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बाड़मेर के सेड़वा में पकड़ी गई फैक्ट्री। फाइल शॉट।

राजस्थान में सुनसान जगहों पर खेत किराए पर लेकर नशे की फैक्ट्रियां लगाई जा रही हैं। हाल ही में नारकोटिक्स ब्यूरो ने बाड़मेर, प्रतापगढ़ और जोधपुर में कई जगह छापेमारी कर MD ड्रग्स बनाने के रैकेट का भांडाफोड़ किया है। एक जगह तो इतना कैमिकल पकड़ा गया, जिस

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अब तक सामने आए ये फैक्ट…

100 करोड़ की ड्रग्स तैयार होनी थी यहां

दरअसल, 23 जुलाई 2025 को बाड़मेर पुलिस ने भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के पास एक फैक्ट्री पकड़ी थी। इस फैक्ट्री में 40 लाख रुपए का केमिकल पकड़ा गया। इसी लिक्विड से 100 करोड़ रुपए की एमडी ड्रग्स तैयार होनी थी। तैयार ड्रग्स को देशभर में सप्लाई करने का प्लान था।

बाड़मेर के सेड़वा में यह पूरा सेटअप मिला। यहां एमडी ड्रग्स तैयार कर देशभर में सप्लाई की प्लानिंग थी।

बाड़मेर के सेड़वा में यह पूरा सेटअप मिला। यहां एमडी ड्रग्स तैयार कर देशभर में सप्लाई की प्लानिंग थी।

तस्कर रमेश विश्नोई उर्फ अनिल निवासी नेडीनाडी (बाड़मेर) पहले जोधपुर और प्रतापगढ़ में भी फैक्ट्री लगवा चुका था। रमेश सुनसान जगहों को सबसे ज्यादा सेफ समझता था। वह फैक्ट्री लगवाने के लिए ऐसी लोकेशन चुनता था जहां लोगों की आवाजाही कम हो। फिलहाल रमेश फरार है। पुलिस और एंजेसियों को इसकी तलाश है। एक लाख रुपए का इनाम भी रखा है।

बाड़मेर की सेड़वा फैक्ट्री से पुलिस को मिली चीजों में 2 कॉपियां भी थी, जिनमें एमडी ड्रग्स बनाने की विधि लिखी थी। सामने आया कि वेब सीरीज देखकर तस्करों ने ड्रग्स बनाने का फॉर्मूला सीखा था।

मामले में अब तक जयेंद्र शुक्ला के बेटे बिरजू (सफेद बाल), सेड़वा बाड़मेर निवासी मांगीलाल (चेक शर्ट), मुंबई की रोहन केमिकल के मालिक मच्छीन्द्र तुकाराम भोंसले (पर्पल टीशर्ट) और सुशांत पाटील (चश्मा) को गिरफ्तार किया है।

मामले में अब तक जयेंद्र शुक्ला के बेटे बिरजू (सफेद बाल), सेड़वा बाड़मेर निवासी मांगीलाल (चेक शर्ट), मुंबई की रोहन केमिकल के मालिक मच्छीन्द्र तुकाराम भोंसले (पर्पल टीशर्ट) और सुशांत पाटील (चश्मा) को गिरफ्तार किया है।

जयेंद्र और शिवा असली मास्टर माइंड

तस्कर रमेश राजस्थान से था। वह फैक्ट्रियां सेटअप कराता था। इस पूरे कांड के पीछे 2 मास्टरमाइंड थे। ये थे जयेंद्र शुक्ला और शिवा।

इस मामले में पकड़े गए तस्करों ने पूछताछ में बताया- जयेंद्र शुक्ला और शिव ड्रग्स से जुड़ी वेब सीरीज देखते थे। सेड़वा फैक्ट्री से मिली 2 कॉपियां उन्हीं की थी। कॉपियों में ड्रग्स बनाने का फॉर्मूला उन्होंने ही लिखा था।

जयेंद्र शुक्ला जनवरी 2025 में ही महाराष्ट्र जेल से बाहर आया था। इसके बाद उसने ड्रग्स का काम करना शुरू किया था। जयेंद्र के पास कंप्यूटर साइंस की डिग्री है। जयेंद्र केमिकल का जानकार था। जबकि उसका साथी शिवा फैक्ट्रियां स्थापित करता था।

बाड़मेर की सेड़वा फैक्ट्री पर रेड मारकर पुलिस ने सामान जब्त किया था। इसमें कॉपियों में ड्रग्स बनाने का फॉर्मूला भी मिला।

बाड़मेर की सेड़वा फैक्ट्री पर रेड मारकर पुलिस ने सामान जब्त किया था। इसमें कॉपियों में ड्रग्स बनाने का फॉर्मूला भी मिला।

