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गांव सहसन में बच्चों के सैंपल लेती टीम।

बरसाती मौसम के बाद डीग जिले के पहाड़ी उपखंड के सहसन गांव में वायरल बुखार से 24 घंटे में भाई-बहन की मौत हो गई, जबकि सबसे छोटी बहन का इलाज चल रहा है। वहीं गांव में करीब 40 से 45 बच्चे वायरल बुखार से जूझ रहे हैं। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने

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गांव के रत्ती मेव की 9 वर्षीय बेटी सुमैया और 7 वर्षीय बेटे अनस ने तेज बुखार के चलते दम तोड़ दिया। इस परिवार की एक और बच्ची फिलहाल नाजुक हालत में है। सहसन गांव में लगभग हर घर में बुखार के मरीज हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग पर सीधी लापरवाही का आरोप लगाया।

गांव के सरपंच प्रतिनिधि जुबेर खान का कहना है कि “वायरल का प्रकोप हर दिन बढ़ रहा है लेकिन विभाग आंखें मूंदे बैठा है। न जांच टीम पहुंची, न कोई दवा वितरण। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि तुरंत मेडिकल टीम गांव में नहीं भेजी गई और मरीजों की जांच नहीं हुई तो लोग सड़क पर उतरकर विरोध करेंगे।

हालात बिगड़े, 40 से 45 बच्चे हैं बुखार से पीड़ित

  • मेवात में वर्ष 2020 में 12, 2024 में 7 और अब दो मौत से शुरुआत… अगर आंकड़ों पर नज़र डालें तो वर्ष 2020 में 12 बच्चों की मौत हुई थी, वहीं अक्टूबर 2024 में सात मासूमों की मौत हो चुकी है बावजूद इसके बरसात का मौसम आते ही विभाग नहीं जागता। समय पर सर्वे और टीकाकरण हो जाए तो मासूमों की जान बच सकती है, लेकिन लापरवाही के चलते इस बार भी दो बच्चों की मौत ने पूरे मेवात को दहशत में डाल दिया है।
  • हर साल बरसात के बाद लौटता है मौत का खतरा… ग्रामीणों का आरोप है कि हर साल बरसात के बाद गांवों में बीमारियां पांव पसारती हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां कागजों से बाहर नहीं निकलतीं। सहसन में दो मासूमों की मौत ने न सिर्फ विभाग की लापरवाही, बल्कि मौसमी बीमारियों की गंभीरता को भी उजागर कर दिया है। गांव के हालात फिलहाल बेहद नाजुक हैं और लोग डर के साये में हैंं।
  • सीएमएचओ ने मानी लापरवाही, अब दिए जांच के आदेश… डीग सीएमएचओ ने माना उन्हें सूचना मिली। उन्होंने पहाड़ी क्षेत्र के चिकित्सा अधिकारियों को मौके पर जांच के आदेश दिए हैं। सीएमएचओ का कहना है कि मौतें के कारण का यह जांच रिपोर्ट के बाद ही साफ हो पाएगा।

भास्कर एक्सपर्ट – डॉ जितेंद्र फौजदार, प्रभारी अधिकारी

बरसात और बुखार: मौत का कारण या लापरवाही का नतीजा?

“सीएचसी प्रभारी ने बताया बरसात में मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, टाइफाइड और वायरल संक्रमण तेजी से फैलते हैं। इन बीमारियों में तेज बुखार आता है, प्लेटलेट्स कम हो सकते हैं, लीवर और किडनी पर असर पड़ सकता है। यदि इलाज देर से शुरू होता है, तो मरीज की जान भी जा सकती है।”

बुखार खुद मौत का कारण नहीं है, लेकिन बरसात के मौसम में यह खतरनाक बीमारियों का लक्षण हो सकता है। समय पर जांच और इलाज ही जीवन बचाने की कुंजी है।



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