात्री ट्रेन में सवार हुए। इस मौके पर देवस्थान विभाग के निरीक्षक नितिन नागर ने बताया कि ट्रेन में हर सुविधा का पूरा ध्यान रखा गया है। साथ ही, विभाग के संविदा कर्मचारी जगदीश जीनगर और सोहनलाल मीणा भी इस यात्रा में यात्रियों की सहायता के लिए मौजूद रहेंगे।
ट्रेन में 12 कोच होंगे
रामेश्वरम तीर्थ यात्रा के लिए रवाना हुई विशेष ट्रेन में कुल 12 कोच लगाए गए हैं। इनमें दस यात्री कोच हैं, जिनमें हर में 80-80 बुजुर्ग यात्री यात्रा कर रहे हैं। एक कोच पैंट्री के रूप में रखा गया है, जिसमें यात्रियों के लिए भोजन, नाश्ता और चाय की तैयारी तथा वितरण की व्यवस्था की गई है। एक विशेष कोच आईआरसीटीसी और देवस्थान विभाग के सहायक अधिकारियों के लिए आरक्षित है, जिसमें यात्रा के संचालन की निगरानी की जाएगी। इसी कोच में चिकित्सा टीम की भी व्यवस्था की गई है, ताकि यात्रा के दौरान किसी भी यात्री को स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर तुरंत इलाज मिल सके। चिकित्सा दल में कुल छह डॉक्टर शामिल हैं, जिनमें तीन डॉक्टर आईआरसीटीसी और तीन डॉक्टर देवस्थान विभाग की ओर से नियुक्त किए गए हैं। इस तरह यात्रियों की सुविधाओं, स्वास्थ्य और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखते हुए यात्रा का संचालन किया जा रहा है।
भास्कर डिजिटल ने यात्रियों से बातचीत की – जानिए उनके अनुभव
इस यात्रा को लेकर बुजुर्गों में जबरदस्त उत्साह देखा गया। भास्कर डिजिटल ने कुछ यात्रियों से बातचीत की, जिन्होंने अपनी खुशी साझा की:
राधेश्याम सोलंकी और उनकी पत्नी दाखी बाई (करनी माता का खेड़ा, 65 वर्ष)
राधेश्याम जी एक किराना दुकान चलाते हैं। वे अपनी पत्नी के साथ पहली बार रामेश्वरम जा रहे हैं। उन्होंने बताया,

जब इस योजना के बारे में पता चला, तो हमने फॉर्म भर दिया और हमारा नंबर आ गया। बहुत खुशी हो रही है। अभी से आनंद आ रहा है, तो आगे की यात्रा तो और भी शानदार होगी।


राधेश्याम सोलंकी और उनकी पत्नी दाखी बाई।
ओंकार लाल जी उप कारापाल के पद से रिटायर्ड हैं। उन्होंने कहा-

रामेश्वरम के दर्शन की इच्छा कई सालों से थी, लेकिन कभी मौका नहीं मिला। अब सरकार ने यह मौका दिया है, तो मन बहुत खुश है।


ओंकार लाल अपनी पत्नी धनी बाई के साथ जा रहे है।
इंदु रानी आमेटा और उनके पति अरविंद कुमार आमेटा (उदयपुर) इंदु रानी जी ने बताया कि उनके पति सिंचाई विभाग में कार्यरत थे और अब रिटायर्ड हो चुके हैं।

पिछली बार फॉर्म भरा था लेकिन नंबर नहीं आया। इस बार फिर प्रयास किया और नंबर आ गया। रामेश्वरम जाने की इच्छा थी, जो अब पूरी हो रही है।


इंदु रानी आमेटा और उनके पति अरविंद कुमार आमेटा।
रूपलाल ने बताया कि उनके दोस्त बापू लाल शर्मा अपनी पत्नी के साथ जा रहे थे, तो उन्होंने भी साथ में फॉर्म भर दिया। दोनों ही पहली बार रामेश्वरम जा रहे हैं।

इस योजना की जानकारी हमें ई-मित्र संचालक से मिली थी। इससे हमें यह सुनहरा मौका मिला।


रूपलाल पुरोहित और उनके दोस्त बापू लाल शर्मा।
योजना का उद्देश्य – बुजुर्गों को तीर्थ यात्रा का लाभ
राजस्थान सरकार की यह योजना खासतौर से उन बुजुर्गों के लिए है, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और जीवन में कभी किसी बड़े तीर्थ स्थान पर नहीं जा पाए। इस योजना का उद्देश्य है कि वरिष्ठ नागरिकों को धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के दर्शन कराए जाएं, जिससे उनका मन प्रसन्न हो और उन्हें आत्मिक शांति मिले।
इस योजना के तहत यात्रा पूरी तरह निःशुल्क होती है।आवागमन की व्यवस्था रेलवे से वातानुकूलित ट्रेन में की जाती है। खाने-पीने, ठहरने, स्वास्थ्य सेवा और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है। हर यात्री को पहचान पत्र और टिकट दिया जाता है।
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