राजस्थान स्टेट हेल्थ इंश्योरेंस (RGHS) स्कीम में सरकारी टीचर के बाद दो आयुर्वेद डॉक्टरों ने 68 लाख रुपए की दवा लिख दी। इनमें 30 लाख रुपए की दवा तो 6 महीने में ही लिखी गई है। मेडिकल स्टोर से इस दवा के नाम पर मोटा कमीशन भी लिया। सीएमएचओ ने चूरू में दो
कोतवाली थानाधिकारी सुखराम चोटिया ने बताया कि सीएमएचओ डॉ. मनोज शर्मा ने मामला दर्ज कराया है। रिपोर्ट में बताया- गवर्नमेंट डीबी अस्पताल के नाम से परामर्श पर्चियां छपवाकर उन्हें अस्पताल के बाहर स्थित मेडिकल स्टोर पर उपयोग में लाया जाता था।
यहां RGHS कार्ड के नाम से फर्जी पर्चियां तैयार कर उनसे ओटीपी लेकर RGHS से पैसा उठाया जाता था। कई पर्चियों पर जिन मरीजों के नाम दर्ज थे, उनका नाम अस्पताल के ओपीडी रजिस्टर में नहीं मिला। छुट्टी पर रहने वाले डॉक्टरों के नाम और सील भी काम ली जा रही थी।

चूरू के आयुर्वेदिक होम्योपैथिक अस्पताल के डॉक्टर ने लिखी दवा।
सीएमएचओ बोले- एआई से जांच में पकड़ा घपला सीएमएचओ डॉ. मनोज शर्मा ने बताया- RGHS में गड़बड़ी की जयपुर में एआई के स्तर पर जांच हुई थी, जिसमें यह मामला भी पकड़ा गया था। जयपुर से 13 अगस्त को आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश मिले थे।
मेडिकल स्टोर संचालक ने स्वीकारी डॉक्टरों को कमीशन देने की बात कोतवाली थानाधिकारी सुखराम चोटिया ने बताया- फार्मा स्टोर संचालक नवीन शर्मा ने जांच के दौरान स्वीकार किया कि आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. पवन जांगिड़ को प्रति मरीज कमीशन दिया जाता था। अधिकतर पर्चियां उनके और डॉ. कविता धनकड़ के नाम से आती थी।
रिकॉर्ड में यह भी सामने आया किशिवम आयुर्वेदिक ड्रग ने 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2024 तक RGHS में 77 लाख 34 हजार रुपए की दवाइयां बेची। इसमें से 47 लाख 84 हजार रुपए की बिक्री केवल डॉ. पवन जांगिड़ की पर्चियों से हुई। जनवरी से जून 2025 के बीच डॉ. पवन जांगिड़ की पर्चियों से 20 लाख 79 हजार रुपए और डॉ. कविता धनकड़ की पर्चियों से 10 लाख 65 हजार रुपए की बिक्री हुई।
एक व्यक्ति ने डेढ़ साल में उठाया 2.26 लाख का बिल सीएमएचओ ने बताया कि जांच में सामने आया मेडिकल और छुट्टी के दौरान डॉ. पूजा रोहेला के नाम की पर्ची और सील का फर्जी उपयोग कर 3 लाख 35 हजार रुपए की दवा दी गई। एक कार्ड धारक ने करीब डेढ़ साल में 53 बार विजिट कर 2 लाख 26 हजार रुपए की दवा ली।
मेडिकल स्टोर पर मिली सरकारी अस्पताल की पर्चियां अनुमति के बिना नाड़ी तरंगिणी मशीन से प्रति जांच 500 रुपए वसूले गए। वहीं, मरीजों को निजी आयुर्वेदिक लैब में भेजा गया। जांच के दौरान सरकारी अस्पताल की पर्चियां मेडिकल स्टोर पर मिली।
पुलिस शनिवार को संबंधित मेडिकल स्टोर पर पहुंची। जहां मेडिकल स्टोर में डॉक्टर्स के चैंबर बने हुए थे। एक चैंबर के बाहर डॉ. पवन जांगिड़ का नाम लिखा हुआ था।
संचालक नवीन शर्मा ने बताया- डॉ. जांगिड़ डीबी अस्पताल में आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी हैं और हॉस्पिटल समय के बाद शाम 6 से 7 बजे तक यहां बैठते थे। इसके लिए उन्हें प्रति मरीज कमीशन दिया जाता है।
इनके खिलाफ मामला दर्ज पुलिस ने चूरू के शिवम आयुर्वेदिक ड्रग के दीपक, नवीन शर्मा, सुशीला शर्मा, चूरू के सरकारी अस्पताल के डॉ. पवन जांगिड़, डॉ. कविता धनकड़ और आरजीएचएस कार्ड धारक मनोज कुमार, कृष्णा देवी, महिप पूनियां और एक अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
सीएमएचओ ने बताया पिछले दिनों सरकारी अस्पताल की एक महिला आयुर्वेद डॉक्टर ने भी मामला दर्ज करवाया था। जिसमें बताया कि उसके नाम की मुहर और साइन का गलत उपयोग किया जा रहा है।
जयपुर में महिला टीचर ने RGHS से कराया रिश्तेदारों का इलाज, सस्पेंड शिक्षा विभाग ने जयपुर की एक महिला सीनियर टीचर को सरकारी योजना का दुरुपयोग करने पर सस्पेंड कर दिया था। टीचर के खिलाफ मेडिकल डिपार्टमेंट ने शिक्षा विभाग को एक शिकायत भेजी थी। इसको लेकर महिला टीचर को विभाग ने निलंबित कर दिया। फिलहाल टीचर का मुख्यालय दौसा किया गया है।
दरअसल, सीनियर टीचर कुंबोदिनी मीणा के खिलाफ राजस्थान स्टेट हेल्थ इंश्योरेंस (RGHS) कार्ड का दुरुपयोग करने का मामला सामने आया था। टीचर ने RGHS कार्ड से अपने रिश्तेदारों और परिचितों को गलत तरीके से मेडिकल सुविधा दिलाई थी। पूरी खबर पढ़ें…
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