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कस्बे में तालाब से पहले स्थित वर्षों पुराना एनीकट इस बार की बारिश क्षतिग्रस्त हो गया। पानी के तेज बहाव से गहरे गड्ढे बन गए हैं और दीवारों में दरारें आ चुकी हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों व ग्राम पंचायत प्रशासन से एनीकट की मरम्मत के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
ग्रामीणों के अनुसार यह एनीकट क्षेत्र के मवेशियों के लिए गर्मी और सर्दी में पेयजल का एकमात्र स्रोत है। इसके साथ ही आसपास के किसान फसलों की सिंचाई के लिए भी इसी एनीकट पर निर्भर हैं। मौजूदा स्थिति में एनीकट में पानी नहीं ठहरने से जल संकट गहराने की आशंका है। कस्बा निवासी मुरारीलाल मेहता, योगेंद्र गुप्ता, भाजपा नेता अरविंद मेहता सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि यह एनीकट करीब 22 वर्ष पहले ग्राम पंचायत ने बनवाया था। तब से इस एनीकट की मरम्मत नहीं कराई गई। स्थानीय लोगों ने कई बार पंचायत और संबंधित विभाग को ज्ञापन देकर मरम्मत की मांग की, लेकिन हर बार आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।
ग्रामीणों के अनुसार गर्मी के मौसम में एनीकट पूरी तरह से रीत जाता है, जिससे मवेशियों के लिए पानी का संकट उत्पन्न हो जाता है। इस बार अगर समय रहते मरम्मत नहीं की गई, तो आगामी गर्मियों में स्थिति और भयावह हो सकती है। ग्रामीणों ने एनीकट की खुदाई कर जल संरक्षण की मांग उठाई है। उनका कहना है कि समय रहते एनीकट को गहरा किया जाए और उसके चारों ओर सुरक्षा दीवारें बनाई जाएं, तो यह भविष्य में क्षेत्र के लिए वरदान साबित हो सकता है।
क्षेत्र के ग्रामीणों में प्रशासन की अनदेखी को लेकर रोष व्याप्त है। ग्रामीणों के अनुसार समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए गए, तो किसानों की फसलों और मवेशियों के लिए पेयजल संकट उत्पन्न हो सकता है। वहीं राजपुर पंचायत प्रशासक शोभा बंसल ने बताया कि एनीकट की मरम्मत को लेकर एक बार प्रस्ताव लिया था, लेकिन काम ऊपर से आया नहीं। अब दोबारा से उच्चाधिकारी को अवगत करवाएंगे। मामला जानकारी में है, एनीकट से पानी का रिसाव हो रहा है। एनीकट का पानी मवेशियों के पेयजल और किसानों के सिंचाई के काम आता है।
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