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राजसमंद झील का गेज पहुंचा 19.25 फीट, 24 घंटों के दौरान खारी फीडर से 1 इंच पानी की आवक हुई। 

राजसमंद में मानसून के फिर से एक्टिव होने के बाद अब राजसमंद झील में पानी आने की उम्मीद जागी है। फिलहाल झील में पानी के दो आवक स्त्रोत में से एक खारी फीडर से पानी आ रहा है। जबकि गौमती नदी से पानी की आवक नहीं हो रही है। यदि मानसून की मेहरबानी गढ़बोर व स

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हालांकि खारी फीडर से झील के लिए पांच फीट के गेज पर पानी छोड़ा गया है। लेकिन झील में आते आते यह 3 से 4 फीट ही रह जाता है।

खारी फीडर से पिछले 24 घंटों के दौरान 1 इंच पानी की आवक हुई है। जिसके बाद झील का जल स्तर 19.25 फीट हो गया जबकि झील का कुल गेज 30 फीट व भराव क्षमता 3786 एमसीएफटी है।

1994 से 2006 तक झील सूख गई थी। कई लोगों ने अपने जीवन में पहली बाद झील का पेटा सुखा हुआ देखा था।

1994 से 2006 तक झील सूख गई थी। कई लोगों ने अपने जीवन में पहली बाद झील का पेटा सुखा हुआ देखा था।

राजसमंद झील कब छलकी ओर कब सुखी –

राजसमंद झील का निर्माण 1676 में मेवाड़ के तत्कालीन महाराणा राजसिंह सिंह ने कराया था। राजसमंद झील के छलकने व सूखने के इतिहास की बात करे तो राजसमंद झील 44 साल बाद 2017 में पहली बार छलकी थी। इसके बाद अक्टूबर 2023 में एक बार फिर से छलकी।

झील छलकते हुए देखने का शहवासियों का सपना था ओर ये जब पुरा हुआ तो लोगो की खुशी का ठिकाना नही था। लेकिन इससे भी ज्यादा झील का दर्द भी लोगो ने देखा। झील का मुख्य बांध नो चौकी के नाम से विख्यात है। यहां सफेद संगमरमर से बनी इस पाल पर बनी छतरियां, तोरण की शिल्पकला अद्भुत है।

यहां पर विश्व का सबसे बड़ा शिलालेख राज प्रशस्ति खण्ड काव्य उत्कीर्ण है। झील में अतिरिक्त जल आवक के लिए 1968 में खारी फीडर का निर्माण किया गया जो बनास नदी पर बने नंदसमंद से राजसमंद झील में पानी भरती है।

सामाजिक पर्यावरण कार्यकर्ता दिनेश श्रीमाली ने बताया कि अवैज्ञानिक खनन, वनों के विनाश के चलते इस झील की स्थिति 2000 से 2006 तक मरणासन्न हो गई थी। गोमती नदी जला गम क्षेत्र नष्ट हो जाने से 1994 से 2006 तक यह झील सूखी पड़ी थी इस दौरान क्षेत्र में भारी पेयजल संकट का सामना करना पड़ा।

उसके बाद राजसमंद झील, गोमती नदी संरक्षण अभियान शुरू हुआ। गोमती नदी प्रवाह क्षेत्र से हजारों टन मार्बल स्लरी निकाल जल प्रवाह सुनिश्चित किया गया। परिणाम स्वरूप 2006 के बाद औसत वर्षा में गोमती नदी में पानी आना प्रारंभ हुआ। करीब 44 वर्ष के लंबे अंतराल बाद यह झील 2017 में ओवरफ्लो हुई।

झील में अतिरिक्त जल परावर्तन को बढ़ाने के लिए माही से पानी लाया जा सकता है। वहीं खारी फीडर विस्तार को लेकर 2023 से राज्य सरकार की घोषणा लंबित है।राजसमंद झील न केवल जल स्त्रोत है बल्कि झील का मुख्य सेतु नो चोकी पाल जो सफेद संगमरमर से निर्मित है जो दूर से चांदी की तरह चमका है। यहां की छतरिया ओर तोरण नक्काशी अद्भुत और अद्वितीय है।

राजसमंद झील 44 बाद पहली बार 2017 में ओवर फलों हुई।

राजसमंद झील 44 बाद पहली बार 2017 में ओवर फलों हुई।

2017 के बाद दूसरी बार अक्टूबर 2023 में राजसमंद झील ओवर फ्लो हुई, ओवरफ्लो पानी का आनन्द लेते शहरवासी।

2017 के बाद दूसरी बार अक्टूबर 2023 में राजसमंद झील ओवर फ्लो हुई, ओवरफ्लो पानी का आनन्द लेते शहरवासी।



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