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आपराधिक घटना पर दर्ज की गई एफआईआर में कोर्ट से न्याय कब मिलेगा, यह कहना मुश्किल है। थाने में तफ्तीश पूरी होने के बाद भी सभी फाइलें समय पर कोर्ट कार्यवाही में शामिल नहीं हो रहीं। एफआर ही नहीं, चार्जशीट जैसे मामलों की फाइलें भी लाल बस्तों में बंद हैं।

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भास्कर ने फाइलों के थानों से कोर्ट पहुंचने के ट्रैक की पड़ताल की तो यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ। पुलिस रिकॉर्ड में अकेले जयपुर कमिश्नरेट में 3 हजार से ज्यादा फाइलें पेंडिंग हैं, जबकि अकेले जयपुर वेस्ट जिले में ही 3000 फाइलें पेंडिंग होने की जानकारी सामने आई है। प्रदेश में हजारों फाइलें (1052 थाने हैं, हर थाने में ऐसी फाइलें हैं) ऐसी हैं जिनमें पुलिस तफ्तीश पूरी हो गई, लेकिन उनमें कोर्ट कार्यवाही शुरू नहीं हुई। थानों में तफ्तीश पूरी होने के बाद सक्षम स्तर से एफआर या चार्जशीट का आदेश लेने के बाद फाइल कोर्ट पहुंचती है। इनका लेखाजोखा हर थाने के कोर्ट एलसी के पास होता है।

कोर्ट एलसी ही बता रहे हैं… क्यों पेंडिंग हैं चार्जशीट और एफआर के मामले

  • थाना बस्सी : 150 एफआर, 150 चालान पेंडिंग

कोर्ट कह देती है एफआर-चालान कम लेंगे “किसी केस में चार आरोपी हैं और चार्जशीट के समय एक नहीं आया तो कोर्ट फाइल स्वीकार नहीं करती। जो आरोपी जमानत पर है, उसे बाध्य कैसे कर सकते हैं? 150 फाइलें पेंडिंग हैं, उनका निस्तारण होता है तो इतनी ही और आ जाएंगी। कई बार कोर्ट ही कह देती है एफआर चालान कम लेंगे।”

-भीवाराम, कोर्ट एलसी बस्सी

  • जवाहर सर्किल : 200 एफआर, 200 चालान पेंडिंग

आईओ-एसएचओ का ट्रांसफर, फाइल पता नहीं “यह 2022 का मामला है। तत्कालीन थानाधिकारी व जांच अधिकारी का ट्रांसफर हो चुका। चार्जशीट के आदेश हैं, लेकिन कोर्ट ने खामियां बता दीं। 200 एफआर व 200 ही चार्जशीट पेंडिंग हैं।”

-बबली सिंह, कोर्ट एलसी थाना जवाहर सर्किल

  • थाना बजाजनगर: 140 एफआर, 150 चालान पेंडिंग

कितनी ही फाइलें हैं, कुछ तो 2019-20 की हैं “जहां ज्यादा रजिस्ट्रेशन, वहां समस्या ज्यादा है। कोर्ट पर निर्भर करता है। कई बार ले लेते हैं तो कई बार कमियां बता दी जाती हैं। एफआर में परिवादी को साथ लाने को कहते हैं, ताकि मामला पेंडिंग न रहे। बजाज नगर थाने में करीब 150 एफआर पेंडिंग हैं। 150 ही चार्जशीट है। कई तो 2019-20 के भी हैं।”

-नितिन, कोर्ट एलसी थाना बजाज नगर

  • थाना मुहाना : 70 एफआर, 45 चालान पेंडिंग

अब हम अधिकारी से बड़े तो हैं नहीं…

“एफआर के मामले में कोर्ट परिवादी को साथ लाने के लिए कहती है। अब हम अधिकारी से बड़े तो नहीं। जब तक तामिल नहीं होगी, केस पेंडिंग रहेगा। चालान के मामले में भी ऐसा ही रहता है। आरोपी को साथ लाना होता है।””

-रामेश्वर, कोर्ट एलसी थाना मुहाना

थाना सदर के कोर्ट एलसी कैलाश बताते हैं- चालान और एफआर की कई फाइलें पेंडिंग हैं। कई फाइलें वर्ष 2022 या इससे भी पहले की हैं। कई मामले टाइम बाउंड हो गए, इनमें सरकार से मंजूरी भी लेनी होगी।

थाना प्रतापनगर ने मकान मालिक-किराएदार विवाद में आरोपी गिरफ्तार किए। वर्ष 2019 की 58 नंबर की एफआईआर में 5साल बाद भी चालान पेश नहीं हुआ। वर्तमान में फाइल अधिकारिक रूप से किसी के पास नहीं है।

डीजी बोले- कोर्ट से तालमेल कर एसपी कराएं निस्तारण

सोमवार को वीसी में कुछ एसपी ने कहा, थाने से फाइल कोर्ट जाने के बाद जेफ (ज्यूडिशियल फाइल) नंबर नहीं मिलता। डीजीपी राजीव शर्मा ने अधिकारियों को कोर्ट अधिकारियों से मिलकर मामलों निस्तारण की बात कही है। उधर, हाईकोर्ट एडवोकेट अभिनव शर्मा बताते हैं- ऐसा नहीं कि परिवादी न आए तो एफआर रिकॉर्ड पर ना ली जाए।



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