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जोधपुर का लालसागर देश की राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में है, क्योंकि यहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के नेतृत्व में अखिल भारतीय समन्वय बैठक चल रही है और इसमें कहने को तो सिर्फ संघ और संघ प्रेरित संगठनों के कार्य कलापों पर चर्चा हो रही है, लेकिन इसी बीच दिग्गज राजनेताओं की इसमें मौजूदगी राजनीतिक गलियारों में कई अटकलों को बढ़ाती जा रही है। समन्वय बैठक के पहले दिन राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को ‘विशेष सम्मान’ मिला है, वह राजनीतिक इतिहास में सामान्य नहीं लग रहा है। यह घटना नए समीकरण गढ़ने की तरफ इशारा कर रही है, क्योंकि अमूमन आरएसएस की समन्वय बैठकों में किसी मुख्यमंत्री को बुलाने की परंपरा नहीं है। इसीलिए यह मुलाकात राजनीतिक हलकों में सबके लिए चौंकानी वाली थी। सूत्रों के अनुसार संघ प्रमुख मोहन भागवत से भजनलाल शर्मा की मुलाकात पहले से तय थी। यहां भागवत के साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा की मौजूदगी में करीब 20 मिनट की विशेष मीटिंग हुई। इस मीटिंग के बहाने राजस्थान की राजनीति के लिए एक गूढ़ संदेश भी पहुंचा दिया गया। रणनीतिक समय और खास व्यवस्था गुरुवार को जेपी नड्डा का स्वागत, शुक्रवार को संघ प्रमुख से मुलाकात- भजनलाल शर्मा की यह दोहरी उपस्थिति किसी भी नजरिए से सामान्य नहीं लगती। विशेष बात यह है कि मुलाकात के दौरान भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और राष्ट्रीय संगठक वी. सतीश भी उपस्थित थे। यह त्रिकोणीय बैठक राजनीतिक गणित में भजनलाल के कद बढ़ाने के संकेत देती है। वसुंधरा राजे के ‘मूव’ के बाद शर्मा की मुलाकात वसुंधरा राजे की 3 सितंबर वाली मुलाकात के ठीक अगले दिन मुख्यमंत्री को बुलाना अलग राजनीतिक संकेत है। जहां राजे की मुलाकात को केंद्रीय नेतृत्व के लिए ‘मैसेज’ के रूप में देखा जा रहा था, वहीं भजनलाल की भागवत से मीटिंग संघ की तरफ से एक अलग स्ट्रैटेजी लग रही है। ‘टाइमिंग गेम’ की बारीकियां राजस्थान के राजनीतिक जानकारों के अनुसार, लालसागर परिसर में मुख्यमंत्री का इस तरह पहुंचना और वो भी उस वक्त जब बैठक के दोपहर बाद का सत्र खत्म हुआ था। जिस बिल्डिंग में समन्वय बैठक चल रही है, उससे दूर दूसरी बिल्डिंग, जहां संघ प्रमुख ठहरे हैं, उस तरफ हुई इस मुलाकात को विशेष सम्मान दिए जाने की तरह देखा जा रहा है। आम तौर पर यह स्थान केवल संघ के वरिष्ठतम कार्यकर्ताओं और विशेष अतिथियों के लिए सुरक्षित रहता है। बैठक सत्र समाप्त होने के ठीक समय पर मुख्यमंत्री का पहुंचना भी संयोग नहीं लगता। सूत्रों के अनुसार यह पूर्व नियोजित था। लालसागर परिसर में कुल 50 मिनट ठहरना और फिर सीधे जयपुर वापसी भी इस बात का प्रमाण है कि यह मुलाकात विशेष उद्देश्य से हुई थी। ‘इनर सर्कल’ में एंट्री का सिग्नल? सूत्रों की मानें तो भजनलाल शर्मा को संघ के ‘इनर सर्कल’ में शामिल करने के संकेत मिल रहे हैं। यह कोई सामान्य शिष्टाचार भेंट नहीं थी, बल्कि भविष्य की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा दिखता है। गृहमंत्री शाह के आने की अटकलें सूत्रों के अनुसार शनिवार-रविवार को गृहमंत्री अमित शाह भी जोधपुर आ सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो यह राजस्थान की राजनीति में एक और महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। इससे यह संकेत मिलता है कि केंद्रीय नेतृत्व राजस्थान को लेकर कुछ बड़े फैसले की तैयारी में है।



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