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जन्माष्टमी पर उदयपुर समेत 5 जिलों के 35 कृष्ण मंदिरों में भोग-प्रसाद के ठेके ने देवस्थान विभाग की किरकिरी करवा दी। ठेका मुस्लिम की फर्म को दिया गया। विरोध के स्वर उठे तो अफसरों को रातोरात फैसला बदलना पड़ा।
दरअसल विभाग ने 16 और 17 अगस्त को जन्माष्टमी के दो दिवसीय कार्यक्रमों को लेकर उदयपुर सहित संभाग के प्रतापगढ़, राजसमंद, सलूंबर और चित्तौड़गढ़ के 35 श्रीकृष्ण मंदिरों में प्रसाद के लिए 31 जुलाई को खुली निविदा मांगी थी। इसमें 4 संवेदकों ने टेंडर डाले थे। दो आवेदन तकनीकी खामी से रद्द हो गए। दो के टेंडर खोले गए। इनमें भीलवाड़ा की फर्म दीवानशाह लाइट डेकोरेशन और साउंड के नाम पर टेंडर खोले गए। विभाग का कहना है कि इस फर्म के अब्दुल सलाम की टेंडर रेट 40% कम दर पर थी।
नियमों के अनुसार उसे ठेका दिया। दो दिन पहले टेंडर कॉपी और छूटे ठेके के आदेश की कॉपी सोशल मीडिया में वायरल हुई तो हिंदू संगठन विरोध जताने लगे। विभाग को सनातन विरोधी तक करार दिया गया। मामला तूल पकड़ता, उससे पहले उच्चाधिकारियों ने सहायक आयुक्त जतिन गांधी को निर्देश दिए गए कि ठेका तत्काल निरस्त किया जाए। फिर 15 अगस्त (शुक्रवार) की रात को ही ठेका निरस्त करने का हस्तलिखित आदेश जारी कर दिया गया।
विभाग की सफाई- वर्क ऑर्डर रोशनी-कच्ची सामग्री का था
सहायक आयुक्त गांधी ने बताया कि उक्त 35 मंदिरों में विशेष कार्यक्रमों के लिए आवेदन पर 11 अगस्त को चार निविदाएं मिलीं। अपात्र आवेदन छंटने और शर्तों के दायरे में दीवानशाह नाम की फर्म को कार्यादेश जारी किया गया। हर खरीद में विभागीय अधिकारी की मौजूदगी तय की थी।
धार्मिक मर्यादा संबंधी बातों को देखते हुए तत्काल संशोधित प्रावधान किया। विभाग ने स्पष्ट किया कि जन्माष्टमी प्रसाद की सभी व्यवस्थाएं विभागीय निरीक्षण में ही होती हैं। पंजीरी व अन्य सामग्री निरीक्षक व प्रबंधक की देखरेख में बनाई जाती है। वर्क ऑर्डर पाने वाली फर्म को लाइटिंग व कच्ची सामग्री आपूर्ति करनी थी। ठेका निरस्त कर दूसरे नंबर की फर्म को वर्क ऑर्डर जारी किया है।
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