पुलिस को जांच में मिला था यह सामान

पुलिस को सेड़वा फैक्ट्री में एमडी तरल बनाने की सेटअप मशीन, मशीन में से एमडी और मादक पदार्थ बनने में काम आने वाले मिश्रित तरल पदार्थ (39 किलो 250 ग्राम) मिले।

इसके अलावा 8 प्लास्टिक के जरीकन, 7 बोतलों में जिसमें 290 किलो 840 ग्राम लिक्विड केमिकल, क्लोरोफार्म, अमोनिया, क्लोराइड, एसिड, टोलविन, ब्रोमीन, एसीएल (प्रतिबंधित) मिला।

इसके साथ कार्बन तथा प्लास्टिक की थैलियों में 5 किलो 330 ग्राम सफेद पाउडर, एक इलेक्ट्रिक कांटा जनरेटर मिला था।

इस मामले में पुलिस ने सेड़वा में केस दर्ज कराया था। अब तक 4 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। 8 की तलाश जारी है।

बाड़मेर के सेड़वा में मिली फैक्ट्री को लेकर जो खुलासे हुए, उसके बाद प्रतापगढ़ और महाराष्ट्र में कार्रवाई की गई।

बाड़मेर के सेड़वा में मिली फैक्ट्री को लेकर जो खुलासे हुए, उसके बाद प्रतापगढ़ और महाराष्ट्र में कार्रवाई की गई।

फैक्ट्री लगाने के लिए सेड़वा में खेत 5 लाख में किराए पर लिया

जानकारी में सामने आया कि बाड़मेर के सेड़वा में एमडी ड्रग्स की फैक्ट्री लगाने के लिए खेत मालिक को एडवांस 5 लाख रुपए दिए गए थे। बाकी के 5 लाख बाद में देने का वादा किया था।

खेत मालिक को महाराष्ट्र और प्रतापगढ़ में चल रही फैक्ट्रियों के फोटो दिखाए थे। इसके बाद खेत मालिक ने सेड़वा के धोलकिया कारटिया गांव में फैक्ट्री लगाने की हामी भरी थी।

सेड़वा फैक्ट्री में तैयार माल तस्कर रमेश देशभर में करता सप्लाई

पुलिस पूछताछ में सामने आया कि सेड़वा फैक्ट्री से होने वाला तैयार माल तस्कर रमेश विश्नोई को मिलना था। जिसे वह पूरे देश में सप्लाई करता।

बाड़मेर में फैक्ट्री लगाने के लिए फर्जी फर्मों के नाम सामान खरीदा गया। यह काम मुंबई के आरोपी बिरजू ने किया। उसने मुंबई की नम्रता ग्लास कंपनी ढाणे से मशीन सेटअप के लिए कांच की सामग्री खरीदी। इसके बाद मुंबई की ही रोहन कंपनी के मच्छीन्द्र तुकाराम भौसले से अवैध मादक पदार्थ बनाने के लिए रासायनिक पदार्थ, केमिकल, एसिड खरीदा।

यह सब उसने जैसलमेर में महादेव इंटरप्राइजेज नाम की फर्जी फर्म के बिल और जीएसटी नंबर देकर खरीदा था। सारी सामग्री को टेम्पो से बाड़मेर मंगवाया गया।

बाड़मेर के बाद संयुक्त कार्रवाई, 88 करोड़ का केमिकल पकड़ा

23 जुलाई को बाड़मेर में हुई कार्रवाई के बाद जांच टीमें एक्टिव हो गई। बाड़मेर से मिले इनपुट के बाद 6 अगस्त को एनसीबी गुजरात, महाराष्ट्र पुलिस और प्रतापगढ़ (राजस्थान) पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र के रायगढ़ और राजस्थान के प्रतापगढ़ से एमडी बनाने के उपकरण और 88 करोड़ के केमिकल बरामद किए।

ड्रग्स को 8-10 फीट गहरे गड्ढे में झाड़ियों में छुपाया गया था।

एनसीबी जोनल डायरेक्टर घनश्याम सोनी ने बताया- बाड़मेर जिला फिलहाल नशा तस्करों के लिए हॉट स्पॉट है। हम यहां मुखबिर तंत्र को तैयार कर रहे हैं। पुलिस समेत सभी एजेंसियों को सतर्क रहने को कहा है।

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नारकोटिक्स वेब सीरीज देखकर आरोपी बिरजू शुक्ला ड्रग्स बनाने की विधि को कागज पर उतार दिया। इसके बाद उसने राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात में अपने साथियों के साथ मिलकर ड्रग्स फैक्ट्री लगाई। बाड़मेर पुलिस की सूचना पर बाड़मेर पुलिस ने एमडी फैक्ट्री मामले के रोहन कैमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड के मालिक को महाराष्ट्र से प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया है। (पढ़ें पूरी खबर)



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